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Saturday, 03 October 2026
राजनीति

BJP विधायक का अधिकारियों पर आक्रोश, पिटवाकर अंदर करने की धमकी

लखीमपुर खीरी के बीजेपी विधायक विनोद शंकर अवस्थी का वीडियो वायरल। खाद की कीमत को लेकर अधिकारियों पर भड़के विधायक।

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Komal
संवाददाता
📅 18 August 2026, 3:02 PM ⏱ 1 मिनट 👁 1.2K views
BJP विधायक का अधिकारियों पर आक्रोश, पिटवाकर अंदर करने की धमकी
📷 aarpaarkhabar.com

लखीमपुर खीरी जिले की धौरहरा विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक विनोद शंकर अवस्थी का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में विधायक को अधिकारियों के खिलाफ कड़ी भाषा का इस्तेमाल करते हुए देखा जा सकता है। मामला खाद की बढ़ी हुई कीमत को लेकर है, जो किसानों के लिए बड़ी समस्या बन गई है।

हुआ यह कि विधायक जब खाद समिति के बाहर किसानों की भीड़ देखकर रुके, तो उन्होंने किसानों से खाद की कीमत पूछी। किसानों ने बताया कि खाद 280 रुपये प्रति बैग बिक रही है। यह कीमत किसानों के बजट से बहुत अधिक है। इस बात को सुनते ही विधायक को आक्रोश आ गया और उन्होंने अधिकारियों को सीधे-सीधे नौकरी छोड़ने और पिटवाकर अंदर करने की धमकी दे दी।

विधायक के इस कड़े रुख से जहां अधिकारियों में खलबली मच गई है, वहीं किसान भी इस घटना को लेकर उनके साहस की प्रशंसा कर रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि आखिर क्यों खाद की कीमत इतनी बढ़ गई है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

खाद की कीमत में बेतहाशा इजाफा

पिछले कुछ महीनों में खाद की कीमतों में जो इजाफा हुआ है, वह किसानों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है। खरीफ सीजन शुरू होने वाला है और इस समय किसानों को अच्छी गुणवत्ता की खाद की जरूरत होती है। लेकिन बाजार में खाद की कीमतें आसमान छू गई हैं।

यूरिया, डीएपी और दूसरी खाद की कीमतें अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गई हैं। किसान अपने खेतों में बीज डालने से पहले काफी सोच-समझ करते हैं कि वे कितनी खाद का इस्तेमाल कर सकते हैं। 280 रुपये की कीमत पर खाद खरीदना एक आम किसान के लिए संभव नहीं है।

राज्य सरकार ने जो सब्सिडी का वादा किया था, वह पूरी तरह से जमीन पर नहीं उतर रही है। किसान अभी भी बाजार दर पर खाद खरीद रहे हैं। इस वजह से उनकी लागत बढ़ रही है और मुनाफा घट रहा है।

विधायक की कड़ी कारवाई की उम्मीद

विधायक विनोद शंकर अवस्थी ने जो कठोर रुख अपनाया है, उससे लगता है कि वे इस समस्या को गंभीरता से ले रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट कर दिया है कि अगर खाद की कीमत सही नहीं की गई, तो उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है।

ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या विधायक की इस धमकी से खाद की कीमत में गिरावट आएगी? क्या अधिकारी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए इस समस्या का समाधान करेंगे?

विधायक को खाद समिति के अधिकारियों को कार्रवाई के लिए गंभीर निर्देश देने चाहिए। यह जांच होनी चाहिए कि आखिर खाद की कीमत इतनी अधिक क्यों बढ़ी है। क्या कोई गिरोह है जो खाद को जमाखोरी करके कीमतें बढ़ा रहा है? इन सभी सवालों का जवाब निकालना जरूरी है।

किसानों की दुर्दशा और सरकार की जिम्मेदारी

खाद की बढ़ी हुई कीमतें किसानों के लिए सीधे तौर पर उनके खेत के उत्पादन में कमी का कारण बनेंगी। जब किसान महंगी खाद नहीं खरीद पाएंगे, तो वे अपने खेतों में कम खाद डालेंगे, जिससे पैदावार घटेगी।

राज्य सरकार को चाहिए कि वह खाद की कीमतों पर नजर रखे और उचित नियंत्रण सुनिश्चित करे। किसानों को सब्सिडी वाली दरों पर खाद मुहैया कराई जानी चाहिए। खाद समितियों को निर्देश दिए जाने चाहिए कि वे उचित दर पर खाद बेचें।

विधायक का यह कदम सराहनीय है, लेकिन इसके साथ ही सरकार को भी व्यवस्था के स्तर पर सुधार करने होंगे। खाद की आपूर्ति को सुचारु रखना और कीमतों को नियंत्रित रखना सरकार की जिम्मेदारी है।

लखीमपुर खीरी जिले के किसान विधायक की इस पहल से उम्मीद लगा रहे हैं कि जल्द ही उनकी समस्या का समाधान हो जाएगा। लेकिन सिर्फ विधायक के प्रयास से ही समस्या का संपूर्ण समाधान संभव नहीं है। राज्य और केंद्र सरकार दोनों को ही मिलकर काम करना होगा ताकि किसानों को सस्ती खाद मिल सके और वे अपने खेतों में अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकें।