दिल्ली में मॉनसून अभी दूर, आंधी-बारिश के बाद भी इंतजार
दिल्ली की राजधानी में इन दिनों मौसम का खेल बिल्कुल निराला चल रहा है। तेज हवाओं और बिखरी-बिखरी बारिश के बीच शहरवासियों को कुछ राहत जरूर मिल रही है, लेकिन असली मॉनसून की प्रतीक्षा अभी भी जारी है। गर्मी की तपिश से बचने के लिए जो लोग बारिश का इंतजार कर रहे थे, उन्हें निराशा ही मिल रही है। मौसम विभाग की रिपोर्ट्स के अनुसार, यद्यपि कमजोर मौसम सिस्टम और ट्रफ लाइन लगातार बन रहे हैं, फिर भी असल मॉनसूनी बादल दिल्ली तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
इस बार मौसम का रुख कुछ अलग ही दिख रहा है। जहां एक ओर उत्तर भारत के कई शहरों में अच्छी बारिश हो रही है, वहीं दिल्ली में स्थिति पूरी तरह अलग है। राजधानी में जो बारिश हो रही है, वह आंशिक और अनियमित है। मई के अंत और जून की शुरुआत में जब प्री-मॉनसून हवाएं आती हैं, तब दिल्ली में आंधी और बिजली गिरने के साथ बारिश होती है। लेकिन इस बार की परिस्थिति अलग है। दिल्ली के वासियों को इस बात का इंतजार है कि कब असली मॉनसून दस्तक दे और शहर को भीषण गर्मी से राहत मिले।
दिल्ली के आसमान में मॉनसून लाने वाली चुनौतियां
मौसम विभाग के वैज्ञानिकों के अनुसार, मॉनसून के आने में कई तरह की बाधाएं आ रही हैं। उच्च दबाव वाली प्रणाली दिल्ली के ऊपर बनी हुई है, जो मॉनसूनी हवाओं को आगे बढ़ने से रोक रही है। यह स्थिति हर साल नहीं होती, लेकिन इस बार मौसम विज्ञानियों को यह ट्रफ लाइन और कमजोर दबाव प्रणाली के बीच एक जटिल संतुलन नजर आ रहा है।
दिल्ली के मौसम केंद्र की रिपोर्ट बताती है कि अभी भी दिल्ली और इसके आसपास के क्षेत्रों में कोई भी मजबूत मॉनसूनी प्रणाली नहीं बनी है। हां, कुछ कमजोर सिस्टम अवश्य बन रहे हैं, जो आंशिक बारिश ला रहे हैं। लेकिन यह मॉनसून नहीं है, बल्कि मॉनसून से पहले की घटनाएं हैं। मॉनसून के लिए जरूरी है कि समुद्र से आने वाली नमीयुक्त हवाएं लगातार चलें, और उनमें पर्याप्त शक्ति हो। अभी तक दिल्ली तक आने वाली हवाएं वह शक्ति नहीं दिखा रही हैं।
जो हवाएं दक्षिण भारत से उठ रही हैं और पश्चिमी घाट को पार कर पूरे भारत में फैल रही हैं, वह अभी दिल्ली और उत्तर भारत के मैदानी इलाकों तक पूरी ताकत से नहीं पहुंच रहीं। इसका कारण यह है कि उच्च दबाव वाली प्रणाली एक बाधा की तरह काम कर रही है। यह ऐसा है जैसे किसी ने मॉनसून के रास्ते में एक दीवार खड़ी कर दी हो।
दिल्ली में बारिश के आने के संकेत
हालांकि पूरी तरह मॉनसून नहीं आया है, लेकिन मौसम विभाग ने कुछ सकारात्मक संकेत दिए हैं। आने वाले दिनों में दिल्ली के आसमान में बदलाव आने की संभावना है। जिस ट्रफ लाइन का जिक्र किया जा रहा है, वह धीरे-धीरे दिल्ली की ओर बढ़ रही है। अगर यह ट्रफ लाइन सही तरीके से विकसित हो जाए, तो संभवतः अगले एक या दो सप्ताह में दिल्ली को कुछ बेहतर बारिश देख सकते हैं।
मई का अंतिम पखवाड़ा आमतौर पर मॉनसून के आने का समय है। लेकिन इस बार का मॉनसून थोड़ा देर से आ रहा है। जून की शुरुआत में ही दिल्ली में सही मायनों में मॉनसून दस्तक दे सकता है। तब तक दिल्ली के वासियों को धैर्य रखना होगा। गर्मी अभी कुछ और दिन चलेगी, और लोगों को और इंतजार करना होगा।
मॉनसून के देरी के असर
मॉनसून की देरी के कारण किसान भी चिंतित हैं। देश के कई हिस्सों में फसलें बोने का समय आ गया है, लेकिन मॉनसून न आने से समय पर बीज नहीं बो पाए जा रहे। दिल्ली आसपास के क्षेत्रों में खेतों की सिंचाई के लिए भी बारिश का इंतजार है। पानी की कमी अभी से महसूस की जा रही है।
शहर में भी मॉनसून की देरी का असर दिख रहा है। तापमान में गिरावट नहीं आ रही है। जेट स्ट्रीम का असर भी गर्मी में कमी नहीं ला रहा है। ऐसे में दिल्लीवासियों को अभी कुछ और दिन कठोर गर्मी झेलनी होगी।
मौसम विभाग की टीम लगातार निगरानी कर रही है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में परिस्थितियां बदलेंगी, और मॉनसून सही समय पर दिल्ली पहुंचेगा। तब तक दिल्ली के लोग धैर्य से इंतजार कर रहे हैं, यह जानते हुए कि गर्मी की यह तपिश जल्द ही खत्म हो जाएगी। मॉनसून का आना पक्का है, सिर्फ समय का सवाल है। जब तक मॉनसून नहीं आता, तब तक बिखरी-बिखरी बारिश और आंधी के बीच लोग अपने दिन काट रहे हैं।




