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Wednesday, 19 August 2026
राजनीति

उद्धव के लिए जून का संकट: ऑपरेशन टाइगर-2

author
Komal
संवाददाता
📅 19 June 2026, 6:16 AM ⏱ 1 मिनट 👁 944 views
उद्धव के लिए जून का संकट: ऑपरेशन टाइगर-2
📷 aarpaarkhabar.com

महाराष्ट्र की राजनीति में फिर से संकट के बादल मंडराने लगे हैं। शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) के छह सांसदों के पार्टी से अलग होने के बाद अब विधायकों के स्तर पर बागी होने का खतरा बढ़ गया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार जून का महीना एक बार फिर से उद्धव ठाकरे के लिए संकट का समय साबित हो सकता है। दावा किया जा रहा है कि शिवसेना यूबीटी के लगभग 20 में से 16 विधायक शिंदे गुट के संपर्क में हैं। इसी के मद्देनजर ऑपरेशन टाइगर-2 शुरू करने की बातें सामने आ रही हैं।

शिवसेना में विभाजन की घटनाएं पिछले कुछ सालों में एक आम बात बन गई हैं। पहले 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में विद्रोह हुआ था जिससे पार्टी में बड़ा खंड बन गया। उसके बाद 2024 में राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के साथ भी कुछ विवाद सामने आए। लेकिन सबसे बड़ा झटका तब लगा जब शिवसेना के कुछ प्रमुख सांसद पार्टी से अलग हो गए। यह परिस्थिति उद्धव ठाकरे को अत्यधिक चिंतित कर दी है।

सांसदों के बाद विधायकों पर संकट

शिवसेना यूबीटी के लिए यह समय बेहद संवेदनशील है। जून महीना आते ही पार्टी के लगभग 16 विधायकों का नाम शिंदे गुट से संपर्क में होने के संदर्भ में सामने आने लगा है। इन विधायकों की सूची में कुछ प्रभावशाली और अनुभवी नाम भी शामिल हैं। ये विधायक महाराष्ट्र की राजनीति में अपनी मजबूत जड़ें रखते हैं और विभिन्न जिलों में प्रभावशाली हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि ये 16 विधायक शिवसेना यूबीटी से अलग हो जाते हैं तो उद्धव ठाकरे की पार्टी बहुत कमजोर हो जाएगी। महाराष्ट्र की राजनीति में पहले से ही उद्धव ठाकरे की स्थिति कमजोर हो चुकी है। ऐसे में विधायकों का बागी होना पार्टी की नींव को हिला देगा।

महाराष्ट्र विधानसभा में शिवसेना यूबीटी के कुल 20 विधायक हैं। यदि इनमें से 16 पार्टी से अलग हो जाते हैं तो पार्टी के पास मात्र 4 विधायक रह जाएंगे। यह संख्या किसी भी राजनीतिक दल के लिए व्यावहारिक रूप से कोई मायने नहीं रखती है। इससे शिवसेना यूबीटी की राज्य की राजनीति में मौजूदगी लगभग खत्म हो जाएगी।

ऑपरेशन टाइगर-2 क्या है?

ऑपरेशन टाइगर-2 शिंदे गुट द्वारा शिवसेना यूबीटी के विधायकों को अपनी ओर मिलाने की एक रणनीतिक योजना है। इस ऑपरेशन की तुलना 2022 में हुए पहले ऑपरेशन टाइगर से की जाती है जब एकनाथ शिंदे ने बड़ी संख्या में शिवसेना के विधायकों को अपने साथ लाया था। उस समय 40 से अधिक विधायक शिंदे के साथ चले गए थे।

ऑपरेशन टाइगर-2 की योजना में शिंदे गुट विभिन्न तरीकों का इस्तेमाल कर रहा है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार इन विधायकों को विभिन्न पदों का लालच दिया जा रहा है। कुछ को मंत्री बनाने का वादा किया जा रहा है तो कुछ को विभिन्न सरकारी योजनाओं में विशेष लाभ देने का आश्वासन दिया जा रहा है। इसके अलावा वित्तीय लालच भी दिया जा रहा है।

शिंदे गुट के नेतृत्व में एकनाथ शिंदे खुद सरकार के मुख्यमंत्री हैं। यह स्थिति शिंदे के लिए अत्यंत लाभकारी है। वे सरकारी मशीनरी, प्रशासनिक सुविधाओं और विभिन्न योजनाओं का इस्तेमाल करके विधायकों को अपनी ओर खींच सकते हैं। इसी कारण से विधायकों के बागी होने की संभावना अत्यधिक बढ़ गई है।

मानसून सत्र में बड़ा संकट

महाराष्ट्र विधानसभा का मानसून सत्र जुलाई में शुरू होने वाला है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसी सत्र के दौरान बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। मानसून सत्र महाराष्ट्र की राजनीति में ऐतिहासिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण साबित हुआ है। पिछली कई बार सत्ता में परिवर्तन और विधायकों के बागी होने की घटनाएं इसी समय देखी गई हैं।

शिवसेना यूबीटी के विधायकों के बागी होने का मुद्दा मानसून सत्र का मुख्य विषय बन सकता है। यदि पूर्वानुमान सही साबित होते हैं और 16 विधायक पार्टी से अलग हो जाते हैं तो महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आ जाएगा। इससे सरकार की स्थिति भी प्रभावित हो सकती है।

उद्धव ठाकरे इस समय अत्यंत दबाव में हैं। उन्होंने अपने विधायकों को एकजुट रहने का निर्देश दिया है। शिवसेना यूबीटी की नेतृत्व टीम राज्य के विभिन्न हिस्सों में जाकर विधायकों को पार्टी में रोकने का प्रयास कर रही है। लेकिन शिंदे गुट की मजबूत स्थिति और सरकारी संसाधनों के सामने यह प्रयास पर्याप्त साबित हो पाएंगे इसमें संदेह है।

जून का महीना उद्धव ठाकरे के लिए एक निर्णायक समय साबित होने वाला है। आने वाले कुछ हफ्तों में महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है। शिवसेना के विभाजन की प्रक्रिया अगर जारी रहती है तो यह पार्टी के लिए अंत की ओर ले जा सकती है। इस समय उद्धव ठाकरे को अपनी पार्टी और विधायकों को बचाने के लिए सभी संभव कदम उठाने होंगे।