🔴 ब्रेकिंग
मनप्रीत बादल भाजपा उपाध्यक्ष: मालवा राजनीति में बदलाव|मारुति फ्रॉन्क्स 28KM माइलेज, 2 लाख एक्सपोर्ट|वंदे मातरम विवाद: खरगे का जवाब और पूरा सच|हाफिज सईद के गुर्गे का दावा: LeT ने 10 हजार आतंकी भेजे|क्या डियो से ब्रेस्ट कैंसर होता है? जानें सच|विनोद तावड़े की कमबैक स्टोरी: साइडलाइन से यूपी की कमान तक|स्मृति ईरानी की राजनीतिक यात्रा: ड्रामा और ट्विस्ट|Jio Prime 300 रुपये में 1 साल, सभी सवालों के जवाब|बालों पर 25 हजार मासिक खर्च करने वाली महिला की कहानी|पहली इलेक्ट्रिक फेरारी Luce ₹383 करोड़ में बिकी|मनप्रीत बादल भाजपा उपाध्यक्ष: मालवा राजनीति में बदलाव|मारुति फ्रॉन्क्स 28KM माइलेज, 2 लाख एक्सपोर्ट|वंदे मातरम विवाद: खरगे का जवाब और पूरा सच|हाफिज सईद के गुर्गे का दावा: LeT ने 10 हजार आतंकी भेजे|क्या डियो से ब्रेस्ट कैंसर होता है? जानें सच|विनोद तावड़े की कमबैक स्टोरी: साइडलाइन से यूपी की कमान तक|स्मृति ईरानी की राजनीतिक यात्रा: ड्रामा और ट्विस्ट|Jio Prime 300 रुपये में 1 साल, सभी सवालों के जवाब|बालों पर 25 हजार मासिक खर्च करने वाली महिला की कहानी|पहली इलेक्ट्रिक फेरारी Luce ₹383 करोड़ में बिकी|
Tuesday, 18 August 2026
राजनीति

BJP छोड़कर पूनावाला का मिडिल क्लास को तीखा सवाल

शहजाद पूनावाला ने BJP छोड़ने के बाद उठाया सवाल कि मिडिल क्लास को टैक्स देकर क्या मिलता है। ग्लोबल दरों पर टैक्स, ग्लोबल सुविधाएं की मांग।

author
Komal
संवाददाता
📅 18 August 2026, 2:46 PM ⏱ 1 मिनट 👁 1.1K views
BJP छोड़कर पूनावाला का मिडिल क्लास को तीखा सवाल
📷 aarpaarkhabar.com

राजनीति के कई अप्रत्याशित मोड़ों में एक और नाम जुड़ गया है। शहजाद पूनावाला ने भारतीय जनता पार्टी से अलग होने के बाद कुछ ऐसे सवाल उठाए हैं जो भारतीय मिडिल क्लास की नब्ज को छूते हैं। उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे सिर्फ राजनीतिक नहीं हैं, बल्कि आम जनता की आर्थिक चिंताओं से सीधा संबंध रखते हैं।

पूनावाला का सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि आखिर भारतीय मिडिल क्लास को टैक्स देने के बदले में क्या मिलता है। यह प्रश्न बहुत ही सामयिक और प्रासंगिक है। भारत में मिडिल क्लास का एक बड़ा हिस्सा अपनी आय का महत्वपूर्ण हिस्सा सरकार को टैक्स के रूप में देता है, लेकिन बदले में उन्हें जो सुविधाएं मिलती हैं, वे बेहद सीमित हैं।

पूनावाला ने यह भी कहा है कि यदि हम वैश्विक मानकों पर टैक्स दर देते हैं, तो हमें वैश्विक स्तर की सुविधाएं भी मिलनी चाहिए। यह तर्क काफी सशक्त है। विकसित देशों में जहां टैक्स की दरें अधिक होती हैं, वहां नागरिकों को भी उसी के अनुसार बेहतर सुविधाएं, बेहतर शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, बेहतर बुनियादी ढांचा और सामाजिक सुरक्षा मिलती है।

मिडिल क्लास की असल समस्या क्या है?

