महरंग बलोच को उम्रकैद पर ग्रेटा थनबर्ग भड़कीं
स्वीडिश पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता महरंग बलोच को उम्रकैद की सजा दिए जाने के बाद पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की है। ग्रेटा ने एक वीडियो संदेश जारी करके कहा कि सच को कैद नहीं किया जा सकता और शांतिपूर्ण विरोध को अपराध बनाया जाना बिल्कुल गलत है। उनके अनुसार दुनिया की नजरें अब इस मुद्दे पर लगी हैं और इस तरह के अन्याय के खिलाफ चुप रहना संभव नहीं है।
यह बयान तब सामने आया जब पाकिस्तानी अदालत ने महरंग बलोच को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। महरंग बलोच बलूचिस्तान के एक प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं जो लंबे समय से अपनी आवाज उठाते रहे हैं। उन पर आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया है, जिसको लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विरोध हो रहा है।
ग्रेटा थनबर्ग का तीखा बयान
ग्रेटा थनबर्ग ने अपने वीडियो संदेश में कहा है कि महरंग बलोच जैसे साहसी कार्यकर्ताओं को दबाने की कोशिश न केवल गलत है बल्कि मानवाधिकार का भी घोर उल्लंघन है। उनके अनुसार शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात कहना और सवाल उठाना हर किसी का अधिकार है। जब सरकारें इस अधिकार को छीन लेती हैं तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों का विरोध करता है।
ग्रेटा ने कहा कि पाकिस्तान को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सच्चाई को कभी भी किसी कैद या सजा के जरिए दबाया नहीं जा सकता। लोगों के अधिकारों के लिए आवाज उठाना कोई अपराध नहीं है बल्कि यह एक नैतिक कर्तव्य है।
यह पहली बार नहीं है जब ग्रेटा थनबर्ग ने किसी अन्यायपूर्ण कानून या सजा के विरुद्ध आवाज उठाई है। इस युवा पर्यावरण कार्यकर्ता को दुनियाभर में उनके साहस और न्याय के लिए संघर्ष करने के लिए जाना जाता है। उन्होंने पर्यावरण से लेकर मानवाधिकार तक कई मुद्दों पर अपनी चिंता व्यक्त की है।
अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भी प्रतिक्रिया
ग्रेटा के बयान के अलावा अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन भी महरंग बलोच की सजा के खिलाफ मुखर हो गए हैं। इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन ने इस सजा को अन्यायपूर्ण बताया है और कहा है कि इसका कोई ठोस सबूत नहीं है।
इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन के प्रवक्ता ने कहा कि महरंग बलोच के खिलाफ लगाए गए आरोप काफी हद तक संदिग्ध हैं और उन्हें न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता का सामना नहीं करना पड़ा है। उन्होंने पाकिस्तान से महरंग की रिहाई की मांग की है और कहा है कि यह सजा न केवल उन्हें बल्कि पूरे बलूचिस्तान समुदाय को झूठी साजिश का शिकार बना रही है।
विभिन्न अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण और संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न अंग भी इस मामले में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बहस होगी।
महरंग बलोच और उनका संघर्ष
महरंग बलोच एक दशक से अधिक समय से बलूचिस्तान के लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कई बार गायब होने, यातना और अन्य मानवाधिकार उल्लंघनों की शिकायत दर्ज की है। उनकी गतिविधियों ने उन्हें पाकिस्तानी सत्ता के निशाने पर ला दिया है।
महरंग की बहन ब्लांचे बलोच भी उनके अधिकारों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय रही हैं। परिवार ने बार-बार कहा है कि महरंग को किसी भी गलत काम में नहीं पकड़ा गया है और यह केवल उनके विरोध को दबाने की साजिश है।
महरंग को साल २०२३ में गिरफ्तार किया गया था और तब से उन्हें विभिन्न आरोपों का सामना करना पड़ा है। अब उन्हें आजीवन कारावास की सजा दे दी गई है जो मानवाधिकार संगठनों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
इस पूरे मामले से साफ होता है कि बलूचिस्तान में मानवाधिकार की स्थिति कितनी गंभीर है। जब लोग शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बातें कहते हैं तो उन्हें दबाया जाता है। यह स्थिति केवल पाकिस्तान के लिए नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए चिंता का विषय है।
ग्रेटा थनबर्ग जैसी अंतरराष्ट्रीय हस्तियों का इस मामले में आवाज उठाना महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे विश्व समुदाय का ध्यान इस ओर जाता है। अब देखना होगा कि पाकिस्तान इन अंतरराष्ट्रीय दबावों के सामने क्या रुख अपनाता है और महरंग बलोच की स्थिति में कोई सुधार होता है या नहीं।




