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Thursday, 30 July 2026
समाचार

समृद्धि से नहीं योग से आएगी असली खुशहाली

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Komal
संवाददाता
📅 21 June 2026, 7:00 AM ⏱ 1 मिनट 👁 515 views
समृद्धि से नहीं योग से आएगी असली खुशहाली
📷 aarpaarkhabar.com

समृद्धि से नहीं, योग से आएगी असली खुशहाली: सद्गुरु

दुनिया भर में जहां लोग भौतिक समृद्धि की दौड़ में शामिल हैं, वहीं आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु एक बिल्कुल ही अलग संदेश दे रहे हैं। उनके अनुसार असली खुशहाली न तो पैसे से मिलती है और न ही भौतिक संपत्ति से। असली खुशहाली तो योग और आंतरिक शांति से ही संभव है। यह विचार आज के दौर में जब पूरी दुनिया आर्थिक विकास के पीछे भाग रही है, बेहद महत्वपूर्ण और प्रासंगिक हो गया है।

सद्गुरु ने हाल ही में यह विचार व्यक्त किया है कि जो लोग शक्तिशाली पदों पर बैठे हैं, अब वे यह समझने लगे हैं कि जीवन की असली समृद्धि बाहर नहीं, अंदर की ओर मुड़कर ही मिलती है। यह एक बहुत बड़ा बदलाव है। पिछले कुछ सौ सालों में पहली बार दुनिया के प्रमुख नेता और राष्ट्राध्यक्ष केवल आर्थिक विकास, सेना की शक्ति और राजनीतिक प्रभाव के बारे में ही बात नहीं कर रहे हैं।

इस सकारात्मक बदलाव का एक बड़ा कारण अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की घोषणा है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से २१ जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया गया। इस निर्णय ने दुनिया भर में योग के प्रति एक नई जागरूकता और रुचि पैदा की है। अब दुनिया भर के नेता न केवल अपने देशों की आर्थिक स्थिति के बारे में सोचते हैं, बल्कि अपने नागरिकों की मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के बारे में भी गंभीरता से विचार करते हैं।

योग: आंतरिक खुशहाली का मार्ग

सद्गुरु के अनुसार योग केवल एक व्यायाम पद्धति नहीं है। यह एक संपूर्ण जीवन दर्शन है जो मनुष्य के शरीर, मन और आत्मा को संतुलित करता है। योग का प्रमुख उद्देश्य यह है कि मनुष्य अपने अंदर की असीम शक्ति और क्षमता को जाग्रत करे। जब एक व्यक्ति नियमित रूप से योग का अभ्यास करता है, तो उसका मन शांत होता है, उसकी चिंताएं कम होती हैं और वह जीवन को एक अलग नजरिए से देखने लगता है।

आजकल की भागदौड़ भरी जीवनशैली में लोग तनाव, चिंता और अवसाद का शिकार बन गए हैं। भले ही उनके पास बहुत सारा पैसा हो और सुविधाएं हों, लेकिन आंतरिक शांति और संतुष्टि का अभाव उन्हें हर समय व्यथित रखता है। योग इसी समस्या का समाधान प्रदान करता है। जब मनुष्य योग का नियमित अभ्यास करता है, तो उसका मस्तिष्क शांत होता है, उसकी सांसें गहरी और नियंत्रित हो जाती हैं, और उसका पूरा शरीर एक सामंजस्यपूर्ण अवस्था में आ जाता है।

योग के माध्यम से व्यक्ति न केवल अपने शरीर को स्वस्थ रखता है, बल्कि अपने मन को भी शुद्ध और प्रसन्न रखता है। यह एक ऐसी खुशहाली है जो किसी भी बाहरी परिस्थिति या परिवर्तन से प्रभावित नहीं होती। यह आंतरिक खुशहाली स्थायी और सच्ची होती है।

विश्व नेताओं का बदलता नजरिया

सद्गुरु का यह अवलोकन बेहद सटीक है कि विश्व के शक्तिशाली नेता अब अपने नागरिकों की आंतरिक खुशहाली के बारे में सोचने लगे हैं। यह एक बहुत बड़ा और सकारात्मक बदलाव है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की घोषणा के बाद से, दुनिया भर की सरकारें योग को अपने स्वास्थ्य कार्यक्रमों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने लगी हैं।

जब शीर्ष नेता योग के महत्व को समझते हैं और इसे बढ़ावा देते हैं, तो यह संदेश उनके देश के आम जनता तक भी पहुंचता है। स्कूलों में योग की कक्षाएं शुरू की जा रही हैं, कार्यालयों में योग कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, और सार्वजनिक पार्कों में लोग एक साथ योग करते हुए दिखाई दे रहे हैं। यह सब कुछ इस बात का संकेत है कि दुनिया धीरे-धीरे लेकिन निश्चित रूप से अपनी सोच को बदल रही है।

सद्गुरु का यह विचार कि समृद्धि से असली खुशहाली नहीं आती, बल्कि योग और आंतरिक शांति से ही आती है, आज के समय में सबसे महत्वपूर्ण संदेश है। यदि हम अपने जीवन में खुशहाली चाहते हैं, तो हमें न केवल बाहरी सुविधाओं की ओर ध्यान देना चाहिए, बल्कि अपने अंदर की ओर भी मुड़ना चाहिए। योग एक ऐसा साधन है जो हमें इसी दिशा में आगे बढ़ने में मदद कर सकता है। इसलिए, यदि आप अभी तक योग नहीं कर रहे हैं, तो आज ही इसकी शुरुआत करें और असली खुशहाली की ओर अपनी यात्रा शुरू करें।