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Thursday, 05 November 2026
विश्व

ईरान धमकी के बाद UN ने रोका जहाज निकासी अभियान

author
Komal
संवाददाता
📅 26 June 2026, 6:01 AM ⏱ 1 मिनट 👁 765 views
ईरान धमकी के बाद UN ने रोका जहाज निकासी अभियान
📷 aarpaarkhabar.com

ईरान की तरफ से आई धमकियों के बाद अब अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन यानी आईएमओ ने एक बड़ा फैसला लिया है। ओमान के पास हुए जहाज पर प्रोजेक्टाइल हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र के अधीन काम करने वाले इस संगठन ने फंसे हुए जहाजों को बाहर निकालने के अभियान को स्थगित कर दिया है। यह निर्णय खाड़ी क्षेत्र में बढ़ रहे तनाव को दर्शाता है। आईएमओ के सेक्रेटरी जनरल आर्सेनियो डोमिंगुएज ने स्पष्ट कहा है कि जब तक उन्हें पूर्ण सुरक्षा का आश्वासन नहीं मिलता, तब तक यह महत्वपूर्ण निकासी अभियान रुका रहेगा।

खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा एक बहुत ही गंभीर मुद्दा बन गया है। पिछले कुछ महीनों में इस क्षेत्र में कई जहाजों पर हमले की घटनाएं हुई हैं। ये हमले व्यापारिक जहाजों के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर गए हैं। अंतरराष्ट्रीय व्यापार इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है। जब यहां सुरक्षा का संकट बढ़ता है, तो पूरी दुनिया के व्यापार को असर पड़ता है। तेल की कीमतें बढ़ती हैं और सामान की डिलीवरी में देरी होती है।

हाल ही में ओमान के तट के पास एक जहाज को प्रोजेक्टाइल से निशाना बनाया गया था। इस हमले से जहाज को काफी नुकसान हुआ। लेकिन यह जहाज आईएमओ के चल रहे निकासी अभियान का हिस्सा नहीं था। यानी यह हमला सीधे तौर पर उस अभियान को लक्षित नहीं था। फिर भी इस घटना ने पूरे क्षेत्र में चिंता फैला दी है। आईएमओ को लगा कि अगर निकासी अभियान जारी रहा, तो उसमें शामिल जहाजों पर भी हमला हो सकता है।

ईरान की धमकियां और अंतरराष्ट्रीय चिंता

इस हमले के बाद ईरान की ओर से कई धमकी भरे बयान आए हैं। ईरान ने कहा है कि वह आगे भी ऐसे कदम उठा सकता है। इन धमकियों से खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। यूरोपीय देशों, अमेरिका और अन्य समुद्री शक्तियों ने ईरान की कार्रवाई की निंदा की है। वे कह रहे हैं कि समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखना सभी के लिए जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत, समुद्र में सभी देशों के जहाजों को आजादी से आने-जाने का अधिकार है।

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का यह हमला एक नई घटना नहीं है। पिछले कई सालों से दोनों देशों के बीच नियंत्रण और ताकत दिखाने की कोशिशें चल रही हैं। खाड़ी में कई अन्य क्षेत्रीय शक्तियां भी हैं, जो इस संघर्ष में अपना प्रभाव डालना चाहती हैं। सऊदी अरब, यूएई और अन्य देशों के अपने-अपने हित हैं। इन सभी कारकों के कारण इस क्षेत्र की स्थिति बहुत जटिल बन गई है।

आईएमओ का निर्णय और उसके परिणाम

आईएमओ के सेक्रेटरी जनरल का यह कदम बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने साफ कहा है कि मानवीय कारणों से शुरू किया गया यह अभियान अभी के लिए स्थगित रहेगा। निकासी अभियान का उद्देश्य पर्यावरण को नुकसान से बचाना था। लेकिन अभी खुद जहाजों की सुरक्षा का सवाल बड़ा है। इसलिए उन्होंने समझदारी दिखाते हुए अभियान को रोक दिया।

इस निर्णय के कई परिणाम होंगे। एक तो समुद्र में प्रदूषण का खतरा बना रहेगा। दूसरा, यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नुकसान पहुंचाता है। जब एक क्षेत्र में असुरक्षा होती है, तो वहां कोई भी संगठन अपनी मानवीय कार्रवाई नहीं कर पाता। यह ईरान की धमकियों की वजह से हुआ है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदार ईरान पर दबाव डाल रहा है कि वह ऐसी कार्रवाइयां बंद करे।

भविष्य और समाधान की राह

आने वाले दिनों में इस स्थिति में सुधार आना मुश्किल दिख रहा है। अगर ईरान अपनी धमकियों पर अमल करता रहेगा, तो खाड़ी में जहाजों के लिए खतरनाक हालात बने रहेंगे। व्यापार, तेल आपूर्ति और अन्य महत्वपूर्ण सेवाएं प्रभावित होंगी। दुनिया की अर्थव्यवस्था इससे जुड़ी हुई है।

इसलिए जरूरी है कि अंतरराष्ट्रीय समुदार एक मजबूत संदेश दे। किसी भी देश को समुद्री व्यापार में बाधा डालने का अधिकार नहीं है। अगर ईरान को अपनी कोई शिकायत है, तो उसे अंतरराष्ट्रीय कानून के माध्यम से सुलझानी चाहिए। खाड़ी क्षेत्र की स्थिति बिगड़ती है, तो पूरी दुनिया को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। इसलिए सभी पक्षों से संवाद और शांति की अपेक्षा की जा रही है।