रूस के हमलों से यूक्रेन दहला, 12 की मौत
यूक्रेन के प्रमुख शहरों पर रूस के भीषण मिसाइल और ड्रोन हमलों ने एक बार फिर से भारी तबाही मचाई है। इस बर्बर हमले में कम से कम 12 लोगों की जानें चली गईं और 40 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। यह हमला यूक्रेन के इतिहास में सबसे संवेदनशील समय में हुआ है जब देश पहले से ही युद्ध की चपेट में है। राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने इस बर्बरता की कड़ी निंदा की है और पश्चिमी देशों से तत्काल सहायता की मांग की है।
रूस के इस आक्रामक कार्रवाई ने एक बार फिर से यूक्रेन की नागरिक आबादी को निशाना बनाया है। मिसाइलें और ड्रोन सीधे रिहायशी इलाकों पर दागे गए। खबरों के अनुसार, हमले में स्कूल, अस्पताल और आवासीय भवन क्षतिग्रस्त हुए हैं। जिन इलाकों पर हमला हुआ वहां मलबे में घायलों को निकालने के लिए बचाव दल दिन-रात काम कर रहे हैं। लोगों की चीखें और रोने की आवाजें पूरे इलाके को दहला देने वाली हैं।
यूक्रेनी सरकार के आपातकालीन सेवाएं पूरी ताकत से राहत कार्य में लगी हैं। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती किया गया है जहां डॉक्टर और नर्स रातभर उनकी चिकित्सा सेवा में जुटे हैं। कुछ लोगों की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। स्थानीय प्रशासन ने खोज और बचाव अभियान में तेजी लाई है क्योंकि अभी कई लोग मलबे के नीचे दबे होने की आशंका है।
रूस की निर्ममता और जेलेंस्की की प्रतिक्रिया
राष्ट्रपति जेलेंस्की ने इस घटना के तुरंत बाद एक मजबूत बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि रूस के ये हमले मानवता के विरुद्ध अपराध हैं और इसकी सर्वत्र निंदा होनी चाहिए। जेलेंस्की ने पश्चिमी देशों को यूक्रेन की रक्षा के लिए अधिक शक्तिशाली हथियार और सुरक्षा प्रणाली प्रदान करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन के पास रूस के इस आक्रमण का मुकाबला करने के लिए आवश्यक साधन नहीं हैं और उन्हें तत्काल सहायता की जरूरत है।
जेलेंस्की के अनुसार, रूस जानबूझकर नागरिक लक्ष्यों पर हमला कर रहा है। यह एक सुनियोजित रणनीति है यूक्रेन की जनता को आतंकित करने की। रूस के राष्ट्रपति पुतिन चाहते हैं कि यूक्रेन के लोग डर जाएं और आत्मसमर्पण कर दें। लेकिन जेलेंस्की ने साफ किया है कि यूक्रेन की जनता कभी हार नहीं मानेगी। वे अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए हर कीमत पर लड़ने को तैयार हैं।
यूक्रेन की संघर्ष की गाथा
यह पहली घटना नहीं है जब रूस ने यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हमला किया हो। पिछले कई महीनों से यूक्रेन पर रूस के ये हमले बढ़ते गए हैं। सेना और नागरिक दोनों को भारी नुकसान हुआ है। बहुत से घर तबाह हो गए हैं और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं। भोजन, पानी और बिजली की भारी कमी हो गई है। फिर भी यूक्रेन के लोग हार नहीं मान रहे।
यूक्रेन के सैनिकों ने हर मोर्चे पर रूसी सेना का वीरता से मुकाबला किया है। उन्होंने कई बार रूसी सैनिकों को पीछे हटने के लिए मजबूर किया है। यूक्रेनी सेना की वीरता और संकल्प दुनियाभर में सराहना की जा रही है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय भी यूक्रेन के साथ खड़ा है और विभिन्न रूपों में उसकी सहायता कर रहा है।
पश्चिमी देशों से मांग और वैश्विक प्रतिक्रिया
जेलेंस्की ने पश्चिमी देशों से अधिक सैन्य सहायता, विमान भेदी तोपें, लड़ाकू विमान और आधुनिक सुरक्षा प्रणाली की मांग की है। उन्होंने कहा है कि नाटो के देशों को यूक्रेन की मदद करनी चाहिए ताकि वह रूस के आक्रमण का कारगर जवाब दे सके। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और अन्य यूरोपीय देशों ने यूक्रेन को काफी सहायता दी है लेकिन जेलेंस्की का कहना है कि अभी और भी ज्यादा की जरूरत है।
आंतरराष्ट्रिक समुदाय ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। संयुक्त राष्ट्र समेत कई देशों के प्रमुखों ने रूस के इस कार्य को युद्ध अपराध माना है। मानवाधिकार संगठन इस बात की जांच की मांग कर रहे हैं कि रूस नागरिकों को क्यों निशाना बना रहा है।
रूस के तरफ से कहा गया है कि वह यूक्रेन में सैन्य ठिकानों पर हमला कर रहा है। लेकिन यूक्रेन और पश्चिमी देशों का कहना है कि रूस जानबूझकर आवासीय इलाकों को तबाह कर रहा है। इस पूरे संकट में सबसे बड़ा नुकसान यूक्रेन की आम जनता को हो रहा है।
इस युद्ध के चलते हजारों लोग की जानें चली गई हैं। घर छोड़कर लोगों को शरणार्थी जीवन जीना पड़ रहा है। बच्चों की शिक्षा प्रभावित हुई है और महिलाएं व बुजुर्ग अपनी जरूरी जरूरतों के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं। यह एक भयावह मानवीय त्रासदी है जिसका शीघ्र समाधान आवश्यक है। यूक्रेन की जनता की सुरक्षा और शांति पुनः स्थापित करना बेहद जरूरी है।




