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Thursday, 30 July 2026
समाचार

बच्चे को किस उम्र से अंडा खिलाएं – फायदे और सावधानियां

author
Komal
संवाददाता
📅 20 June 2026, 6:46 AM ⏱ 1 मिनट 👁 774 views
बच्चे को किस उम्र से अंडा खिलाएं – फायदे और सावधानियां
📷 aarpaarkhabar.com

बच्चों के पालन-पोषण को लेकर माता-पिता हमेशा सतर्क रहते हैं। उन्हें यह चिंता रहती है कि उनके बच्चे को सही पोषण मिल रहा है या नहीं। अंडा खिलाने को लेकर भी माता-पिता के मन में कई सवाल होते हैं। आज के समय में जब पेरेंटिंग के तरीके तेजी से बदल रहे हैं, तब सही जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है। हाल ही में हुई नई रिसर्च बच्चों को अंडा खिलाने के बारे में काफी महत्वपूर्ण जानकारी दे रही है जो माता-पिता के कन्फ्यूजन को दूर करने में मदद कर सकती है।

अंडा पोषक तत्वों का एक बेहतरीन स्रोत माना जाता है। इसमें प्रोटीन, विटामिन्स, मिनरल्स और जरूरी फैट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। लेकिन सवाल यह है कि बच्चों को अंडा कब से खिलाना शुरू करें। विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारतीय बाल चिकित्सा अकादमी की सलाह के अनुसार, छह महीने के बाद जब बच्चे को ठोस आहार देना शुरू किया जाता है, तभी से अंडा दिया जा सकता है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञ आठ से नौ महीने के बाद अंडा देने की सलाह देते हैं।

बच्चों को अंडा देने की सही उम्र क्या है

नवजात बच्चे के जीवन के पहले छह महीने तक सिर्फ माता के दूध को ही सर्वश्रेष्ठ आहार माना जाता है। छह महीने के बाद जब बच्चे के दांत निकलने लगते हैं और पाचन तंत्र मजबूत होने लगता है, तब उसे ठोस आहार देना शुरू किया जाता है। इसी समय अंडा देना शुरू किया जा सकता है। लेकिन शुरुआत में अंडे की जर्दी (अंडे का पीला हिस्सा) ही दें, अंडे की सफेदी नहीं। अंडे की सफेदी में एलर्जी का खतरा अधिक रहता है। इसलिए नौ से दस महीने के बाद ही पूरा अंडा देना चाहिए।

नई रिसर्च में यह भी पाया गया है कि जल्दी अंडा देने से बच्चों में अंडे से होने वाली एलर्जी का खतरा कम हो जाता है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की एक स्टडी में पाया गया कि जो बच्चों को छोटी उम्र में ही अलर्जेनिक खाद्य पदार्थ दिए जाते हैं, उन्हें बाद में उन चीजों से एलर्जी होने की संभावना कम होती है। इसलिए डॉक्टर्स की सलाह है कि बिना किसी डर के छह महीने के बाद अंडा देना शुरू किया जा सकता है।

हालांकि, अगर परिवार में किसी को अंडे से एलर्जी है तो बच्चे को अंडा देने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लेना चाहिए। कुछ बच्चों में एलर्जी की समस्या ज्यादा होती है, ऐसे में सावधानी बरतना जरूरी है। पहली बार अंडा देते समय बहुत कम मात्रा में दें और फिर धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाएं। बच्चे को अंडा देने के बाद कम से कम दो से तीन घंटे तक उसका ध्यान रखें।

अंडे के पोषक तत्व और स्वास्थ्य लाभ

अंडा प्रकृति का सबसे संपूर्ण पोषक आहार माना जाता है। इसमें उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन, विटामिन-डी, विटामिन-बी12, कोलिन और ल्यूटिन जैसे महत्वपूर्ण तत्व पाए जाते हैं। प्रोटीन बच्चों की शारीरिक वृद्धि के लिए बहुत आवश्यक है। अंडे का सेवन करने से बच्चों की लंबाई और वजन सही तरीके से बढ़ता है।

विटामिन-डी हड्डियों को मजबूत बनाता है और कैल्शियम का अवशोषण बढ़ाता है। बी12 विटामिन तंत्रिका तंत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कोलिन मस्तिष्क के विकास के लिए अत्यंत जरूरी है। अंडे में पाया जाने वाला ल्यूटिन आंखों की रोशनी बढ़ाता है। शोध में पाया गया है कि नियमित रूप से अंडा खाने वाले बच्चे बेहतर मानसिक विकास दिखाते हैं।

अंडा देते समय सावधानियां और टिप्स

बच्चे को अंडा देते समय कुछ महत्वपूर्ण बातें ध्यान में रखनी चाहिए। सबसे पहले अंडा हमेशा अच्छी तरह से पकाया हुआ हो। कच्चा या आधा पका हुआ अंडा बिल्कुल न दें क्योंकि इससे साल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया के संक्रमण का खतरा रहता है। अंडे को उबालकर, भूनकर या उबाल कर बनाया जा सकता है। शुरुआत में अंडे की जर्दी को अच्छी तरह मैश करके दें ताकि बच्चे को निगलने में आसानी हो।

हफ्ते में कम से कम तीन से चार बार बच्चे को अंडा दिया जा सकता है। लेकिन यह जरूरी है कि बच्चे का बाकी आहार संतुलित हो। अंडे के साथ सब्जियां, फल और अनाज भी दें। अंडा देते समय नमक, मिर्च या तेल का इस्तेमाल न करें। अंडे को साधारण तरीके से पकाएं ताकि उसके पोषक तत्व नष्ट न हों।

अगर बच्चे को अंडा देने के बाद दस्त, उल्टी, खुजली, सूजन या सांस लेने में परेशानी जैसे कोई लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। ये एलर्जी के संकेत हो सकते हैं। बच्चों की सेहत को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही न करें। हमेशा बाल विशेषज्ञ की सलाह लें और सही जानकारी के साथ बच्चों को पोषक आहार दें। माता-पिता की सावधानी और सही निर्णय ही बच्चों के स्वस्थ विकास की कुंजी है।