🔴 ब्रेकिंग
मनप्रीत बादल भाजपा उपाध्यक्ष: मालवा राजनीति में बदलाव|मारुति फ्रॉन्क्स 28KM माइलेज, 2 लाख एक्सपोर्ट|वंदे मातरम विवाद: खरगे का जवाब और पूरा सच|हाफिज सईद के गुर्गे का दावा: LeT ने 10 हजार आतंकी भेजे|क्या डियो से ब्रेस्ट कैंसर होता है? जानें सच|विनोद तावड़े की कमबैक स्टोरी: साइडलाइन से यूपी की कमान तक|स्मृति ईरानी की राजनीतिक यात्रा: ड्रामा और ट्विस्ट|Jio Prime 300 रुपये में 1 साल, सभी सवालों के जवाब|बालों पर 25 हजार मासिक खर्च करने वाली महिला की कहानी|पहली इलेक्ट्रिक फेरारी Luce ₹383 करोड़ में बिकी|मनप्रीत बादल भाजपा उपाध्यक्ष: मालवा राजनीति में बदलाव|मारुति फ्रॉन्क्स 28KM माइलेज, 2 लाख एक्सपोर्ट|वंदे मातरम विवाद: खरगे का जवाब और पूरा सच|हाफिज सईद के गुर्गे का दावा: LeT ने 10 हजार आतंकी भेजे|क्या डियो से ब्रेस्ट कैंसर होता है? जानें सच|विनोद तावड़े की कमबैक स्टोरी: साइडलाइन से यूपी की कमान तक|स्मृति ईरानी की राजनीतिक यात्रा: ड्रामा और ट्विस्ट|Jio Prime 300 रुपये में 1 साल, सभी सवालों के जवाब|बालों पर 25 हजार मासिक खर्च करने वाली महिला की कहानी|पहली इलेक्ट्रिक फेरारी Luce ₹383 करोड़ में बिकी|
Tuesday, 18 August 2026
अपराध

पाकिस्तान अफगान प्रवासियों के खिलाफ विशेष ऑपरेशन शुरू

author
Komal
संवाददाता
📅 29 June 2026, 7:16 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.2K views
पाकिस्तान अफगान प्रवासियों के खिलाफ विशेष ऑपरेशन शुरू
📷 aarpaarkhabar.com

पाकिस्तान सरकार ने अवैध विदेशी नागरिकों के खिलाफ एक बड़ा और व्यापक ऑपरेशन शुरू करने का फैसला किया है। गृह मंत्रालय की ओर से देश भर के जिला प्रशासन और पुलिस विभागों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे बिना वैध वीजा और दस्तावेजों के पाकिस्तान में रह रहे विदेशी नागरिकों को तुरंत गिरफ्तार करें। इस विशेष अभियान की शुरुआत 10 जुलाई से की जाएगी।

इस कार्रवाई का मुख्य लक्ष्य अफगान प्रवासियों को निशाना बनाना है, जो पिछले कई दशकों से पाकिस्तान में रह रहे हैं। पाकिस्तानी सरकार का मानना है कि इन अवैध प्रवासियों से न केवल सुरक्षा को खतरा है, बल्कि यह देश के आर्थिक संसाधनों पर भी अनावश्यक दबाव डाल रहे हैं। गृह मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में कानून और व्यवस्था को बनाए रखना है।

अफगान शरणार्थियों की स्थिति और चिंताएं

पाकिस्तान में अफगान शरणार्थियों की संख्या कई लाखों में है। अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से लाखों लोग पाकिस्तान में आश्रय लेने के लिए आए हैं। इनमें से ज्यादातर लोग पाकिस्तानी सरकार से जारी शरणार्थी कार्ड रखते हैं, लेकिन अब सरकार ने इन सभी को वापस भेजने का निर्णय लिया है।

संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में करीब 17 लाख पंजीकृत अफगान शरणार्थी हैं। इसके अलावा हजारों अनौपचारिक अफगानी भी देश में बिना किसी दस्तावेज के रह रहे हैं। पाकिस्तानी सरकार अब इन सभी को लेकर कड़ी कार्रवाई करने का इरादा रखती है।

मानवाधिकार संगठनों ने इस कदम की आलोचना की है। उनका कहना है कि इस तरह की जबरदस्ती वापसी अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन हो सकती है। विशेष रूप से तब जब अफगानिस्तान में सुरक्षा की स्थिति बेहद नाजुक हो। हालांकि, पाकिस्तानी सरकार अपने निर्णय पर अड़ी हुई दिखाई दे रही है।

अर्थव्यवस्था और सुरक्षा संबंधी चिंताएं

पाकिस्तानी अधिकारियों का अनुमान है कि लाखों अवैध प्रवासियों की वजह से देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो रहा है। शरणार्थियों को खाद्य सामग्री, चिकित्सा सेवाएं और आश्रय प्रदान करने में सरकार को बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती है। इसके अलावा, नौकरी के बाजार में भी इन प्रवासियों से स्थानीय पाकिस्तानियों को प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।

सुरक्षा के मोर्चे पर भी पाकिस्तानी सरकार की चिंताएं जायज हैं। अफगानिस्तान में चल रहे संघर्ष और चरमपंथी गतिविधियों के कारण सुरक्षा बल डरते हैं कि कुछ खतरनाक तत्व पाकिस्तान में घुस सकते हैं। इसी वजह से सरकार सभी अवैध प्रवासियों को निकालना चाहती है ताकि देश की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

कार्रवाई की प्रक्रिया और भविष्य की योजना

गृह मंत्रालय की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, सभी जिलों के प्रशासन को एक विस्तृत सूची तैयार करनी है, जिसमें सभी अवैध विदेशी नागरिकों के नाम दर्ज हों। इसके बाद, पुलिस और सुरक्षा बल इन लोगों को गिरफ्तार करके निर्धारित केंद्रों पर रखेंगे, जहां से उन्हें अफगानिस्तान भेजने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

पाकिस्तानी सरकार ने अफगानिस्तान सरकार के साथ इस बारे में बातचीत भी की है। सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई धीरे-धीरे की जाएगी और शरणार्थियों को वापस लाने की प्रक्रिया सुव्यवस्थित होगी। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बड़े पैमाने पर वापसी से क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है।

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय भी इस विकास को देख रहा है। संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने पाकिस्तान से अपील की है कि वह शरणार्थियों के मानवाधिकारों की रक्षा करे। यूरोपीय देशों ने भी इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि जबरदस्ती वापसी से महिलाओं और बच्चों को खास खतरा हो सकता है।

कुल मिलाकर, पाकिस्तान का यह निर्णय एक महत्वपूर्ण और विवादास्पद कदम है। एक ओर देश की सुरक्षा और आर्थिक स्थिति की चिंताएं जायज हैं, तो दूसरी ओर लाखों लोगों का भविष्य अनिश्चित हो जाएगा। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि यह अभियान वास्तव में कितना प्रभावी साबित होगा और इसके क्या परिणाम निकलेंगे।