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Saturday, 04 July 2026
मौसम

उत्तर भारत में मानसून कब आएगा? पहाड़ों पर बारिश

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Komal
संवाददाता
📅 29 June 2026, 6:31 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.0K views
उत्तर भारत में मानसून कब आएगा? पहाड़ों पर बारिश
📷 aarpaarkhabar.com

उत्तर भारत में इस समय मौसम का हाल बेहद चिंताजनक है। एक तरफ पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश से आफत की स्थिति बन गई है, तो दूसरी तरफ मैदानी इलाकों में भीषण गर्मी और लू से लोग बेहाल हैं। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब जैसे राज्यों में तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर भारत में मानसून के आने में अभी कुछ समय लगेगा, लेकिन अगले सप्ताह तक स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है।

वर्तमान समय में उत्तर भारत की जलवायु परिस्थितियां दोहरे संकट का सामना कर रही हैं। हिमालय के पहाड़ी इलाकों में, विशेषकर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और कश्मीर में, मौसमी बारिश ने भारी तबाही मचाई है। सड़कें टूट गई हैं, पेड़ें गिर गए हैं और कई स्थानों पर भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। बारिश की तीव्रता इतनी अधिक है कि स्कूल, कॉलेज और सरकारी कार्यालय बंद किए जा चुके हैं। आम जनता को यात्रा में भी कड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

पहाड़ों में आफत की बारिश का संकट

हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में पिछले 48 घंटों में असामान्य वर्षा दर्ज की गई है। कुल्लू, मनाली, शिमला और धर्मशाला के आसपास के इलाकों में बारिश का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा। आईएमडी के मुताबिक, ये बारिशें दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रारंभिक घुसपैठ के कारण हो रही हैं। हालांकि, ये वर्षा सीमित क्षेत्रों तक सीमित है और अभी भी आंशिक रूप से सक्रिय है।

कश्मीर घाटी में भी स्थिति गंभीर है। श्रीनगर और आसपास के जिलों में लगातार बारिश से घरों में पानी भर गया है। कई निचली इमारतें जलजमाव का शिकार हो गई हैं। प्रशासन ने लोगों को चेतावनी दी है कि वे अपने घरों के अंदर रहें और जरूरी काम के अलावा बाहर न निकलें। बहुत सारी यात्राएं रद्द की जा चुकी हैं और सड़कों पर भारी यातायात व्यवस्था की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

मैदानी इलाकों में भीषण गर्मी और लू की मार

जहां पहाड़ों में बारिश की समस्या है, वहीं मैदानी इलाकों की कहानी बिल्कुल अलग है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से भी अधिक हो गया है। दिल्ली में तो पारा 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो अत्यंत असामान्य है।

इस भीषण गर्मी के कारण बिजली की खपत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। लोड शेडिंग का सिलसिला शुरू हो गया है और आम जनता को बिजली की कटौती का सामना करना पड़ रहा है। अस्पतालों में हीट स्ट्रोक और निर्जलीकरण से पीड़ित मरीजों की संख्या में भी वृद्धि दर्ज की गई है। बुजुर्ग लोगों और छोटे बच्चों के लिए यह मौसम विशेष रूप से खतरनाक साबित हो रहा है।

राजस्थान के कुछ जिलों में तो तापमान 50 डिग्री सेल्सियस को भी पार कर गया है। चूहड़, बीकानेर और जैसलमेर जैसे शहरों में आम जनता की दिन-प्रतिदिन की गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। स्कूलों में छुट्टी बढ़ाई जा चुकी है और सार्वजनिक कार्यालयों में कार्य समय में भी बदलाव किए गए हैं। बाहर निकलना मानो किसी जोखिम को अंगीकार करने जैसा हो गया है।

कब तक बनी रहेगी यह स्थिति और राहत की संभावना

भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून जून के अंतिम सप्ताह तक उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में पहुंच जाएगा। इससे गर्मी में कमी आएगी और वर्षा के अवसर बढ़ेंगे। हालांकि, यह संक्रमण काल थोड़ा अस्थिर हो सकता है और स्थानीय इलाकों में अलग-अलग मौसमी परिस्थितियां देखने को मिल सकती हैं।

जुलाई का महीना पूरे उत्तर भारत के लिए वास्तविक मानसून सीजन माना जाता है। आमतौर पर, जुलाई तक पूरा उत्तर भारत मानसून की चपेट में आ जाता है और बारिश का सिलसिला शुरू हो जाता है। इस बार भी ऐसी ही उम्मीद की जा रही है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल मानसून समय पर आ सकता है और सामान्य से अधिक वर्षा हो सकती है।

आईएमडी ने दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में हीट अलर्ट जारी किया है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे दोपहर में बाहर न निकलें, प्रचुर मात्रा में पानी पिएं और हल्के रंग के कपड़े पहनें। बुजुर्गों और बच्चों की विशेष देखभाल की जाए। वहीं, पहाड़ी इलाकों में यलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किए गए हैं ताकि लोग भारी बारिश से अपनी सुरक्षा कर सकें।

कुल मिलाकर, उत्तर भारत में मौजूदा मौसमी परिस्थितियां अत्यंत चुनौतीपूर्ण हैं। पहाड़ों में भारी बारिश से जान-माल का नुकसान हो रहा है, जबकि मैदान में भीषण गर्मी से लोग परेशान हैं। आने वाले दिनों में मानसून के आने से स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है, लेकिन तब तक सावधानी और सतर्कता ही लोगों की बेहतरी का एकमात्र साधन है।