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Tuesday, 18 August 2026
टेक

AI से होगी छंटनी? 99% बॉस ने किया खुलासा

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Komal
संवाददाता
📅 25 June 2026, 7:46 AM ⏱ 1 मिनट 👁 538 views
AI से होगी छंटनी? 99% बॉस ने किया खुलासा
📷 aarpaarkhabar.com

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दौर तेजी से बढ़ रहा है और इसके साथ ही नौकरियों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। एक नए सर्वे में पता चला है कि लगभग 99 फीसदी कंपनियों के बॉस यह मानते हैं कि आने वाले समय में एआई की वजह से कर्मचारियों की बड़ी छंटनी हो सकती है। यह खबर सुनकर नौकरीपेशा लोगों में चिंता का माहौल बढ़ गया है।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस छंटनी का सबसे ज्यादा असर जूनियर कर्मचारियों पर पड़ने वाला है। कंपनियां अब नए कर्मचारियों की भर्ती करने की जगह पुरानी टीम को एआई से बदल रही हैं। यह संकट केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनियाभर में देखा जा रहा है।

एआई की वजह से रोजगार संकट का सच

पिछले एक साल के आंकड़ों को देखा जाए तो स्थिति बहुत ही चिंताजनक है। जहां 2022 में केवल 17 फीसदी कंपनियों ने जूनियर पदों में कटौती की थी, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 43 फीसदी हो गई है। यह लगभग ढाई गुना अधिक बढ़ोतरी है जो कि बेहद खतरनाक संकेत देती है।

कंपनियों के अधिकारियों का मानना है कि एआई के जरिए वही काम आसानी से हो सकता है जो पहले पांच-दस कर्मचारियों से करवाया जाता था। इसलिए व्यावसायिक दृष्टिकोण से नए कर्मचारियों की भर्ती करना उनके लिए फायदेमंद नहीं रह गया है। नतीजा यह है कि जूनियर लेवल की नौकरियां तेजी से खत्म हो रही हैं।

एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि यह ट्रेंड केवल बड़ी तकनीकी कंपनियों तक सीमित नहीं है। अब तो बैंकिंग, एक्सचेंज, खुदरा व्यापार और यहां तक कि मीडिया सेक्टर में भी एआई का इस्तेमाल बढ़ रहा है। हर जगह नई नौकरियां घट रही हैं और पुरानी नौकरियां खतरे में हैं।

किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा खतरा है?

जब बात आती है किस सेक्टर में सबसे ज्यादा छंटनी का खतरा है, तो सॉफ्टवेयर और आईटी इंडस्ट्री सबसे आगे है। यहां एआई का सीधा असर देखा जा रहा है। डेटा एंट्री, कोडिंग, कंटेंट क्रिएशन और डिजाइनिंग जैसे काम अब एआई के जरिए बिना मानवीय हस्तक्षेप के हो सकते हैं।

इसके अलावा बैंकिंग सेक्टर में भी बहुत बदलाव आ रहा है। कस्टमर सर्विस, डेटा प्रोसेसिंग और अकाउंटिंग जैसे काम अब चैटबॉट और एआई सॉफ्टवेयर के जरिए संभव हो गए हैं। कॉल सेंटर इंडस्ट्री तो पहले से ही बहुत प्रभावित है।

खुदरा व्यापार में भी एआई का प्रभाव दिख रहा है। स्टोर प्रबंधन, इनवेंटरी ट्रैकिंग और ग्राहक सेवा सब कुछ अब ऑटोमेटेड हो रहा है। मीडिया और न्यूज इंडस्ट्री में भी कुछ समाचार अब एआई से बनाए जा रहे हैं।

हालांकि, सर्विस सेक्टर, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और कुछ सृजनात्मक क्षेत्रों में अभी भी मानवीय हस्तक्षेप की जरूरत है। लेकिन समय के साथ यह भी बदल सकता है।

युवाओं के लिए क्या है समाधान?

इस संकट के दौर में युवाओं को अपने कौशल को अपडेट करना बहुत जरूरी है। केवल बेसिक काम जानने वाले लोगों की मांग घटेगी, लेकिन जो लोग एआई के साथ काम कर सकते हैं, उनकी मांग बढ़ेगी।

युवाओं को चाहिए कि वे एआई, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस और अन्य उन्नत तकनीकों में निपुणता हासिल करें। साथ ही, क्रिएटिविटी, कम्युनिकेशन स्किल्स और लीडरशिप जैसी मानवीय क्षमताओं को भी विकसित करना चाहिए क्योंकि ये एआई से नहीं सीख सकता।

पढ़ाई के साथ-साथ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग भी जरूरी है। ऑनलाइन कोर्सेस, सर्टिफिकेशन प्रोग्राम और इंटर्नशिप के जरिए अपने कौशल को निखारना चाहिए।

यह एक चुनौतीपूर्ण समय है, लेकिन संकट के साथ अवसर भी हैं। जो लोग एआई को अपनाएंगे और अपने आप को इसके साथ ढाल लेंगे, वही आने वाले दिनों में सफल होंगे। सरकार, कंपनियों और शैक्षणिक संस्थानों को भी इस दिशा में काम करना चाहिए ताकि यह संक्रमण काल सुचारु तरीके से निकल सके।