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Tuesday, 18 August 2026
टेक

डेंगू या स्वाइन फ्लू? AIIMS डॉक्टर ने बताया अंतर

बुखार और सिरदर्द में डेंगू और स्वाइन फ्लू में क्या अंतर है? AIIMS के प्रोफेसर डॉ नीरज निश्चल से जानिए सही पहचान का तरीका।

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Komal
संवाददाता
📅 18 August 2026, 2:15 PM ⏱ 1 मिनट 👁 925 views
डेंगू या स्वाइन फ्लू? AIIMS डॉक्टर ने बताया अंतर
📷 aarpaarkhabar.com

देश के कई राज्यों में इन दिनों डेंगू और स्वाइन फ्लू के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। मौसम बदलते ही ये दोनों संक्रामक बीमारियां सिर उठाने लगती हैं और लोगों को परेशानी में डाल देती हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि इन दोनों बीमारियों के शुरुआती लक्षण लगभग एक जैसे होते हैं। तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द और कमजोरी दोनों ही बीमारियों में पाए जाते हैं। इसी वजह से लोग अक्सर भ्रमित रहते हैं और सही इलाज नहीं करवा पाते। इसी महत्वपूर्ण विषय पर दिल्ली के AIIMS में मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ नीरज निश्चल ने विस्तार से जानकारी दी है।

डेंगू के लक्षण क्या हैं?

डॉ नीरज निश्चल के अनुसार डेंगू के लक्षण आम तौर पर संक्रमित मच्छर के काटने के तीन से पांच दिन बाद दिखाई देने लगते हैं। डेंगू में सबसे पहली चीज है अचानक बहुत तेज बुखार आना। यह बुखार कई बार 104-105 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंच सकता है। डेंगू के बुखार में रोगी को तेज सिरदर्द, आंखों में दर्द, हड्डियों और मांसपेशियों में बहुत तेज दर्द होता है। इसी वजह से डेंगू को "ब्रेकबोन फीवर" भी कहा जाता है क्योंकि इसमें दर्द इतना तीव्र होता है कि लगता है हड्डियां टूट जाएंगी। डेंगू में पांच-छः दिन के बुखार के बाद दाने निकलने लगते हैं जो शरीर पर लाल-गुलाबी रंग के होते हैं। कुछ रोगियों को मतली और उल्टियां भी आती हैं। डेंगू में प्लेटलेट्स की संख्या में भी कमी देखी जाती है जो खतरनाक साबित हो सकती है। डॉक्टर के मुताबिक डेंगू का कोई विशेष इलाज नहीं होता, बस लक्षणों को कम करने की कोशिश की जाती है।

स्वाइन फ्लू के लक्षण और बीमारी की प्रकृति

स्वाइन फ्लू यानी H1N1 इन्फ्लूएंजा एक वायरल बीमारी है जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से फैलती है। स्वाइन फ्लू में भी तेज बुखार आता है लेकिन यह बुखार अचानक शुरू होता है और आमतौर पर 100-103 डिग्री फारेनहाइट तक जाता है। इस बीमारी में सूखी खांसी, गले में खराश, सिरदर्द और शरीर में दर्द होता है। स्वाइन फ्लू में ज्यादातर मरीजों को छींक, नाक बहना और गले की समस्या होती है। इस बीमारी में कुछ लोगों को दस्त और उल्टियां भी हो सकती हैं लेकिन यह डेंगू जितना आम नहीं है। स्वाइन फ्लू में आमतौर पर दाने नहीं निकलते। डॉ निश्चल के अनुसार स्वाइन फ्लू में श्वसन तंत्र प्रभावित होता है और बुजुर्ग एवं कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों के लिए यह ज्यादा खतरनाक हो सकता है।

डेंगू और स्वाइन फ्लू में अंतर पहचानने का तरीका

डॉ नीरज निश्चल के अनुसार दोनों बीमारियों को पहचानने के लिए कुछ खास बातों पर ध्यान देना जरूरी है। सबसे पहली बात यह कि डेंगू में बुखार के साथ शरीर पर दाने आते हैं जबकि स्वाइन फ्लू में आमतौर पर दाने नहीं आते। दूसरी बात, डेंगू में हड्डियों और मांसपेशियों का दर्द बहुत तीव्र होता है जबकि स्वाइन फ्लू में श्वसन संबंधी समस्याएं ज्यादा प्रमुख होती हैं। डेंगू में खांसी नहीं आती लेकिन स्वाइन फ्लू में सूखी खांसी एक प्रमुख लक्षण है। तीसरी बात, डेंगू में नाक नहीं बहती जबकि स्वाइन फ्लू में नाक बहना और छींक आना आम बात है। चौथी महत्वपूर्ण बात यह है कि डेंगू का निदान खून की जांच से होता है जहां विशेष एंटीबॉडीज ढूंढे जाते हैं। स्वाइन फ्लू का निदान गले से लिए गए सैंपल से किया जाता है। डॉक्टर के अनुसार सही समय पर सही पहचान बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि स्वाइन फ्लू में एंटीवायरल दवाएं जल्दी दी जानी चाहिए।

डॉ निश्चल यह भी बताते हैं कि अगर किसी को तेज बुखार के साथ ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। घर पर बैठकर अंदाजे से इलाज नहीं करना चाहिए। डॉक्टर जरूरी टेस्ट करवाकर सही निदान लगाएंगे और उसी के अनुसार इलाज देंगे। इसके अलावा साफ-सफाई रखना, मच्छरों से बचना, और स्वच्छता बनाए रखना इन बीमारियों से बचाव के सबसे प्रभावी तरीके हैं।