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Wednesday, 22 July 2026
मौसम

कमजोर मानसून: देश में सूखे का खतरा, 43% कम बारिश

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Komal
संवाददाता
📅 24 June 2026, 5:31 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.2K views
कमजोर मानसून: देश में सूखे का खतरा, 43% कम बारिश
📷 aarpaarkhabar.com

देश में इस बार का मानसून सीजन काफी कमजोर साबित हो रहा है। मई के आखिरी हफ्ते से लेकर जून के पहले 22 दिनों तक देशभर में सामान्य से 43 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। यह स्थिति न केवल किसानों के लिए चिंता का विषय है बल्कि पूरे देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक गंभीर संकट पैदा कर सकती है। मौसम विज्ञान विभाग की रिपोर्ट के अनुसार यह कमजोर मानसून आने वाले महीनों में देशव्यापी सूखे की परिस्थिति ला सकता है।

बारिश की कमी केवल एक मौसमी समस्या नहीं है। यह देश की खाद्य सुरक्षा, कृषि उत्पादन और आम जनता के जीवन यापन को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। जब बारिश कम होती है तो फसलें खराब होती हैं, जिससे अनाज की पैदावार में भारी गिरावट आती है। इसके बाद खाद्य पदार्थों की कीमतें आसमान छूने लगती हैं और महंगाई की समस्या गंभीर हो जाती है।

मानसून कमजोर होने के कारण

इस बार मानसून कमजोर होने के पीछे कई कारण हैं। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि हिंद महासागर में समुद्र की सतह का तापमान असामान्य रूप से गर्म है जो मानसूनी हवाओं के प्रवाह को प्रभावित कर रहा है। इसके अलावा अल नीनो प्रभाव भी इस साल मजबूत देखा जा रहा है जो मानसून को कमजोर करने में सहायक हो रहा है।

जलवायु परिवर्तन के कारण भी मानसून की गतिविधि में बदलाव देखने को मिल रहा है। वैश्विक तापमान में वृद्धि से समुद्र का तापमान बढ़ रहा है और इससे मानसूनी हवाओं का पैटर्न बदल रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले सालों में ऐसी परिस्थितियां और भी गंभीर हो सकती हैं।

भारत के विभिन्न क्षेत्रों में बारिश का वितरण बेहद असमान रहा है। कहीं कहीं तो सामान्य से भी ज्यादा बारिश हुई है जबकि देश के बड़े हिस्सों में मुश्किल से कोई बारिश हुई है। यह विषमता कृषि के लिए और भी खतरनाक है क्योंकि कुछ इलाकों में बाढ़ का खतरा है तो कुछ में सूखे की समस्या।

कृषि और खाद्य सुरक्षा पर असर

कमजोर मानसून का सबसे ज्यादा असर देश की कृषि पर पड़ेगा। भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है और देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर है। जब बारिश कम होती है तो खरीफ फसलें खराब होती हैं और किसानों की आय में भारी गिरावट आती है।

इस बार के कमजोर मानसून से धान, मक्का, दलहन और तिलहन जैसी महत्वपूर्ण फसलें प्रभावित हो सकती हैं। खरीफ सीजन हमारे देश के कृषि का सबसे महत्वपूर्ण मौसम है और इसमें बारिश की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण होती है। कम बारिश के कारण सिंचाई के साधनों पर भी दबाव बढ़ेगा क्योंकि जलाशय और भूजल दोनों ही कम हो जाते हैं।

कृषि मंत्रालय पहले ही चेतावनी दे चुका है कि इस साल अगर यह स्थिति बनी रही तो खाद्यान्न का उत्पादन प्रभावित होगा। इससे न केवल किसानों को नुकसान होगा बल्कि आम आदमी को भी महंगे दामों पर खाना खरीदना पड़ेगा। सरकार गेहूं, चावल और दूसरी आवश्यक वस्तुओं के भंडार को बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है लेकिन लंबे समय तक यह समाधान काफी नहीं होगा।

महंगाई और अर्थव्यवस्था को खतरा

कमजोर मानसून से महंगाई में वृद्धि का संकट भी है। जब खाद्यान्न का उत्पादन कम होता है तो उसकी कीमतें बढ़ जाती हैं। दाल, चावल, गेहूं, सब्जियों और अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ेंगी जिससे आम आदमी के बजट पर दबाव पड़ेगा।

महंगाई की समस्या से मजदूरी बढ़ाने का दबाव बढ़ेगा और यह पूरी अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगा। रिजर्व बैंक को भी इस स्थिति में ब्याज दरों के संबंध में सावधान रहना होगा। आर्थिक विकास की दर भी प्रभावित हो सकती है क्योंकि कृषि पर आधारित उद्योग भी पीड़ित होंगे।

घरेलू स्तर पर लोगों की क्रय क्षमता कम होगी क्योंकि खाद्य पदार्थों पर अधिक खर्च करना पड़ेगा। यह गरीब और निम्न मध्यम वर्गीय परिवारों को सबसे ज्यादा प्रभावित करेगा। सरकार को खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों को और मजबूत करना होगा ताकि कमजोर वर्ग के लोग सूखे के दौरान भुखमरी का शिकार न बनें।

इस समय देश को एक समन्वित रणनीति की जरूरत है जिसमें जल संरक्षण, कृषि विज्ञान, जलवायु परिवर्तन अनुकूलन और सामाजिक सुरक्षा सभी शामिल हों। सरकार, किसान, वैज्ञानिक और आम नागरिक सभी को मिलकर इस चुनौती का सामना करना होगा। आने वाले समय में बेहतर नीतियों और बेहतर क्षमता विकास से ही हम इस तरह की समस्याओं का स्थायी समाधान निकाल पाएंगे।