🔴 ब्रेकिंग
मनप्रीत बादल भाजपा उपाध्यक्ष: मालवा राजनीति में बदलाव|मारुति फ्रॉन्क्स 28KM माइलेज, 2 लाख एक्सपोर्ट|वंदे मातरम विवाद: खरगे का जवाब और पूरा सच|हाफिज सईद के गुर्गे का दावा: LeT ने 10 हजार आतंकी भेजे|क्या डियो से ब्रेस्ट कैंसर होता है? जानें सच|विनोद तावड़े की कमबैक स्टोरी: साइडलाइन से यूपी की कमान तक|स्मृति ईरानी की राजनीतिक यात्रा: ड्रामा और ट्विस्ट|Jio Prime 300 रुपये में 1 साल, सभी सवालों के जवाब|बालों पर 25 हजार मासिक खर्च करने वाली महिला की कहानी|पहली इलेक्ट्रिक फेरारी Luce ₹383 करोड़ में बिकी|मनप्रीत बादल भाजपा उपाध्यक्ष: मालवा राजनीति में बदलाव|मारुति फ्रॉन्क्स 28KM माइलेज, 2 लाख एक्सपोर्ट|वंदे मातरम विवाद: खरगे का जवाब और पूरा सच|हाफिज सईद के गुर्गे का दावा: LeT ने 10 हजार आतंकी भेजे|क्या डियो से ब्रेस्ट कैंसर होता है? जानें सच|विनोद तावड़े की कमबैक स्टोरी: साइडलाइन से यूपी की कमान तक|स्मृति ईरानी की राजनीतिक यात्रा: ड्रामा और ट्विस्ट|Jio Prime 300 रुपये में 1 साल, सभी सवालों के जवाब|बालों पर 25 हजार मासिक खर्च करने वाली महिला की कहानी|पहली इलेक्ट्रिक फेरारी Luce ₹383 करोड़ में बिकी|
Tuesday, 18 August 2026
राजनीति

वंदे मातरम विवाद: खरगे का जवाब और पूरा सच

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने वंदे मातरम विवाद पर कहा कि वही गीत गाया जो गांधी-नेहरू गाते थे। पूरी खबर पढ़ें।

author
Komal
संवाददाता
📅 18 August 2026, 3:31 PM ⏱ 1 मिनट 👁 289 views
वंदे मातरम विवाद: खरगे का जवाब और पूरा सच
📷 aarpaarkhabar.com

पणजी - कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने वंदे मातरम को लेकर सुलगते विवाद पर अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि उन्होंने वही गीत गाया है जिसे महात्मा गांधी और पंडित जवाहरलाल नेहरू भी गाते थे। खरगे के इस बयान से सियासी बहस और तीखी हुई है। विपक्ष के नेता और सत्तापक्ष के बीच इस मुद्दे को लेकर जो तनातनी चल रही है, उसमें खरगे का यह बयान एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।

कांग्रेस के दिग्गज नेता ने साफ शब्दों में कहा कि कांग्रेस की परंपरा 90 साल पुरानी है और यह परंपरा किसी सरकार के कहने भर से नहीं बदली जा सकती। खरगे के अनुसार, राष्ट्रीय मानदंड और मूल्य किसी एक पार्टी की ताकत से निर्धारित नहीं होते। इस बयान के जरिए खरगे ने साफ संकेत दिया है कि कांग्रेस अपने मूल्यों पर दृढ़ है और किसी भी राजनीतिक दबाव में समझौता करने को तैयार नहीं है।

यह विवाद तब उठा था जब कांग्रेस की कुछ सभाओं में वंदे मातरम गाने को लेकर सवाल उठाए गए थे। विरोधी दल ने इसे विवादास्पद बनाने की कोशिश की थी, लेकिन खरगे के बयान के बाद स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भ को समझती है।

वंदे मातरम का ऐतिहासिक महत्व

वंदे मातरम सिर्फ एक गीत नहीं है, बल्कि यह भारतीय राष्ट्रवाद का प्रतीक है। यह गीत बंकिमचंद्र चटर्जी द्वारा रचित है और इसे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान क्रांतिकारियों का मंत्र माना जाता था। गांधीजी और नेहरू जैसे महान नेताओं ने भी इस गीत को गाया है और इसके महत्व को स्वीकार किया है।

