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Thursday, 16 July 2026
मौसम

पश्चिमी तट पर मॉनसून अटका, आंधी-तूफान का अलर्ट

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Komal
संवाददाता
📅 20 June 2026, 7:16 AM ⏱ 1 मिनट 👁 888 views
पश्चिमी तट पर मॉनसून अटका, आंधी-तूफान का अलर्ट
📷 aarpaarkhabar.com

पिछले कई दिनों से भारतीय मौसम विभाग की ओर से आई रिपोर्टों में एक चिंताजनक स्थिति सामने आ रही है। देश के पश्चिमी तट पर मॉनसून की गति पूरी तरह से थम गई है। पिछले 11 दिनों से यह स्थिति बरकरार है, जिससे महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक और केरल जैसे राज्यों में भारी बारिश की उम्मीद में इंतजार जारी है। दूसरी ओर, उत्तर-पश्चिम भारत में मौसमी गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं और यहां के लोग आंधी-तूफान के कहर से बचने के लिए सतर्क हो गए हैं।

भारतीय मौसम विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह स्थिति काफी असामान्य है। आमतौर पर जून के महीने में मॉनसून पश्चिमी तट पर अपनी तेज गति से आगे बढ़ता है और केरल से होकर पूरे भारत में फैल जाता है। लेकिन इस बार मॉनसून की प्रवृत्ति में बदलाव देखा जा रहा है। मौसम विज्ञानियों का मानना है कि समुद्री तापमान में बदलाव और अंतरराष्ट्रीय मौसमी पैटर्न इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।

पश्चिमी तट के कई इलाकों में किसान और व्यापारी चिंतित हैं। मॉनसून के देरी से आने का असर सीधे कृषि क्षेत्र पर पड़ रहा है। खरीफ सीजन की बुवाई के लिए किसानों को पर्याप्त बारिश की जरूरत है। इस देरी के कारण बुवाई का काम रुका हुआ है और फसल की पैदावार को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। वहीं, तटीय इलाकों में पर्यटन और व्यापार भी प्रभावित हो रहे हैं।

उत्तर-पश्चिम भारत में आंधी-तूफान का खतरा

जहां पश्चिमी तट पर मॉनसून की कमी दिख रही है, वहीं उत्तर-पश्चिम भारत में मौसम का रुख बिल्कुल अलग है। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में भारतीय मौसम विभाग ने आंधी-तूफान और बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया है। पिछले कुछ दिनों में तापमान में तेजी से उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, जो आंधी-तूफान के आने के संकेत हैं।

दिल्ली और इसके आसपास के क्षेत्रों में हवाओं की तेजी 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई है। बिजली गिरने की घटनाएं भी बढ़ी हैं। लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे खुली जगहों पर न जाएं और बिजली के उपकरणों का इस्तेमाल सावधानी से करें। स्कूल और कॉलेजों में भी छात्रों को घर पहुंचाने के लिए समय सारणी में बदलाव किए गए हैं।

राजस्थान में भी हालात गंभीर हैं। जयपुर, जोधपुर और बीकानेर जैसे शहरों में तूफानी हवाओं के कारण बिजली की आपूर्ति में व्यवधान आ रहा है। कई इलाकों में पेड़ भी गिरे हैं और इमारतों को नुकसान हुआ है। प्रशासन ने आपातकालीन सेवाओं को सतर्क कर दिया है।

मौसमी विश्लेषण और भविष्य की संभावनाएं

भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, यह स्थिति अगले कुछ दिनों तक बनी रह सकती है। पश्चिमी तट पर मॉनसून के रुकने के पीछे समुद्र की सतह पर बने निम्नदबाव के क्षेत्र की कमी बताई जा रही है। सामान्य वर्षा के मुकाबले इस बार पश्चिमी तट पर कम बारिश हुई है।

हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आने वाले 7-10 दिनों में स्थिति में सुधार हो सकता है। मॉनसून की एक नई प्रणाली पश्चिमी तट की ओर बढ़ रही है, जिससे अगले हफ्ते से भारी बारिश की संभावना है। यदि ऐसा होता है, तो पश्चिमी तट पर मॉनसून की गति फिर से तेज हो जाएगी और देश के अन्य हिस्सों में भी इसका असर दिखने लगेगा।

दूसरी ओर, उत्तर-पश्चिम भारत में आंधी-तूफान की स्थिति भी कुछ दिनों में सामान्य हो सकती है। तापमान में गिरावट और हवाओं की गति में कमी की उम्मीद है। लेकिन अभी के लिए सभी को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

इस मौसमी अव्यवस्था का असर कई क्षेत्रों में देखा जा रहा है। कृषि से लेकर बिजली उत्पादन तक, सभी क्षेत्रों को इसका प्रभाव पड़ रहा है। सरकार ने किसानों के लिए मुआवजे की घोषणा की है और प्रशासन आपातकालीन राहत के लिए तैयार है। लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें और अपनी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

यह स्थिति जलवायु परिवर्तन के प्रभावों की ओर भी इशारा कर रही है। वैश्विक तापमान में वृद्धि मौसमी पैटर्न को प्रभावित कर रही है। भारत को इस चुनौती का सामना करने के लिए और बेहतर योजनाओं की जरूरत है। मौसम विज्ञान में निवेश बढ़ाकर भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बेहतर तरीके से निपटा जा सकता है। आने वाले समय में मॉनसून और मौसमी गतिविधियों पर सतर्क नजर रखनी होगी।