🔴 ब्रेकिंग
रांची छात्रों का हाई कोर्ट में विरोध, सीएम का पुतला फूंकेंगे|बक्करवाला एनकाउंटर: भाऊ गैंग के दो शूटर गिरफ्तार|आज की टॉप न्यूज: सीमा सुरक्षा और खाप समाचार|गोविंदा दूसरी शादी करने वाले थे: सुनीता आहूजा का खुलासा|पाकिस्तान से खतरा, चीन से असली टक्कर: नरवणे|यूपी शहीद परिवार छात्राओं को स्कूटी योजना|हरियाणा खाप लिव-इन रिलेशन के खिलाफ लव मैरिज समर्थक|ईरान पर अमेरिका के कड़े प्रतिबंध और चीन की भूमिका|प्याज का रस से बालों का झड़ना रोकें – जावेद हबीब का नुस्खा|UP में 9 IPS अफसरों का बड़ा तबादला, 7 जिलों के SP-SSP बदले|रांची छात्रों का हाई कोर्ट में विरोध, सीएम का पुतला फूंकेंगे|बक्करवाला एनकाउंटर: भाऊ गैंग के दो शूटर गिरफ्तार|आज की टॉप न्यूज: सीमा सुरक्षा और खाप समाचार|गोविंदा दूसरी शादी करने वाले थे: सुनीता आहूजा का खुलासा|पाकिस्तान से खतरा, चीन से असली टक्कर: नरवणे|यूपी शहीद परिवार छात्राओं को स्कूटी योजना|हरियाणा खाप लिव-इन रिलेशन के खिलाफ लव मैरिज समर्थक|ईरान पर अमेरिका के कड़े प्रतिबंध और चीन की भूमिका|प्याज का रस से बालों का झड़ना रोकें – जावेद हबीब का नुस्खा|UP में 9 IPS अफसरों का बड़ा तबादला, 7 जिलों के SP-SSP बदले|
Saturday, 03 October 2026
समाचार

बंगाल में 90 लाख वोटर लिस्ट से बाहर, EC का डेटा जारी

author
Komal
संवाददाता
📅 07 April 2026, 6:03 PM ⏱ 1 मिनट 👁 1.2K views
बंगाल में 90 लाख वोटर लिस्ट से बाहर, EC का डेटा जारी
📷 Aaj Tak

बंगाल में 90 लाख वोटरों के नाम काटे गए, चुनाव आयोग ने जारी किया पूरा डेटा

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ी खबर सामने आई है। भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने राज्य की SIR (Summary Revision of Electoral Rolls) प्रक्रिया के तहत अब तक कुल 90.66 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाने की जानकारी दी है। यह एक ऐतिहासिक कदम है क्योंकि आयोग ने पहली बार जिलेवार तरीके से नाम जोड़ने और हटाने का विस्तृत डेटा सार्वजनिक किया है।

चुनाव आयोग के इस फैसले से राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है। विशेष रूप से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे पर सवाल उठा रही है। आयोग का कहना है कि यह कदम मतदाता सूची की पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए उठाया गया है।

बंगाल में 90 लाख वोटर लिस्ट से बाहर, EC का डेटा जारी

SIR प्रक्रिया में 60 लाख मामले अभी भी विचाराधीन

चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, SIR प्रक्रिया के तहत अभी भी 60 लाख से अधिक मामले विचाराधीन हैं। यह संख्या दर्शाती है कि मतदाता सूची की सफाई की प्रक्रिया अभी भी जारी है और आने वाले दिनों में और भी नाम हटाए जा सकते हैं।

SIR प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य डुप्लिकेट वोटरों, मृत व्यक्तियों और गैर-मौजूद मतदाताओं के नाम को वोटर लिस्ट से हटाना है। इस प्रक्रिया में नए पात्र मतदाताओं को भी सूची में जोड़ा जाता है। चुनाव आयोग का दावा है कि यह कार्य निष्पक्ष तरीके से किया जा रहा है और किसी भी राजनीतिक पार्टी का इसमें हस्तक्षेप नहीं है।

जिलेवार डेटा से मिली पारदर्शिता

पहली बार चुनाव आयोग ने जिलेवार तरीके से मतदाता सूची में बदलाव का डेटा जारी किया है। इससे यह पता चलता है कि किस जिले में कितने नाम जोड़े गए हैं और कितने हटाए गए हैं। यह कदम पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

| जिला प्रकार | नाम हटाए गए | विचाराधीन मामले | कुल प्रभावित |

-------------------------------------------------------
शहरी जिले45 लाख (अनुमानित)30 लाख (अनुमानित)75 लाख
ग्रामीण जिले45.66 लाख (अनुमानित)30 लाख (अनुमानित)75.66 लाख
कुल90.66 लाख60 लाख1.5 करोड़

इस डेटा से यह स्पष्ट होता है कि पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में व्यापक सफाई का काम चल रहा है। आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया आने वाले चुनावों में मतदान की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को बढ़ाएगी।

राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया

इस मुद्दे पर पश्चिम बंगाल की विभिन्न राजनीतिक पार्टियों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं। तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि यह कार्य राजनीतिक रूप से प्रेरित है और इसका मकसद विशिष्ट समुदायों के मतदाताओं को निशाना बनाना है।

वहीं दूसरी ओर, भाजपा और कांग्रेस जैसी विपक्षी पार्टियों का कहना है कि यह कदम लोकतंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में सही है। उनका मानना है कि फर्जी मतदाताओं की उपस्थिति से चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से कानूनी और संवैधानिक प्रावधानों के तहत की जा रही है। आयोग के अधिकारियों का कहना है कि जिन लोगों के नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं, वे अपील कर सकते हैं और उनकी समस्या का समाधान किया जाएगा।

आगे की राह और चुनौतियां

SIR प्रक्रिया की समाप्ति के साथ पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में काफी बदलाव आने की संभावना है। यह बदलाव आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों और विधानसभा चुनावों पर भी प्रभाव डाल सकता है।

चुनाव आयोग के सामने अब मुख्य चुनौती यह है कि वह इस पूरी प्रक्रिया को निष्पक्ष तरीके से पूरा करे और सभी राजनीतिक दलों का भरोसा बनाए रखे। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी वास्तविक मतदाता इस प्रक्रिया में अपना हक न खोए।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारतीय चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। अगर यह प्रक्रिया सफल रहती है, तो इसे देश के अन्य राज्यों में भी लागू किया जा सकता है।

अभी तक की स्थिति के अनुसार, चुनाव आयोग ने अपनी प्रक्रिया जारी रखने का संकेत दिया है। आने वाले हफ्तों में विचाराधीन 60 लाख मामलों पर भी फैसला आने की उम्मीद है, जिससे पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची की तस्वीर और भी स्पष्ट हो जाएगी।