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Thursday, 21 May 2026
समाचार

अक्षय तृतीया पर मालव्य-गजकेसरी योग, सिंह-तुला राशि को लाभ

author
Komal
संवाददाता
📅 18 April 2026, 6:02 AM ⏱ 1 मिनट 👁 732 views
अक्षय तृतीया पर मालव्य-गजकेसरी योग, सिंह-तुला राशि को लाभ
📷 aarpaarkhabar.com

अक्षय तृतीया के पवित्र अवसर पर इस बार एक दुर्लभ और शुभ संयोग बनने वाला है। 20 अप्रैल को आने वाली इस तिथि पर शुभ मालव्य राजयोग और गजकेसरी योग का निर्माण होगा। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार यह संयोग बेहद शक्तिशाली और कल्याणकारी माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दिन का महत्व सामान्य अक्षय तृतीया से कहीं अधिक है। खासकर सिंह और तुला राशि के जातकों को इस शुभ योग से अभूतपूर्व लाभ प्राप्त होने वाला है। इन दोनों राशियों के लोगों के लिए यह समय जीवन परिवर्तन लाने वाला साबित हो सकता है।

अक्षय तृतीया का महत्व और इस बार की विशेषता

अक्षय तृतीया को हिंदू धर्म में सबसे पवित्र और शुभ दिनों में से एक माना जाता है। माना जाता है कि इसी दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था और महाभारत की रचना का कार्य भी इसी दिन शुरू हुआ था। इसलिए यह तिथि शुरुआत के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है। लोग इसी दिन नए काम का शुभारंभ करते हैं, व्यापार शुरू करते हैं और महत्वपूर्ण सौदे पूरे करते हैं।

लेकिन इस साल 20 अप्रैल को आने वाली अक्षय तृतीया में कुछ विशेष बात है। इसी दिन मालव्य राजयोग और गजकेसरी योग दोनों का निर्माण होने वाला है। ये दोनों योग अलग-अलग ही अत्यंत महत्वपूर्ण और शुभफलदायक हैं। जब ये दोनों एक साथ बनते हैं तो उनका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। ऐसा संयोग शताब्दी में एक बार ही देखने को मिलता है। इसलिए इस बार की अक्षय तृतीया विशेष महत्व रखती है।

मालव्य राजयोग क्या है और इसके लाभ

मालव्य राजयोग का निर्माण शुक्र ग्रह की विशेष स्थिति से होता है। ज्योतिषशास्त्र में शुक्र को सौभाग्य, समृद्धि, वैभव और सुख-सुविधा का कारक माना जाता है। जब शुक्र अपनी उच्च राशि में या अपने घर में केंद्र या त्रिकोण भाव में स्थित होता है तो मालव्य राजयोग का निर्माण होता है। इस योग से व्यक्ति को भौतिक सुख, धन-दौलत, प्रेम और समाज में सम्मान प्राप्त होता है।

मालव्य राजयोग के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में एक नई चमक आ जाती है। उसे समाज में प्रतिष्ठा मिलती है। व्यापार में उन्नति होती है। विवाह संबंध मजबूत होते हैं। कला, संगीत और साहित्य से जुड़े लोगों को इस योग से विशेष लाभ मिलता है। धन की वृद्धि होती है। परिवार में सुख और शांति बनी रहती है। ये योग व्यक्ति को जीवन के हर क्षेत्र में सफलता दिलाता है।

गजकेसरी योग और उसका असर

गजकेसरी योग बृहस्पति और चंद्रमा की विशेष स्थिति से बनता है। बृहस्पति को ज्ञान, बुद्धि, भाग्य और समृद्धि का कारक माना जाता है। जब चंद्रमा और बृहस्पति एक ही राशि में हों या एक दूसरे के साथ पक्षीय संबंध में हों तो गजकेसरी योग बनता है। इस योग का नाम ही इसकी शक्ति बयां करता है। गज का मतलब हाथी है और केसरी का मतलब शेर। इस प्रकार यह योग व्यक्ति को हाथी जैसी शक्तिशाली और शेर जैसी साहसी बनाता है।

गजकेसरी योग से व्यक्ति में आत्मविश्वास की अभूतपूर्व वृद्धि होती है। बुद्धिमत्ता और ज्ञान का विकास होता है। व्यक्ति अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए दृढ़ संकल्प रखने लगता है। किसी भी कठिन परिस्थिति का सामना करने की क्षमता आ जाती है। राजनीतिक महत्वाकांक्षा पूरी होती है। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ती है। इस योग से व्यक्ति को आर्थिक लाभ भी मिलता है। शिक्षा, स्वास्थ्य और करियर में उन्नति होती है।

सिंह और तुला राशि के जातकों को विशेष लाभ

इस बार की अक्षय तृतीया पर बने मालव्य राजयोग और गजकेसरी योग का सबसे अधिक लाभ सिंह और तुला राशि के जातकों को मिलेगा। सिंह राशि के लोग स्वभाव से ही नेतृत्व के गुणों से संपन्न होते हैं। इस योग के प्रभाव से उनके अंदर का नेतृत्व क्षमता अनंत गुना बढ़ जाएगी। उन्हें सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त हो सकता है। धन और संपत्ति में वृद्धि होगी। प्रेम संबंध मजबूत होंगे।

तुला राशि के लोग संतुलन और न्याय के प्रतीक होते हैं। इस योग से उनकी विवेचना क्षमता और निर्णय लेने की क्षमता में अद्भुत विकास होगा। व्यापार में उन्हें असाधारण सफलता मिलेगी। कानूनी और प्रशासनिक क्षेत्र में उनके प्रयास पूरे होंगे। जीवन साथी से मजबूत रिश्ता बनेगा। बच्चों में भी उन्नति देखने को मिलेगी। समाज में उनकी प्रतिष्ठा बहुत बढ़ेगी।

अक्षय तृतीया के इस शुभ अवसर पर सभी लोगों को पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए, दान-पुण्य करना चाहिए और भगवान से आशीर्वाद मांगना चाहिए। विशेषकर सिंह और तुला राशि के लोगों को इस दिन को खास महत्व देना चाहिए। कोई भी शुभ काम शुरू करने के लिए यह दिन सबसे उपयुक्त है। इस शुभ योग का लाभ लेकर हर कोई अपने जीवन को सफल और समृद्ध बना सकता है।