वंदे मातरम का अर्थ है मातृभूमि को नमस्कार करना। यह गीत भारत की संस्कृति, परंपरा और राष्ट्रीय भावना का सजीव प्रतिनिधित्व करता है। कांग्रेस ने सदा ही इस गीत को राष्ट्रीय चेतना जगाने का माध्यम माना है। खरगे के हवाले से यह स्पष्ट होता है कि कांग्रेस इसी परंपरा को आगे बढ़ा रही है।

भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में वंदे मातरम की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। जब भारत पर ब्रिटिश राज था, तब इस गीत ने लाखों देशवासियों के दिलों में स्वतंत्रता की चाह जगाई थी। महात्मा गांधी स्वयं इस गीत की मान्यता देते थे और इसे राष्ट्रीय एकता का प्रतीक मानते थे। पंडित नेहरू भी वंदे मातरम को भारतीय राष्ट्रवाद का अभिन्न अंग मानते थे।

खरगे का पक्ष और कांग्रेस की परंपरा

मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने बयान में कांग्रेस की 90 साल पुरानी परंपरा का जिक्र किया है। यह परंपरा कांग्रेस को भारतीय राजनीति का सबसे पुराना दल बनाती है। खरगे का तर्क है कि इतने लंबे इतिहास में जो मूल्य और सिद्धांत कांग्रेस ने अपनाए हैं, उन्हें किसी राजनीतिक दबाव में नहीं बदला जा सकता।

कांग्रेस की परंपरा में राष्ट्रीय एकता, धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय के मूल्य शामिल हैं। वंदे मातरम गीत इन्हीं मूल्यों का प्रतीक है। खरगे के कथन से यह स्पष्ट होता है कि कांग्रेस अपने मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध है और किसी भी राजनीतिक विरोध के बावजूद इन्हें छोड़ने को तैयार नहीं है।

खरगे का यह कथन भी महत्वपूर्ण है कि राष्ट्रीय मानदंड किसी एक सरकार या पार्टी के कहने भर से नहीं बदल जाते। यह एक संवैधानिक और लोकतांत्रिक दृष्टिकोण है जो भारत के संविधान के मूल्यों के अनुरूप है। भारत एक लोकतांत्रिक राष्ट्र है जहां राष्ट्रीय सहमति और वैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से निर्णय लिए जाते हैं।

विवाद के पीछे की राजनीति

वंदे मातरम को लेकर उठने वाला विवाद सिर्फ एक गीत का मामला नहीं है, बल्कि यह एक राजनीतिक मुद्दा बन गया है। विभिन्न पार्टियों ने इसे अपने राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की है। कुछ पार्टियां इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़ने की कोशिश कर रही हैं, जबकि अन्य इसे राष्ट्रीयता के सवाल के रूप में प्रस्तुत कर रही हैं।

इस विवाद में जो असली बात है, वह है राष्ट्रीय प्रतीकों और परंपराओं पर भारतीय राजनीति का नियंत्रण। हर दल अपने को सबसे अधिक राष्ट्रवादी साबित करना चाहता है। लेकिन खरगे का बयान इस राजनीति को एक अलग ही आयाम देता है। वे कहते हैं कि राष्ट्रवाद किसी एक पार्टी की बपौती नहीं है, बल्कि यह सभी भारतीयों के लिए एक साझा मूल्य है।

खरगे के इस बयान का महत्व यह भी है कि यह भारतीय राजनीति में एकता और सहमति की बात करता है। वे कहते हैं कि गांधी-नेहरू भी यही गीत गाते थे, जिसका अर्थ है कि यह सभी राष्ट्रवादियों का गीत है, न कि किसी एक पार्टी का। यह एक बहुत ही मजबूत तर्क है जो विवाद को एक नए संदर्भ में रखता है।

कांग्रेस अध्यक्ष का यह साहसिक बयान दिखाता है कि पार्टी अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को समझती है और उस पर गर्व महसूस करती है। वंदे मातरम न केवल एक गीत है, बल्कि भारतीय राष्ट्रीयता की आत्मा है। खरगे का कथन इसी आत्मा की रक्षा का एक प्रयास है।