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Saturday, 04 July 2026
धर्म

ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026: पूजा मुहूर्त और दान विधि

author
Komal
संवाददाता
📅 29 June 2026, 6:31 AM ⏱ 1 मिनट 👁 987 views

ज्येष्ठ पूर्णिमा का त्योहार हिंदू धर्म में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस बार 29 जून 2026 को यह पूर्णिमा अत्यंत दुर्लभ संयोग में आ रही है। इसी दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का अद्भुत संयोग बन रहा है। इस विशेष दिन पर की जाने वाली पूजा-अर्चना और दान से मनुष्य को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं कि इस शुभ दिन पर पूजा का सही तरीका क्या है, मुहूर्त कब है और दान का महत्व क्या है।

ज्येष्ठ पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

ज्येष्ठ पूर्णिमा को आषाढ़ी पूर्णिमा भी कहा जाता है। यह पूर्णिमा ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह महीना बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसी दिन भगवान बुद्ध को बोधि वृक्ष के नीचे बुद्धत्व की प्राप्ति हुई थी। साथ ही, इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म भी हुआ था। इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं।

ज्येष्ठ पूर्णिमा पर की जाने वाली पूजा से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस दिन जल को अमृत के समान माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इसी दिन देवताओं ने समुद्र मंथन किया था और अमृत प्राप्त किया था। इसलिए इस दिन जल से जुड़े कार्यों को विशेष महत्व दिया जाता है।

शुभ मुहूर्त और पूजा की विधि

29 जून 2026 को ज्येष्ठ पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग दोनों एक साथ बन रहे हैं। यह संयोग बेहद दुर्लभ है और कई वर्षों के बाद बनता है। इस दिन पूजा के लिए सुबह का समय सबसे अच्छा माना जाता है।

प्रातः काल में स्नान करके घर को गंगाजल से शुद्ध करें। इसके बाद पूजा घर को सजाएं और भगवान की मूर्ति को पुष्प और फलों से सजाएं। तुलसी के पौधे को जल से सींचते हुए पूजा करें। इसके बाद घर के सभी सदस्यों के साथ प्रार्थना करें। भगवान को दूध, दही, घी और खीर का भोग लगाएं।

पूजा के समय आरती अवश्य करें। घंटी और शंख की आवाज़ से घर में सकारात्मक कंपन उत्पन्न होते हैं। भगवान के समक्ष बैठकर आत्मचिंतन करें और अपनी मनोकामनाएं प्रकट करें। पूजा के बाद सभी को प्रसाद वितरित करें।

दान का महत्व और धार्मिक नियम

ज्येष्ठ पूर्णिमा पर दान को विशेष महत्व दिया जाता है। इस दिन किया गया दान सौ गुना फल देता है। गरीबों, असहायों और ज़रूरतमंदों को दान देना चाहिए। अन्न का दान सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए इस दिन गेहूं, चावल, दाल और आटा दान करें।

इसके अलावा, जल दान भी इस दिन विशेष फल देता है। तालाब, कुंड और सार्वजनिक स्थानों पर जल की व्यवस्था करवाएं। कपड़ों का दान भी सराहनीय है। गर्मी के दिनों में असहायों को कपड़े देने से वे सुरक्षित रहते हैं। वृद्धों के लिए दवाइयां खरीदकर देना भी अच्छा कार्य है।

इस दिन किसी गौशाला को दान करना बहुत पुण्य का कार्य है। गायों के लिए चारा और पानी की व्यवस्था करें। किसी दरिद्र को भोजन कराना भी परमेश्वर को प्रसन्न करता है। दान देते समय मन में सच्ची भावना होनी चाहिए। दान दिल खुलकर और बिना किसी अहंकार के देना चाहिए।

इस पूर्णिमा पर किया गया दान न केवल इस जन्म में बल्कि अगले जन्म में भी मनुष्य को सुख और समृद्धि देता है। धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि दान देने वाला व्यक्ति कभी दरिद्र नहीं होता। इसलिए अपनी क्षमता के अनुसार दान करें और समाज की सेवा करें।

ज्येष्ठ पूर्णिमा पर व्रत रखना भी लाभकारी है। सुबह जल्दी उठें और हल्का भोजन करें। दिन भर में फल, दूध और जल का सेवन करें। संध्या के समय दीये जलाएं। घर में सभी को प्रसाद बांटें। इस दिन झूठ मत बोलें, किसी को दुर्व्यवहार न करें और सकारात्मक विचारों में रहें।

यह दुर्लभ संयोग मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। इसलिए इस दिन को विशेष महत्व दें, पूजा-पाठ करें, दान करें और सद्कर्म में रत रहें। अपने परिवार के साथ इस पवित्र दिन को मनाएं और भगवान का आशीर्वाद लें। ज्येष्ठ पूर्णिमा की परंपरा को आगे बढ़ाएं और अगली पीढ़ी को सिखाएं कि धर्म और दान का महत्व क्या है। इसी से समाज में सुख, शांति और समृद्धि का वातावरण बनता है।