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Tuesday, 18 August 2026
विश्व

अफगानिस्तान का ब्लैक संडे, पाकिस्तान के हमलों में 34 की मौत

author
Komal
संवाददाता
📅 29 June 2026, 7:46 AM ⏱ 1 मिनट 👁 344 views
अफगानिस्तान का ब्लैक संडे, पाकिस्तान के हमलों में 34 की मौत
📷 aarpaarkhabar.com

अफगानिस्तान के लिए रविवार की रात एक काली रात साबित हुई है। पाकिस्तान की सेना ने अफगानिस्तान के दक्षिणी इलाकों में भीषण हवाई हमले किए हैं, जिसमें तीस से ज्यादा मासूम नागरिकों की जान चली गई है। यह घटना दक्षिण एशिया के इस संघर्षग्रस्त क्षेत्र में एक बार फिर से शांति के प्रयासों पर सवाल खड़े कर रही है।

पाकिस्तान के हमलों की तकलीफ भरी कहानी

पाकिस्तान की सेना ने अफगानिस्तान के पाकतिका और पाकतिया प्रांत में रविवार की रात बेहद संवेदनशील इलाकों में हमले किए हैं। इन प्रांतों में बसे आम नागरिकों का जीवन हवाई हमलों की चपेट में आ गया। अनुमान के अनुसार इन हमलों में 34 से भी ज्यादा आम आदमी, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं, की मृत्यु हो गई है। इसके अलावा 40 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं और अस्पतालों में भर्ती हैं।

यह घटना विशेष रूप से परेशानी भरी इसलिए है क्योंकि पाकतिका प्रांत के समकानी जिले के मांडोखेल इलाके में बिस्मिल्लाह जान के घर पर पहला हमला किया गया। जब स्थानीय लोग और बचाव दल घायलों को निकालने के लिए वहां पहुंचे, तब पाकिस्तानी सेना ने दोबारा गोलीबारी की। इस रणनीति का उपयोग आमतौर पर अधिकतम नुकसान पहुंचाने के लिए किया जाता है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया

इस घटना के बाद अफगानिस्तान सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी निंदा की है। अफगान नेताओं का कहना है कि ये हमले मानवता के खिलाफ अपराध हैं और इनका कोई जायज कारण नहीं है। अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी किया है जिसमें कहा गया है कि पाकिस्तान की ये कार्रवाई क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ा रही है।

यह घटना उस समय और भी गंभीर दिख रही है जब अफगानिस्तान पहले ही भारी मानवीय संकट का सामना कर रहा है। लाखों लोग विस्थापित हैं, भुखमरी के कगार पर हैं और बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। ऐसे में ये हवाई हमले आम जनता के लिए एक और बड़ी मुसीबत लेकर आए हैं।

सीमावर्ती क्षेत्र में तनाव का सिलसिला

यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में सैन्य कार्रवाई की है। इस क्षेत्र में दोनों देशों के बीच तनाव बना रहता है। पाकिस्तान का दावा है कि अफगानिस्तान में बैठे आतंकवादी संगठन पाकिस्तान के अंदर हमले करते हैं, इसलिए पाकिस्तान अपनी सुरक्षा के लिए ये कदम उठाता है।

हालांकि, अफगानिस्तान के अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों का मानना है कि ये हमले आम नागरिकों को निशाना बना रहे हैं। मानवाधिकार संगठन बार-बार इन हमलों की जांच की मांग कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न अंगों ने भी इन घटनाओं पर चिंता व्यक्त की है।

सीमावर्ती इलाकों में रहने वाली आबादी इस तनाव का सबसे ज्यादा शिकार होती है। घर, खेत, पशु और कभी-कभी परिवार के सदस्य भी खो जाते हैं। बच्चों का भविष्य अनिश्चित रहता है और महिलाओं को विशेष मुसीबतों का सामना करना पड़ता है।

इस रविवार की काली रात अफगानिस्तान के इतिहास में एक और दर्दभरा पन्ना जोड़ गई है। जब तक दोनों देशों के बीच बातचीत और सुलह-समझौते का रास्ता नहीं खुलता, तब तक ऐसी घटनाएं होती रहेंगी। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस मामले में अधिक सक्रिय होने की जरूरत है ताकि आम जनता की जान-माल की रक्षा हो सके।

पाकिस्तान सरकार को अपनी सुरक्षा नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए और अफगानिस्तान को भी आतंकवादी संगठनों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। दोनों देशों को संयुक्त प्रयास करके एक स्थायी समाधान निकालना चाहिए। क्षेत्र में शांति स्थापित करना ही सभी के लिए बेहतर है।