भारतीय मिडिल क्लास की समस्या यह है कि वह एक अजीब सी स्थिति में फंसा हुआ है। उसे न तो गरीबी से राहत मिलती है और न ही अमीरों जैसी सुविधाएं। मिडिल क्लास के लोग अपनी पूरी मेहनत से कमाते हैं, अपने परिवार की देखभाल करते हैं, अपने बच्चों की शिक्षा के लिए हजारों-लाखों खर्च करते हैं, और साथ ही राष्ट्र के विकास के लिए भी टैक्स देते हैं।

लेकिन इसके बदले में उन्हें क्या मिलता है? सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता इतनी खराब है कि कोई भी मिडिल क्लास का माता-पिता अपने बच्चे को वहां नहीं भेजना चाहता। सरकारी अस्पतालों की स्थिति भी अक्सर दयनीय होती है। सड़कें खराब हैं, बिजली की समस्या है, पानी की कमी है, और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था भी बेहद अव्यवस्थित है।

मिडिल क्लास का एक युवा जब नौकरी की खोज में निकलता है, तो उसे न तो सरकार की ओर से कोई प्रशिक्षण कार्यक्रम मिलता है और न ही किसी विशेष सहायता की व्यवस्था होती है। उसे निजी संस्थानों पर ही निर्भर रहना पड़ता है, जहां शिक्षा महंगी होती है।

ग्लोबल स्तर के टैक्स और स्थानीय स्तर की सुविधाएं

पूनावाला के सवाल का सार यही है कि भारतीय टैक्स सिस्टम अंतरराष्ट्रीय मानकों के बहुत करीब है, लेकिन सुविधाएं बहुत पीछे हैं। एक भारतीय सेलरीड प्रफेशनल को अक्सर अपनी आय का बीस से तीस प्रतिशत तक सीधा या अप्रत्यक्ष रूप से टैक्स के रूप में देना पड़ता है। यह दर विकसित देशों की तरह है।

लेकिन बदले में जब वह व्यक्ति सरकारी सेवाओं का उपयोग करने की कोशिश करता है, तो उसे निराशा ही हाथ लगती है। शिक्षा के क्षेत्र में, स्वास्थ्य सेवा में, परिवहन में, या किसी भी बुनियादी ढांचे के मामले में, भारत की स्थिति विकसित देशों से बहुत पीछे है।

विकसित देशों में जहां किसी को पचीस से तीस प्रतिशत तक टैक्स देना पड़ता है, वहां सार्वजनिक शिक्षा विश्वमानक की होती है। सरकारी अस्पताल भी उच्च श्रेणी की सुविधाएं प्रदान करते हैं। सार्वजनिक परिवहन आधुनिक और विश्वसनीय होता है। इसके विपरीत, भारत में मिडिल क्लास को यह सब सार्वजनिक व्यवस्था से नहीं मिलता।

भविष्य में क्या बदलाव आना चाहिए?

पूनावाला के सवाल से एक महत्वपूर्ण बातचीत शुरू हुई है। सरकार को यह समझना चाहिए कि जब आप किसी नागरिक से अंतरराष्ट्रीय मानकों पर टैक्स लेते हैं, तो उसे भी अंतरराष्ट्रीय मानकों की सेवाएं देनी चाहिए।

भारत को अपनी सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना चाहिए, ताकि हर मिडिल क्लास का बच्चा एक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पाए। स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर करनी चाहिए। सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाना चाहिए। नौकरियों के अवसर बढ़ाने चाहिए।

जब तक भारतीय मिडिल क्लास को वह रिटर्न नहीं मिलता जो वह देता है, तब तक राष्ट्र का समग्र विकास संभव नहीं है। पूनावाला के सवाल सिर्फ राजनीतिक नहीं हैं, ये एक जायज नागरिक की मांग हैं और सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए।