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Tuesday, 18 August 2026
टेक

दवा-टीके की निगरानी के लिए नया नियम क्यूआर कोड

author
Komal
संवाददाता
📅 30 June 2026, 6:45 AM ⏱ 1 मिनट 👁 731 views
दवा-टीके की निगरानी के लिए नया नियम क्यूआर कोड
📷 aarpaarkhabar.com

भारत में दवाओं और टीकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। औषधि नियम, 1945 में किए गए नए संशोधन के तहत अब दवाओं और टीकों पर क्यूआर कोड या बारकोड लगाना अनिवार्य हो गया है। यह कदम नकली दवाओं से जनता को बचाने और दवा वितरण की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए उठाया गया है। आइए समझते हैं कि यह नया नियम कैसे काम करेगा और इसके क्या लाभ होंगे।

नया नियम और उसके दायरे में बदलाव

इस संशोधन के तहत सरकार ने दवाओं की निगरानी को और भी व्यापक बनाया है। पहले यह नियम सिर्फ देश की शीर्ष 300 दवा ब्रांड्स पर लागू था, लेकिन अब इसका दायरा काफी हद तक बढ़ा दिया गया है। नए नियम के अनुसार, अब विभिन्न प्रकार के टीके, जीवन रक्षक दवाएं और अन्य महत्वपूर्ण औषधियों पर क्यूआर कोड या बारकोड लगाना अनिवार्य होगा। इससे हर दवा का पूरा डेटा ट्रैक किया जा सकेगा।

यह क्यूआर कोड प्रणाली दवा निर्माताओं, वितरकों और खुदरा विक्रेताओं के लिए अलग-अलग जानकारी रखेगी। जब कोई भी व्यक्ति इस कोड को स्कैन करेगा, तो उसे दवा के बारे में संपूर्ण जानकारी मिल जाएगी। इसमें दवा की असली कीमत, निर्माण की तारीख, एक्सपायरी डेट और निर्माता का विवरण शामिल होगा। यह प्रणाली दवा की आपूर्ति श्रृंखला में पूरी पारदर्शिता लाएगी।

क्यूआर कोड सिस्टम कैसे काम करेगा

क्यूआर कोड सिस्टम की कार्यप्रणाली बिल्कुल सरल है। जब कोई दवा निर्माता अपनी दवा को बाजार में लाता है, तो उसके पैकेज पर एक अद्वितीय क्यूआर कोड छपा होता है। यह कोड दवा की पूरी यात्रा को ट्रैक करता है - निर्माण से लेकर रोगी तक पहुंचने तक। अस्पतालों, दवा की दुकानों और रोगियों के पास यह कोड स्कैन करने की सुविधा होगी।

जब किसी भी स्तर पर कोई व्यक्ति इस क्यूआर कोड को अपने स्मार्टफोन से स्कैन करता है, तो उसे तुरंत यह पता चल जाता है कि दवा असली है या नकली। साथ ही, वह यह भी देख सकता है कि दवा किस मूल्य पर बेची जानी चाहिए। इससे दवा की कालाबाजारी और अत्यधिक मूल्य निर्धारण पर भी रोक लगेगी। यदि कोई दवाई की दुकान इससे अधिक कीमत वसूल करेगी, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी।

नकली दवाओं से होने वाले नुकसान और समाधान

भारत में नकली दवाओं की समस्या बहुत ही गंभीर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बिकने वाली कुल दवाओं का लगभग 10-15 प्रतिशत नकली या मिलावटी होता है। ये नकली दवाएं न केवल रोगियों को सही इलाज से वंचित करती हैं, बल्कि उन्हें गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं भी पैदा कर सकती हैं। कई बार तो नकली दवाओं के सेवन से मरीजों की मौत भी हो जाती है।

इसी समस्या का समाधान करने के लिए सरकार ने यह क्यूआर कोड सिस्टम शुरू किया है। इस नई प्रणाली से नकली दवाओं को बाजार में आने से पहले ही रोका जा सकेगा। क्योंकि हर असली दवा का एक अनोखा क्यूआर कोड होगा, जिसे दोहराया नहीं जा सकता। अगर कोई नकली दवा का निर्माण करने की कोशिश करेगा, तो उसका क्यूआर कोड मेल नहीं खाएगा, और तुरंत उसे पकड़ा जा सकेगा।

आम जनता को क्या लाभ होगा

इस नई प्रणाली से आम जनता को कई तरह के लाभ मिलेंगे। सबसे पहली बात तो यह है कि दवा की दुकानों से असली दवा खरीदने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी। दूसरा, रोगी स्वयं भी दवा खरीदते समय उसकी असलीयत की जांच कर सकते हैं। तीसरा, यदि किसी को दवा से कोई दुष्प्रभाव होता है, तो उसे पता चल सकता है कि दवा का निर्माण किसने किया था और कब किया था।

यह नई प्रणाली औषधि निर्माताओं के लिए भी फायदेमंद है। इससे असली दवा निर्माताओं को अपनी बिक्री सही तरीके से ट्रैक करने में मदद मिलेगी। साथ ही, नकली दवाओं की बिक्री से असली निर्माताओं को होने वाले नुकसान से भी बचा जा सकेगा। सरकार के लिए भी यह प्रणाली कर वसूली और दवा उद्योग की निगरानी में मदद करेगी।

कुल मिलाकर, यह क्यूआर कोड सिस्टम भारतीय स्वास्थ्य सेवा में एक क्रांतिकारी बदलाव लाने वाला है। इससे रोगियों को सुरक्षित और असली दवाएं मिल सकेंगी, जो उन्हें स्वास्थ्य समस्याओं से बेहतर तरीके से निपटने में सक्षम बनाएगी। सरकार के इस महत्वपूर्ण कदम से भारत के स्वास्थ्य ढांचे में मजबूती आएगी।