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Monday, 06 July 2026
मौसम

मॉनसून पर अल नीनो का असर, जुलाई में कम बारिश

author
Komal
संवाददाता
📅 01 July 2026, 6:15 AM ⏱ 1 मिनट 👁 267 views
मॉनसून पर अल नीनो का असर, जुलाई में कम बारिश
📷 aarpaarkhabar.com

भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने जुलाई महीने के लिए जो पूर्वानुमान जारी किया है, वह किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए चिंताजनक है। विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, अल नीनो के प्रभाव से देश के अधिकांश भागों में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है। यह स्थिति मई-जून में रिकॉर्ड सूखे के बाद आ रही है, जिससे मिट्टी की नमी पहले से ही कम हो गई है।

भारत की कृषि अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से मानसूनी बारिश पर निर्भर है। खरीफ मौसम की फसलें जैसे चावल, मक्का, कपास और दालें सीधे तौर पर वर्षा पर निर्भर होती हैं। ऐसे में जुलाई में कम बारिश का मतलब है कि इन फसलों की बुवाई और उनके विकास में गंभीर समस्या आएगी। आईएमडी के इस पूर्वानुमान के बाद किसानों की चिंता बढ़ गई है।

अल नीनो क्या है और इसका असर कैसे होता है

अल नीनो एक जलवायु परिघटना है जो प्रशांत महासागर में तापमान बढ़ने से उत्पन्न होती है। जब समुद्र का सतही तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है, तो यह वायुमंडलीय परिस्थितियों को बदल देता है। इसका सीधा असर भारत के मानसून पर पड़ता है। अल नीनो के दौरान मानसूनी हवाओं की गति कमजोर हो जाती है, जिससे बारिश की मात्रा में कमी आती है।

इस बार आईएमडी ने जून की शुरुआत में ही अल नीनो की घोषणा कर दी थी। समुद्र के तापमान में वृद्धि और उष्ण कटिबंधीय प्रशांत महासागर में परिवर्तन इसके मुख्य कारण हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह अल नीनो की स्थिति कम से कम अगस्त तक बनी रह सकती है। इसलिए आने वाले कुछ महीनों में कम बारिश की चेतावनी दी जा रही है।

भारतीय मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से 10 से 20 प्रतिशत कम बारिश हो सकती है। कुछ क्षेत्रों में यह कमी और भी अधिक हो सकती है। मध्य भारत, पश्चिमी भारत और उत्तरी भारत के कुछ इलाकों में विशेष रूप से कम बारिश की संभावना है।

कृषि पर असर और किसानों की चिंता

जून में ही देश के अधिकांश हिस्सों में सूखे की स्थिति बनी रही। आईएमडी के अनुसार, जून में देश को सामान्य से 49 प्रतिशत कम बारिश मिली। यह 2015 के बाद सबसे कम बारिश है। ऐसे में मिट्टी में नमी की कमी हो गई है और बीजों का अंकुरण ठीक से नहीं हो पाया है।

जुलाई आमतौर पर मानसून का सबसे सक्रिय महीना माना जाता है। इसी महीने में किसान खरीफ की प्रमुख फसलों की बुवाई पूरी करते हैं। लेकिन अगर जुलाई में भी कम बारिश होगी, तो बीजों का अंकुरण रुक जाएगा। धान, मक्का, सोयाबीन, दालें और कपास की फसलें को काफी नुकसान हो सकता है।

किसान संगठन पहले से ही सरकार से आर्थिक सहायता की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि सूखे की स्थिति में फसल बीमा योजना को और भी मजबूत बनाने की जरूरत है। कई राज्यों में किसान आंदोलन शुरू हो गए हैं।

सरकार की तैयारी और समाधान

भारतीय मौसम विभाग के पूर्वानुमान के बाद केंद्रीय सरकार सचेत हो गई है। कृषि मंत्रालय राज्य सरकारों को सूखा प्रबंधन के लिए निर्देश दे चुका है। सिंचाई सुविधाओं को बेहतर करने और भूजल संरक्षण पर जोर दिया जा रहा है।

राज्य सरकारें किसानों को वैकल्पिक फसलें उगाने की सलाह दे रही हैं। सूखा सहिष्णु फसलें जैसे बाजरा, ज्वार और दालें लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। साथ ही, सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों का प्रसार किया जा रहा है।

कई राज्यों ने किसानों के लिए आपातकालीन राहत कार्यक्रम शुरू किए हैं। पानी की आपूर्ति को लेकर नहरों और कुओं की मरम्मत की जा रही है। सरकार ने किसानों को ब्याज-मुक्त ऋण देने की भी घोषणा की है।

अल नीनो के असर को देखते हुए, कृषि विशेषज्ञ भी किसानों को सलाह दे रहे हैं कि वे बारिश को लेकर आशान्वित न रहें। मल्च तकनीक, ड्रिप सिंचाई और पानी के संरक्षण पर ध्यान देना चाहिए। बहुत से किसान पहले से ही इन तकनीकों को अपना रहे हैं।

आने वाले महीनों में अगर कम बारिश जारी रहती है, तो खाद्य सुरक्षा को लेकर भी चिंता हो सकती है। इसलिए सरकार और किसान दोनों को मिलकर इस संकट से निपटने की तैयारी करनी चाहिए। भारतीय मौसम विभाग की टीम लगातार परिस्थितियों की निगरानी कर रही है और हर 10 दिन में अपडेट जारी कर रही है। उम्मीद है कि अल नीनो का असर धीरे-धीरे कम होगा और बारिश की स्थिति सुधरेगी।