सेशेल्स संसद में मोदी का भाषण, ब्लू इकॉनमी पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्तमान में सेशेल्स की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान उन्होंने सेशेल्स की संसद में एक ऐतिहासिक भाषण दिया है। इस संबोधन में उन्होंने विश्व जलवायु परिवर्तन की गंभीरता पर चिंता व्यक्त करते हुए छोटे द्वीप राष्ट्रों की समस्याओं पर विशेष ध्यान आकर्षित किया। पीएम मोदी के इस दौरे को भारत और सेशेल्स के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जलवायु परिवर्तन पर प्रधानमंत्री की चिंता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेशेल्स की संसद में अपने भाषण के दौरान जलवायु परिवर्तन के विनाशकारी प्रभावों पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि वैश्विक दक्षिण के देशों और विशेषकर छोटे द्वीप राष्ट्र जलवायु परिवर्तन से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। सेशेल्स जैसे द्वीप राष्ट्रों के लिए यह समस्या और भी गंभीर है क्योंकि समुद्र के स्तर में वृद्धि सीधे तौर पर इन देशों के अस्तित्व को खतरे में डाल रही है।
पीएम मोदी ने भारत की जलवायु परिवर्तन से निपटने की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि भारत अपने नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों की ओर तेजी से बढ़ रहा है और २०७० तक कार्बन न्यूट्रल बनने का लक्ष्य रखता है। इसके अलावा, भारत पहले से ही सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है। मोदी ने कहा कि छोटे द्वीप राष्ट्रों को भी इसी तरह की स्वच्छ ऊर्जा नीतियों को अपनाने के लिए भारत का समर्थन और सहायता मिलेगा।
सेशेल्स की संसद के सामने अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि जलवायु परिवर्तन केवल एक पर्यावरणीय समस्या नहीं है, बल्कि यह विकास और सुरक्षा के मुद्दों से जुड़ा है। छोटे द्वीप राष्ट्रों की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से मत्स्य पालन और पर्यटन पर निर्भर होती है, जो जलवायु परिवर्तन से प्रभावित हो रहे हैं। इसलिए, इन देशों के साथ सहयोग करना और उन्हें आवश्यक सहायता प्रदान करना भारत की प्राथमिकता है।
ब्लू इकॉनमी पर सहयोग की पहल
प्रधानमंत्री मोदी ने सेशेल्स के साथ ब्लू इकॉनमी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए कई प्रस्ताव रखे हैं। ब्लू इकॉनमी वह आर्थिक मॉडल है जो समुद्र और समुद्री संसाधनों के टिकाऊ उपयोग पर आधारित है। सेशेल्स जैसे द्वीप राष्ट्रों के लिए ब्लू इकॉनमी विकास का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।
पीएम मोदी ने मत्स्य पालन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। भारत के पास मछली पालन और संरक्षण में बहुत अनुभव है, और यह अपना ज्ञान और तकनीक सेशेल्स के साथ साझा करने के लिए तैयार है। इससे सेशेल्स की मत्स्य पालन उद्योग को और अधिक उत्पादक और टिकाऊ बनाया जा सकता है।
समुद्री विज्ञान के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग का विस्तार होगा। भारतीय संस्थान सेशेल्स के साथ मिलकर समुद्री पारिस्थितिकी, समुद्र तल के संसाधनों और समुद्री जीवन के बारे में अनुसंधान कर सकते हैं। यह न केवल वैज्ञानिक ज्ञान में वृद्धि करेगा, बल्कि दोनों देशों के समुद्री संसाधनों की बेहतर समझ में भी मदद करेगा।
तटीय प्रबंधन एक और क्षेत्र है जहां भारत और सेशेल्स के बीच सहयोग बढ़ाया जाएगा। भारत के तटीय क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए विभिन्न प्रकल्प चल रहे हैं। इसी अनुभव को सेशेल्स के साथ साझा किया जा सकता है, जहां समुद्र के स्तर में वृद्धि एक प्रमुख समस्या है।
नवीकरणीय ऊर्जा और सतत पर्यटन का महत्व
प्रधानमंत्री मोदी ने नवीकरणीय ऊर्जा के विकास में भारत की सफलताओं को साझा करते हुए सेशेल्स को प्रेरित किया। भारत दुनिया के सबसे बड़े नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादकों में से एक है। सौर, पवन और जलविद्युत ऊर्जा में भारत के विशाल निवेश को देखते हुए, सेशेल्स भी अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को नवीकरणीय स्रोतों से पूरा करने के लिए भारत के साथ काम कर सकता है।
सतत पर्यटन विकास भी एक महत्वपूर्ण विषय है जिस पर मोदी ने जोर दिया। सेशेल्स की अर्थव्यवस्था में पर्यटन का बहुत महत्व है, लेकिन इसे पर्यावरण के अनुकूल तरीके से विकसित करना आवश्यक है। भारत भी अपने पर्यटन उद्योग को टिकाऊ तरीके से विकसित करने की कोशिश कर रहा है। दोनों देश इस क्षेत्र में सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा कर सकते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी के सेशेल्स दौरे और संसद में उनके भाषण से स्पष्ट है कि भारत छोटे द्वीप राष्ट्रों के विकास और जलवायु परिवर्तन से निपटने में गहरी प्रतिबद्धता रखता है। इस दौरे के माध्यम से भारत न केवल अपनी भू-राजनीतिक उपस्थिति को मजबूत कर रहा है, बल्कि वैश्विक दक्षिण के साथ अपनी एकता और सहयोग को भी प्रदर्शित कर रहा है। सेशेल्स जैसे देशों के साथ साझेदारी से भारत के विदेश नीति लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।




