हाफिज सईद के गुर्गे का दावा: LeT ने 10 हजार आतंकी भेजे
पाकिस्तानी मौलवी नासिर मदनी ने हाफिज सईद की तारीफ करते हुए दावा किया कि LeT ने कश्मीर में 10 हजार आतंकियों को भेजा था। जानिए पूरी खबर।
पाकिस्तान में आतंकवादी संगठनों के प्रति सहानुभूति और उनको महिमामंडित करने का सिलसिला एक बार फिर सामने आ गया है। इस बार पाकिस्तानी इस्लामिक चिंतक और मौलवी नासिर मदनी ने ऐसे बयान दिए हैं जो न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताजनक हैं बल्कि भारत के लिए सुरक्षा की गंभीर चुनौती को दर्शाते हैं। नासिर मदनी ने लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक और 26/11 मुंबई आतंकी हमले के साजिशकर्ताओं में शामिल हाफिज सईद की खुलेआम तारीफ करते हुए दावा किया है कि उसने कश्मीर में 10 हजार आतंकियों को भेजा था।
यह खुलासा पाकिस्तान में आतंकवाद को बढ़ावा देने की नापाक साजिशों को उजागर करता है। हाफिज सईद वह आतंकवादी नेता है जिसके खिलाफ संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी प्रतिबंध लगाए हैं। वह लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक है जो कश्मीर में अलगतावादी आतंकवाद को भड़काने का मुख्य केंद्र माना जाता है। 26/11 मुंबई आतंकी हमले में उसकी भूमिका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत है।
पाकिस्तान में आतंकवाद की जड़ें
पाकिस्तान में आतंकवादी संगठनों को मजबूत करने की कोशिशें कोई नई बात नहीं हैं। देश की सरकार और विभिन्न राजनीतिक शख्सियतें खुलेआम ऐसे संगठनों को समर्थन देती रहती हैं। नासिर मदनी का बयान इसी षड्यंत्र का हिस्सा लगता है जिसका उद्देश्य कश्मीर में अशांति फैलाना है। लश्कर-ए-तैयबा को पाकिस्तान के सेना प्रतिष्ठानों द्वारा प्रशिक्षण और संसाधन मुहैया कराए जाते रहे हैं।
जब नासिर मदनी यह कहते हैं कि हाफिज सईद ने 10 हजार आतंकियों को कश्मीर भेजा था, तो इसका अर्थ है कि पाकिस्तान में आतंकवाद का एक संगठित तंत्र मौजूद है। यह केवल एक अकेले व्यक्ति की कार्रवाई नहीं बल्कि एक संस्थागत प्रयास है। पाकिस्तान की सरकारी एजेंसियां और सेना के अधिकारी इन संगठनों के साथ मिलीभगत रखते हैं।
कश्मीर घाटी में पिछले कई दशकों से आतंकवादी गतिविधियां बढ़ी हैं। इसके पीछे पाकिस्तान की सरकार और उसके समर्थक आतंकवादी संगठन हैं। हजारों निर्दोष लोगों की जान लेने वाले इन आतंकियों को पाकिस्तान में हीरो का दर्जा दिया जाता है। स्कूलों और कॉलेजों में इन आतंकवादियों की तारीफ की जाती है। यह शिक्षा व्यवस्था का विष है जो नई पीढ़ी को गुमराह करता है।
हाफिज सईद और लश्कर-ए-तैयबा का खतरनाक नेटवर्क
हाफिज सईद केवल एक आतंकवादी नहीं है बल्कि एक आतंकवादी नेटवर्क का मस्तिष्क है। उसने लश्कर-ए-तैयबा के माध्यम से भारत के विभिन्न हिस्सों में आतंकवादी हमले संचालित किए हैं। 26/11 के मुंबई आतंकी हमले में 166 लोग मारे गए थे। उस हमले की योजना बनाने में हाफिज सईद की भूमिका थी। इसके बाद भी पाकिस्तान ने उसे सुरक्षा प्रदान की है।
लश्कर-ए-तैयबा का गठन 1990 के दशक में हुआ था। इसका उद्देश्य कश्मीर में अलगतावादी आतंकवाद को बढ़ावा देना था। संगठन ने भारतीय सेना के जवानों को निशाना बनाया है। पुलवामा आतंकी हमले में भी इसी संगठन की भूमिका थी। वह हमला 40 भारतीय जवानों की जान ले गया था। लेकिन पाकिस्तान में इन सब कार्रवाइयों को महिमामंडित किया जाता है।
भारत के लिए चुनौती और सुरक्षा के मुद्दे
नासिर मदनी के बयान से साफ होता है कि पाकिस्तान आतंकवाद को एक रणनीतिक उपकरण के रूप में इस्तेमाल करता है। कश्मीर में 10 हजार आतंकियों को भेजना केवल एक अलगतावादी आंदोलन नहीं है बल्कि एक राष्ट्रीय स्तर की रणनीति है। भारतीय सुरक्षा बलों को इन आतंकियों का मुकाबला करने में हजारों जवानों की जान चली गई है।
कश्मीर घाटी में आम लोग भी इन आतंकवादी गतिविधियों का शिकार हुए हैं। दुकानें बंद होती हैं, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है, और सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। इसी तरह की परिस्थितियों में कश्मीरी पंडित समुदाय को अपनी मातृभूमि को छोड़ना पड़ा। हजारों परिवार विस्थापित हुए। यह सब कुछ पाकिस्तान द्वारा समर्थित आतंकवाद के कारण हुआ।
भारत के लिए सुरक्षा का यह मुद्दा बेहद गंभीर है। पाकिस्तान न केवल आतंकवादियों को प्रशिक्षण दे रहा है बल्कि उन्हें सशस्त्र भी कर रहा है। नासिर मदनी जैसे इस्लामिक चिंतकों के बयान बताते हैं कि यह एक सुनियोजित षड्यंत्र है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को इस खतरे से निपटने के लिए हमेशा सतर्क रहना पड़ता है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी पाकिस्तान के इन कार्यों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। संयुक्त राष्ट्र संघ के पास पाकिस्तान के खिलाफ पहले से ही कई प्रस्ताव हैं लेकिन उन्हें लागू नहीं किया जा रहा है। आतंकवाद को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत रुख अपनाना होगा। नासिर मदनी और हाफिज सईद जैसे आतंकवादियों को कड़ी सजा दी जानी चाहिए। भारत को अपनी सीमाओं पर अतिरिक्त सतर्कता बनाए रखनी होगी ताकि कश्मीर में शांति स्थापित हो सके और आतंकवाद को कोई मौका न मिले।




