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Thursday, 05 November 2026
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एआई से सुरक्षित पेशे की पहचान करेगी सरकार

पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार एआई से प्रभावित न होने वाले पेशों की पहचान करेगी और इंसानों की कार्यकुशलता बढ़ाने में मदद करेगी।

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Komal
संवाददाता
📅 24 October 2026, 7:45 AM ⏱ 1 मिनट 👁 341 views
एआई से सुरक्षित पेशे की पहचान करेगी सरकार
📷 aarpaarkhabar.com

कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई का विकास तेजी से हो रहा है। इससे कई चिंताएं भी पैदा हुई हैं कि आने वाले दिनों में रोजगार पर क्या असर पड़ेगा। लेकिन भारत सरकार इस मामले पर सक्रिय हो गई है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बताया है कि सरकार उन पेशों की पहचान करेगी जो एआई से प्रभावित नहीं होंगे। साथ ही यह भी कहा गया है कि एआई की मदद से इंसानों की कार्यकुशलता को बढ़ाया जा सकता है।

गोयल ने स्पष्ट किया है कि एआई का मकसद लोगों की नौकरी छीनना नहीं है। बल्कि यह एक ऐसा माध्यम है जो मनुष्य के काम को आसान बना सकता है। जब लोग एआई के साथ काम करेंगे तो उनकी उत्पादकता में इजाफा होगा। इससे न केवल व्यक्ति को फायदा मिलेगा बल्कि पूरे देश की अर्थव्यवस्था को भी लाभ पहुंचेगा।

सरकार की तैयारी और योजना

भारतीय सरकार ने इस दिशा में काम करना शुरू कर दिया है। विभिन्न मंत्रालयों को निर्देश दिए गए हैं कि वे एआई से संबंधित नीतियों को तैयार करें। शिक्षा मंत्रालय को कहा गया है कि वह शिक्षा में एआई का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करे। साथ ही कौशल विकास पर भी खास जोर दिया जा रहा है। सरकार मानती है कि भविष्य की तैयारी के लिए लोगों को नए कौशल सिखाने होंगे।

पीयूष गोयल के मुताबिक सरकार ने विभिन्न विभागों को यह जिम्मेदारी दी है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में उन नौकरियों की पहचान करें जो एआई से सुरक्षित हैं। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि किन पेशों में एआई को एकीकृत करने से लोगों की दक्षता बढ़ेगी। यह एक व्यापक दृष्टिकोण है जो भविष्य के लिए भारत को तैयार करेगा।

एआई और मानव कौशल का संयोजन

मंत्री ने जोर देकर कहा है कि एआई और इंसान दोनों को मिलकर काम करना होगा। कुछ ऐसी नौकरियां हैं जहां मानवीय स्पर्श अपरिहार्य है। उदाहरण के लिए चिकित्सा क्षेत्र में डॉक्टर, शिक्षा में शिक्षक, और सामाजिक सेवाओं में कार्यकर्ता ये सभी भूमिकाएं हमेशा मानव हस्तक्षेप की मांग करेंगी। एआई यहां सहायक की भूमिका निभा सकता है लेकिन मनुष्य को पूरी तरह बदल नहीं सकता।

गोयल के अनुसार कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां एआई को मानव कौशल के साथ जोड़ने से अद्भुत परिणाम मिल सकते हैं। उदाहरण के लिए किसान एआई का इस्तेमाल करके मिट्टी की गुणवत्ता जान सकते हैं और सही समय पर सही फसल उगा सकते हैं। डिजिटल मार्केटिंग में भी एआई डेटा विश्लेषण में मदद कर सकता है जबकि मनुष्य रचनात्मक सोच प्रदान करता है।

भारत की रणनीति और भविष्य की चुनौती

भारत को इस नई तकनीकी क्रांति में आगे बढ़ने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने होंगे। पहली चीज है शिक्षा में सुधार। स्कूलों और कॉलेजों में एआई संबंधित विषय पढ़ाए जाने चाहिए। दूसरा है कौशल विकास कार्यक्रमों को मजबूत करना ताकि लोग नए दक्षताएं सीख सकें। तीसरा महत्वपूर्ण पहलू है एआई के नैतिक इस्तेमाल पर ध्यान देना।

गोयल ने कहा है कि भारत एआई को लेकर एक सकारात्मक दृष्टिकोण अपना रहा है। हम इसे एक अवसर के रूप में देख रहे हैं न कि एक खतरे के रूप में। लेकिन हमें सतर्क भी रहना होगा। एआई का गलत इस्तेमाल नुकसानदेह हो सकता है। इसलिए सरकार ने नियमन के नियमों पर काम करना शुरू कर दिया है।

भारत की यह रणनीति अन्य देशों से अलग है। कई देश एआई के आने से घबराए हुए हैं। लेकिन भारत इसे अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करना चाहता है। देश के विकास में एआई महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर बना सकता है, शिक्षा को और सुलभ बना सकता है और अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकता है।

अंत में पीयूष गोयल का संदेश यह है कि एआई आने वाले समय की जरूरत है। लोगों को इससे नहीं घबराना चाहिए बल्कि इसे समझना और सीखना चाहिए। सरकार लोगों को इस संक्रमण में मदद करने के लिए तैयार है। विभिन्न योजनाएं और कार्यक्रमों के जरिए लोगों को नई दक्षताएं सिखाई जाएंगी। इस तरह भारत न केवल एआई के साथ तालमेल बैठाएगा बल्कि इसका सर्वोत्तम लाभ उठाएगा।