मोदी सेशेल्स दौरे पर मिले 194 साल के कछुए जोनाथन से
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों सेशेल्स के दौरे पर हैं जहां उन्हें एक शानदार स्वागत मिला है। शनिवार को विक्टोरिया के माहे हवाई अड्डे पर उनका भव्य स्वागत किया गया। सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी ने खुद उनको माहे हवाई अड्डे पर लेने गए। प्रधानमंत्री मोदी तीन दिनों के लिए इस द्वीपीय राष्ट्र का दौरा कर रहे हैं। उनके इस दौरे से भारत और सेशेल्स के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
हवाई अड्डे पर उनका स्वागत करने के बाद राष्ट्रपति हर्मिनी ने प्रधानमंत्री को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इस दौरान सेशेल्स की सैन्य टुकड़ी ने प्रधानमंत्री को सलामी दी। यह दृश्य काफी गौरवान्वित था और भारत-सेशेल्स के मजबूत संबंधों का प्रतीक था। राष्ट्रपति हर्मिनी ने प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत में कई शब्द कहे। उन्होंने दोनों देशों के बीच सहयोग को और गहरा करने की बात की।
स्वदेशी पोत का दिया गया उपहार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेशेल्स को एक विशेष उपहार दिया है। यह उपहार भारत का स्वदेशी पोत है जिसका नाम एलएस्पीवार रखा गया है। यह पोत भारत की कोस्ट गार्ड द्वारा निर्मित किया गया है। यह पोत सेशेल्स के समुद्री संरक्षण के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा। इस पोत की क्षमता काफी उन्नत है और यह समुद्र में सुरक्षा और निगरानी के कार्य में बेहद सक्षम है।
भारत ने हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ाने का एक रणनीतिक कदम उठाते हुए यह पोत सेशेल्स को दिया है। इससे सेशेल्स समुद्री क्षेत्र में बेहतर निगरानी कर सकेगा। यह पोत सेशेल्स के आर्थिक क्षेत्र की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह भी अपेक्षा की जाती है कि इस पोत से सेशेल्स की मत्स्य पालन संबंधी गतिविधियों में भी वृद्धि होगी। इस स्वदेशी पोत के माध्यम से भारत ने अपनी तकनीकी क्षमता को भी प्रदर्शित किया है।
194 साल के कछुए जोनाथन से मिलाप
प्रधानमंत्री मोदी को सेशेल्स में एक अनोखा अनुभव भी मिला। उन्होंने 194 साल के कछुए जोनाथन से मिलाप किया। यह कछुआ सेशेल्स का एक प्रसिद्ध निवासी है। जोनाथन को दुनिया का सबसे बुजुर्ग कछुआ माना जाता है। यह कछुआ सेशेल्स के प्लांटेशन हाउस में रहता है। जोनाथन की उम्र के बारे में अनेक रोचक कथाएं प्रचलित हैं।
जोनाथन का जन्म 1832 में हुआ था। यह कछुआ सदियों से सेशेल्स की परिस्थितियों को देख रहा है। प्रधानमंत्री ने इस ऐतिहासिक प्राणी को देखते हुए कई तस्वीरें भी खिंचवाईं। जोनाथन को खिलाने के लिए प्रधानमंत्री ने सब्जियां भी दीं। यह पल काफी मूल्यवान था क्योंकि इस कछुए को देखना एक अद्भुत अनुभव है। जोनाथन ने एक लंबे समय तक सेशेल्स की संस्कृति और इतिहास का साक्षी बना रहा है।
राष्ट्रपति हर्मिनी का स्वागत संबोधन
सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी ने प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत में एक भावुक भाषण दिया। उन्होंने भारत-सेशेल्स के ऐतिहासिक संबंधों की प्रशंसा की। राष्ट्रपति हर्मिनी ने कहा कि भारत सेशेल्स का एक विश्वसनीय पार्टनर है। उन्होंने भारत के साथ सहयोग को और गहरा करने की इच्छा व्यक्त की।
राष्ट्रपति हर्मिनी ने कहा कि यह पोत सेशेल्स की आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण योगदान होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शी नीतियों की सराहना की। राष्ट्रपति ने दोनों देशों के बीच व्यापार और पर्यटन को बढ़ाने की आशा व्यक्त की। उनके भाषण से साफ था कि सेशेल्स भारत के साथ और करीब आना चाहता है। यह दौरा भारत और सेशेल्स के संबंधों में एक नया अध्याय लिखेगा।
प्रधानमंत्री मोदी का सेशेल्स दौरा भारत की हिंद महासागर क्षेत्र की नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस दौरे से भारत की सॉफ्ट पावर और तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन होगा। सेशेल्स को स्वदेशी पोत का उपहार भारत की उदारता और सहयोग की भावना को दर्शाता है। यह दौरा साफ करता है कि भारत अपने पड़ोसी और छोटे देशों के साथ कितना महत्वपूर्ण संबंध रखता है। आने वाले समय में इस दौरे के दूरगामी परिणाम सामने आएंगे।




