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Thursday, 16 July 2026
मौसम

इंदौर में बाढ़ में फंसी बारात, दूल्हा घुटने तक पानी में

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Komal
संवाददाता
📅 26 June 2026, 7:00 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.0K views
इंदौर में बाढ़ में फंसी बारात, दूल्हा घुटने तक पानी में
📷 aarpaarkhabar.com

मध्य प्रदेश के मिनी मुंबई कहे जाने वाले इंदौर शहर में एक ऐसी घटना हुई है जो न सिर्फ शहरवासियों को सदमे में डाल गई है बल्कि प्रशासन की कमजोरियों को भी उजागर कर दिया है। देश के सबसे स्वच्छ शहर के तौर पर मशहूर इंदौर में मानसून की पहली बारिश के बाद एक बारात घुटने तक गंदे पानी में फंस गई। यह दृश्य इतना भयावह था कि दूल्हा और बाराती सभी को अपने सपने के विवाह समारोह में यह नाटकीय और शर्मनाक स्थिति का सामना करना पड़ा।

यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है और लाखों लोगों तक पहुंच चुका है। इस वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे बारात के सदस्य घुटने तक गंदे पानी में से होकर निकल रहे हैं। दूल्हा अपने सजे हुए कपड़ों में इस बदतर हालात का शिकार हो गया। यह नजारा एक ऐसे शहर में देखने को मिला जिसे देश भर में स्वच्छता के लिए जाना जाता है और जहां की नगर निगम बार-बार अपनी उपलब्धियों पर गर्व करती है।

नगर निगम के दावे और जमीनी सच्चाई

इंदौर नगर निगम ने हमेशा से यह दावा किया है कि शहर की सफाई और बेहतर बुनियादी ढांचे की वजह से यह देश का सबसे स्वच्छ शहर बन गया है। हर साल स्वच्छ भारत मिशन के तहत इंदौर को शीर्ष रैंकिंग दी जाती है। लेकिन इस बारात वाली घटना ने साफ तौर पर दिखा दिया है कि जमीनी हकीकत कितनी अलग है। नगर निगम के ये सभी दावे तब खोखले साबित होते हैं जब बारिश के मौसम में शहर के गलियों और रास्तों में ऐसी स्थिति बन जाती है।

शहर के जल निकासी तंत्र की कमजोरी इस घटना से स्पष्ट हो जाती है। मानसून की पहली बारिश में ही अगर बारिश का पानी सड़कों पर घुटने तक भर जाता है तो इसका मतलब है कि ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह से असफल है। नगर निगम को यह सवाल झेलना पड़ेगा कि आखिर उसने शहर के जल निकासी तंत्र को बेहतर बनाने के लिए क्या कदम उठाए हैं। क्या सड़कों की मरम्मत के दौरान पाइपलाइनों को ठीक से लगाया गया था? क्या समय-समय पर ड्रेनेज सिस्टम की सफाई की जाती है?

प्रशासनिक तैयारियों पर बड़े सवाल

मानसून के मौसम से पहले सरकार और नगर निगम को चाहिए था कि वह शहर की जल निकासी व्यवस्था को पूरी तरह से जांच ले। अगर छोटी-मोटी बारिश में ही सड़कें जलभराव का शिकार हो जाती हैं तो इसका मतलब है कि प्रशासनिक तैयारियां बिल्कुल अधूरी हैं। इंदौर के लोग यह उम्मीद करते थे कि उनका शहर जो स्वच्छता में पहला है वह बुनियादी ढांचे में भी अन्य शहरों से बेहतर होगा। लेकिन यह बारात वाली घटना उन सभी उम्मीदों को जमीन पर पटक देती है।

सवाल यह भी उठता है कि क्या नगर निगम के पास कोई आपातकालीन योजना थी? क्या बारिश के मौसम में सड़कों पर पानी भरने की स्थिति में उन्हें निपटने के लिए कोई व्यवस्था थी? इस बारात की घटना से लगता है कि नगर निगम के पास ऐसी कोई तैयारी नहीं थी। अगर होती तो पहली बारिश में ही शहर की स्थिति इतनी खराब नहीं होती।

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया और जनता का गुस्सा

जब से यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है तब से लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। लोगों ने नगर निगम के दावों को मजाक बना दिया है। कई लोग ने तंज कसते हुए कहा है कि इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर हो सकता है लेकिन बारिश के मौसम में यह देश का सबसे गंदा और जलभराव का शिकार शहर बन जाता है। ट्विटर और फेसबुक पर हजारों पोस्ट इस घटना को लेकर साझा किए जा रहे हैं।

शहरवासियों का मानना है कि नगर निगम को अपने दावों से ज्यादा ध्यान शहर की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर देना चाहिए। पानी की निकासी, सड़कों की मरम्मत और बेहतर प्रशासनिक तैयारी ये सभी चीजें स्वच्छता से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये लोगों के दैनिक जीवन को प्रभावित करती हैं।

इंदौर की इस बारात घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सरकारी दावे और जमीनी सच्चाई के बीच कितना अंतर होता है। नगर निगम को अब गंभीरता से सोचना होगा और अपनी जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाना होगा वरना हर बारिश के मौसम में शहर की ऐसी ही दुर्दशा होगी।