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Wednesday, 20 May 2026
समाचार

अखिलेश यादव का विधायकों पर गुस्सा, SP बिश्नोई की शादी मामला

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Komal
संवाददाता
📅 03 April 2026, 12:29 PM ⏱ 1 मिनट 👁 427 views
अखिलेश यादव का विधायकों पर गुस्सा, SP बिश्नोई की शादी मामला
📷 Aaj Tak

अखिलेश यादव की नाराजगी: सपा विधायकों का संभल SP की शादी में जाना पड़ा भारी

राजस्थान के जोधपुर में दो आईपीएस अधिकारियों की शाही शादी में शामिल होना समाजवादी पार्टी के तीन विधायकों के लिए मुसीबत बन गई है। संभल के एसपी केके बिश्नोई और बरेली की आईपीएस अंशिका वर्मा के विवाह समारोह में पहुंचने वाले सपा विधायकों पर पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की नाराजगी सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है।

यह मामला तब और भी संवेदनशील हो गया जब याद दिलाया गया कि केके बिश्नोई वही अधिकारी हैं जो संभल की हालिया घटनाओं के दौरान ड्यूटी पर तैनात थे। अखिलेश यादव का मानना है कि पार्टी के विधायकों का इस अवसर पर शामिल होना राजनीतिक रूप से गलत संदेश देता है।

अखिलेश यादव का विधायकों पर गुस्सा, SP बिश्नोई की शादी मामला

किन विधायकों ने की शादी में शिरकत?

सूत्रों के अनुसार, समाजवादी पार्टी के तीन प्रमुख विधायकों ने जोधपुर में आयोजित इस भव्य विवाह समारोह में हिस्सा लिया था। हालांकि शुरुआत में इसे एक सामान्य सामाजिक कार्यक्रम माना गया, लेकिन बाद में इसके राजनीतिक निहितार्थ सामने आए।

अखिलेश यादव ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि पार्टी के सदस्यों को ऐसे अवसरों पर जाने से पहले पार्टी की नीतियों और स्थिति को ध्यान में रखना चाहिए। उनका कहना है कि यह केवल एक व्यक्तिगत मामला नहीं है, बल्कि इसके व्यापक राजनीतिक प्रभाव हैं।

संभल घटना का कनेक्शन

यह विवाद इसलिए और भी गहरा हो गया है क्योंकि केके बिश्नोई संभल की उन घटनाओं से जुड़े हुए हैं जिन्होंने राज्य की राजनीति में हलचल मचाई थी। समाजवादी पार्टी का आरोप है कि संभल की घटनाओं में पुलिस प्रशासन की भूमिका विवादास्पद रही है।

ऐसे में, पार्टी के विधायकों का संभल के एसपी की शादी में शामिल होना अखिलेश यादव को रास नहीं आया। उन्होंने इसे पार्टी की विश्वसनीयता के लिए हानिकारक बताया है। सपा अध्यक्ष का मानना है कि ऐसे कदम पार्टी की जनता के बीच छवि को प्रभावित कर सकते हैं।

भाजपा की प्रतिक्रिया और राजनीतिक हलचल

भारतीय जनता पार्टी ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह समाजवादी पार्टी के अंदरूनी विरोधाभास को दर्शाता है। उनका आरोप है कि सपा के नेता एक तरफ तो सरकार और प्रशासन की आलोचना करते हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके ही अधिकारियों के साथ व्यक्तिगत संबंध बनाए रखते हैं।

इस घटना ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। विपक्षी दल इसे सपा की दोहरी नीति का उदाहरण बताते हुए सवाल उठा रहे हैं। वहीं, समाजवादी पार्टी के अंदर भी इस मुद्दे पर मतभेद नजर आ रहे हैं।

पार्टी अनुशासन का सवाल

अखिलेश यादव की इस प्रतिक्रिया को पार्टी अनुशासन को मजबूत करने के कदम के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना दिखाती है कि पार्टी अध्यक्ष अपने नेताओं की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखते हैं और किसी भी ऐसे कदम को बर्दाश्त नहीं करते जो पार्टी की नीति के विपरीत हो।

समाजवादी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पार्टी में स्पष्ट निर्देश हैं कि विधायकों को ऐसे कार्यक्रमों में भाग लेने से पहले पार्टी की अनुमति लेनी चाहिए, खासकर जब वे राजनीतिक रूप से संवेदनशील हों।

यह पूरा मामला राजनीतिक दलों के लिए एक सबक भी है कि व्यक्तिगत और राजनीतिक रिश्तों के बीच संतुलन बनाना कितना जरूरी है। अखिलेश यादव की इस सख्त प्रतिक्रिया से साफ होता है कि वह पार्टी की विचारधारा से कोई समझौता नहीं करना चाहते।

आने वाले दिनों में देखना होगा कि यह विवाद कितना आगे बढ़ता है और क्या इससे समाजवादी पार्टी की आंतरिक एकता पर कोई प्रभाव पड़ता है। फिलहाल, यह घटना उत्तर प्रदेश की राजनीति में गर्मागर्म बहस का मुद्दा बनी हुई है।