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Saturday, 03 October 2026
शिक्षा

इंदौर: खुले गड्ढे और अधूरी सड़कें बनीं जानलेवा

author
Komal
संवाददाता
📅 25 June 2026, 7:00 AM ⏱ 1 मिनट 👁 301 views
इंदौर: खुले गड्ढे और अधूरी सड़कें बनीं जानलेवा
📷 aarpaarkhabar.com

इंदौर की सड़कों पर बढ़ती जानलेवा घटनाएं

इंदौर शहर में मेट्रो, फ्लायओवर और विभिन्न ब्रिजों के निर्माण कार्यों में बरती जा रही भयानक लापरवाही के कारण शहर के नागरिक रोज खतरे का सामना कर रहे हैं। निर्माण स्थलों पर खुले हुए चैंबर, गहरे गड्ढे और अधूरी पड़ी सड़कें अब जानलेवा साबित हो रही हैं। हर दिन कहीं न कहीं किसी ड्राइवर या पैदल यात्री के साथ दुर्घटना हो रही है, जिससे कई लोग गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं।

शहर के प्रमुख इलाकों में निर्माण कार्य चल रहे हैं, लेकिन सुरक्षा के बुनियादी नियमों का पालन नहीं किया जा रहा। न तो उचित बाड़ेबंदी है, न ही रात को पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था है। इससे चलते-फिरते लोगों को गड्ढों में गिरने का खतरा रहता है। पहिये वाली गाड़ियां भी इन खुले गड्ढों में फंस जाती हैं, जिससे बड़ी दुर्घटनाएं होती हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह समस्या महीनों से बनी हुई है और प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे।

मानसून में ट्रैफिक जाम और बाढ़ का खतरा

मानसून की शुरुआत होते ही इंदौर की स्थिति और भी खराब हो गई है। सर्विस सड़कें, जो पहले से ही संकरी और खस्ताहाल हैं, अब पूरी तरह से जलभराव के शिकार हो गई हैं। निर्माण कार्यों के कारण सड़कों का जल निकास प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रहा, जिससे बारिश के पानी को सड़कों पर ही रुकना पड़ता है। इसके परिणामस्वरूप लंबे समय तक ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रहती है।

घंटों तक ट्रैफिक जाम में फंसी गाड़ियां न केवल समय की बर्बादी करती हैं, बल्कि वाहनों से निकलने वाली प्रदूषण भी बढ़ती है। स्कूल जाने वाले बच्चों से लेकर ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों को रोज इसी समस्या का सामना करना पड़ता है। कई बार तो आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस भी सड़कों पर फंस जाती है, जिससे रोगियों की जानें भी जा सकती हैं।

निर्माण कार्यों को अंजाम देने वाली एजेंसियां अपनी जिम्मेदारी से भाग रही हैं। उन्हें न तो यह चिंता है कि आम जनता को क्या परेशानी हो रही है और न ही वे सड़क की सुरक्षा को लेकर गंभीर हैं। परिणाम यह है कि शहर की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।

प्रशासन की असफलता और जनता की पीड़ा

इंदौर के प्रशासन को इन समस्याओं के समाधान के लिए तुरंत कदम उठाने चाहिए। नगर निगम, पुलिस और निर्माण विभाग को मिलकर एक व्यापक योजना बनानी चाहिए जिससे निर्माण कार्यों के दौरान सड़क सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। सभी निर्माण स्थलों पर उचित बाड़ेबंदी, चेतावनी संकेत और रात को पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था की जानी चाहिए।

जल निकास की सुविधा को भी तुरंत ठीक किया जाना चाहिए ताकि मानसून के दिनों में जलभराव की समस्या न हो। निर्माण कार्यों के समय वैकल्पिक मार्ग भी सुनिश्चित किए जाने चाहिए ताकि ट्रैफिक को राहत मिल सके। प्रशासन को निर्माण एजेंसियों के ऊपर सख्त निगरानी रखनी चाहिए और नियमों का पालन न करने पर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।

शहरवासियों की सुरक्षा ही सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। विकास के नाम पर आम जनता की जानें जोखिम में नहीं डाली जा सकतीं। इंदौर एक समृद्ध शहर है और इसके निवासी भी संपन्न हैं, लेकिन सुरक्षा की बुनियादी सुविधाओं से वंचित रह गए हैं। यह स्थिति चिंताजनक है और इसमें तुरंत सुधार की आवश्यकता है।

मेट्रो और फ्लायओवर आवश्यक हैं शहर के विकास के लिए, लेकिन इन्हें इस तरीके से नहीं बनाया जा सकता कि जनता की जानें खतरे में पड़ें। निर्माण कार्यों को दक्षतापूर्वक और जिम्मेदारी से पूरा किया जाना चाहिए। प्रशासन को चाहिए कि वह निर्माण एजेंसियों से समय से काम पूरा करने का आश्वासन लें और आम जनता को सुरक्षित रास्ते दें।

इंदौरवासियों की धैर्य की भी एक सीमा है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहेगी तो सड़कों पर आंदोलन भी हो सकता है। इससे पहले ही प्रशासन को समझदारी का काम लेना चाहिए और जनता की समस्याओं का समाधान करना चाहिए। सुरक्षित और सुव्यवस्थित शहर ही एक विकसित शहर होता है, और इंदौर को भी इसी दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।