NEET परीक्षा में देर से आने वाले छात्रों को एंट्री नहीं
NEET परीक्षा में देरी का खामियाजा
देश भर के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली NEET परीक्षा में एक बार फिर से हृदयविदारक घटनाएं सामने आईं। सफेद कोट पहनने का सपना लिए परीक्षा हॉल की ओर दौड़ने वाले हजारों छात्र-छात्राओं के लिए कुछ मिनटों की देरी उनके पूरे भविष्य को बदल गई। परीक्षा केंद्रों के गेटों के बाहर खड़े होकर अपने सपनों को टूटते देखने वाले छात्रों के आंसू किसी को भी भावुक कर सकते हैं।
इस बार जब NEET की पुनः परीक्षा का आयोजन किया गया, तो लाखों छात्र-छात्राएं परीक्षा हॉल में प्रवेश के लिए अपने निर्धारित समय से पहले पहुंचने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन शहर के ट्रैफिक, परिवहन के साधनों की कमी और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने के मार्गों में व्यवधान के कारण कई छात्र-छात्राएं अपने केंद्रों पर समय से नहीं पहुंच सके। जहां परीक्षा नियमों के अनुसार परीक्षा शुरू होने के बाद किसी भी परीक्षार्थी को प्रवेश नहीं दिया जाता है।
रो-रोकर पापा-मां को समझाते बच्चे
दिल्ली के एक परीक्षा केंद्र के बाहर का दृश्य किसी की भी आंखों में आंसू ला सकता है। एक छात्र के पिता अपने बेटे को गले लगाकर रो रहे थे। बेटा कह रहा था कि उसने पूरी मेहनत की थी, पूरे साल पढ़ाई की थी, लेकिन सिर्फ पंद्रह मिनट की देरी से उसे परीक्षा देने का मौका नहीं मिल सका। एक माता अपनी बेटी को समझा रही थीं कि यह पहली बार नहीं है, अगली बार और अच्छे से तैयारी करके आ जाएंगे। लेकिन उस बेटी की आंखों में जो निराशा और असहायता नजर आ रही थी, वह दिल को पिघला देने वाली थी।
मुंबई के एक अन्य परीक्षा केंद्र पर एक छात्रा को देखा गया जो अपने एडमिट कार्ड को बार-बार देख रही थी, जैसे वह किसी भी क्षण अंदर जा सकने की उम्मीद कर रही थी। उसके साथ खड़े उसके भाई ने बताया कि यह परीक्षा के लिए वह पिछले दो घंटे से अलर्ट थी। सुबह जल्दी तैयार हो गई थी, लेकिन रास्ते में कार खराब हो गई। अब यह पूरा प्रयास व्यर्थ हो गया है।
चेन्नई के एक छात्र के साथ तो और भी दुर्भाग्य हुआ। वह ऑटो में सवार होकर परीक्षा केंद्र की ओर जा रहा था, लेकिन रास्ते में भीड़ की वजह से वह ट्रैफिक जाम में फंस गया। जब वह परीक्षा केंद्र पहुंचा, तो परीक्षा शुरू हो चुकी थी। वह केंद्र के प्रभारी से गिड़गिड़ाता रहा कि उसे प्रवेश दे दिया जाए, लेकिन नियमों के कारण उसका अनुरोध स्वीकार नहीं हुआ।
परीक्षा नियम और छात्रों की दुर्दशा
NEET परीक्षा के नियमों में कहा गया है कि परीक्षा शुरू होने के बाद किसी भी परीक्षार्थी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। यह नियम परीक्षा की पारदर्शिता और ईमानदारी को बनाए रखने के लिए बनाया गया है। लेकिन इस कड़े नियम के कारण हजारों छात्र-छात्राएं अपने सपनों से वंचित हो जा रहे हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा आयोजकों को परीक्षार्थियों के लिए पर्याप्त समय देना चाहिए। एक परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के लिए परीक्षार्थियों को कम से कम डेढ़ घंटे पहले निर्देश दिया जाना चाहिए। साथ ही, शहर की ट्रैफिक स्थितियों को ध्यान में रखकर परीक्षा के समय निर्धारण में लचीलापन दिखाया जाना चाहिए।
दिल्ली की एक शिक्षा विशेषज्ञ डॉक्टर प्रिया शर्मा का कहना है कि ये नियम बहुत कठोर हैं। छात्रों को मानसिक दबाव में रखने से उनका प्रदर्शन बेहतर नहीं होता। उन्हें कुछ सहानुभूति दिखानी चाहिए, विशेष रूप से जब परिस्थितियां उनके नियंत्रण से बाहर हों।
कई अभिभावकों का भी यही मानना है। वे कहते हैं कि ट्रैफिक, परिवहन और अन्य व्यावहारिक समस्याओं के कारण देरी होना आम बात है। ऐसे में परीक्षा नियमों में कुछ लचीलापन होना चाहिए। परीक्षा शुरू होने के पन्द्रह-बीस मिनट बाद पहुंचने वाले परीक्षार्थियों को प्रवेश दिया जा सकता है, पर उन्हें परीक्षा के लिए अतिरिक्त समय न दिया जाए।
इस बार जो छात्र परीक्षा में शामिल नहीं हो सके, उन्हें अगली परीक्षा का इंतजार करना होगा। बहुत से छात्र-छात्राएं दूसरी बार फिर से तैयारी करने का फैसला कर रहे हैं। कुछ तो अपने भविष्य के बारे में ही संशय में हैं। लेकिन आशा है कि भविष्य में परीक्षा आयोजकों ये गलतियां दोहराई नहीं जाएंगी और छात्रों को ध्यान में रखते हुए व्यवहारिक नियम बनाए जाएंगे।
हर बार की तरह इस बार भी NEET परीक्षा ने लाखों छात्रों के सपनों को तोड़ा है। लेकिन जीवन यहीं खत्म नहीं हो जाता। परीक्षा में असफलता जीवन में असफलता नहीं है। कई महान डॉक्टर, वकील और इंजीनियर हैं जो पहली बार परीक्षा में असफल रहे थे। इसलिए, इन छात्र-छात्राओं को हार न मानकर फिर से कोशिश करनी चाहिए और अपने सपनों का पीछा करते रहना चाहिए।




