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Wednesday, 19 August 2026
राजनीति

अंकिता भंडारी केस: BJP विधायक सुरेश राठौर गिरफ्तार

author
Komal
संवाददाता
📅 15 June 2026, 8:45 AM ⏱ 1 मिनट 👁 390 views
अंकिता भंडारी केस: BJP विधायक सुरेश राठौर गिरफ्तार
📷 aarpaarkhabar.com

अंकिता भंडारी केस में नया मोड़: पूर्व विधायक की गिरफ्तारी

उत्तराखंड के देहरादून जिले में अंकिता भंडारी की हत्या के कुख्यात मामले में अब एक नया अध्याय जुड़ गया है। पूर्व बीजेपी विधायक सुरेश राठौर को स्थानीय पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी ऑडियो-वीडियो क्लिप फैलाने के आरोप में की गई है, जिसमें एक प्रभावशाली बीजेपी नेता का नाम इस हत्याकांड से जोड़ा गया था। यह मामला पिछले कई महीनों से सुर्खियों में है और अब पुलिस की जांच इसमें एक और आयाम जुड़ गया है।

अंकिता भंडारी की मौत सितंबर 2022 में हुई थी जब वह एक रिसॉर्ट में काम करती थीं। उसके शव को एक नदी में मिला था। तब से यह मामला राज्य की सबसे संवेदनशील और चर्चित घटनाओं में से एक बना हुआ है। पीड़ित परिवार और आम जनता की ओर से लगातार पूरी सच्चाई सामने आने की मांग की जा रही थी। इसी कड़ी में पुलिस ने सुरेश राठौर को गिरफ्तार करने का फैसला किया है।

सुरेश राठौर उत्तराखंड की राजनीति में एक जाना-माना चेहरा हैं। वह कई बार विधायक रह चुके हैं और बीजेपी से जुड़े हुए हैं। उनके खिलाफ आरोप है कि उन्होंने जानबूझकर ऐसे ऑडियो-वीडियो क्लिप को सोशल मीडिया पर फैलाया जिसमें एक शक्तिशाली बीजेपी नेता का नाम अंकिता भंडारी की मौत से जोड़ा गया था। ये क्लिप समाज में भय और घबराहट का माहौल फैलाने के लिए जिम्मेदार माने जा रहे हैं।

पुलिस की जांच और सबूत

देहरादून पुलिस ने इस मामले में विस्तृत जांच की है। पुलिस को यह साक्ष्य मिले हैं कि सुरेश राठौर के द्वारा जानबूझकर गलत सूचना को प्रसारित किया गया। उनके खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि ये क्लिप इंटरनेट पर तेजी से फैलते गए और लाखों लोगों तक पहुंचे। इससे राजनीतिक माहौल को नुकसान पहुंचा और जनता में विभाजन की स्थिति बनी।

पुलिस ने मोबाइल फोन, कंप्यूटर और अन्य डिजिटल उपकरणों से डिजिटल साक्ष्य एकत्र किए हैं। इन साक्ष्यों से यह स्पष्ट हुआ है कि सुरेश राठौर ने न सिर्फ ये वीडियो अपने आप से बनाए बल्कि इन्हें सोशल मीडिया पर सचेतन रूप से फैलाया। उन्होंने कई दोस्तों और परिचितों को ये क्लिप भेजे और इन्हें सार्वजनिक डोमेन में डाला।

पुलिस प्रवक्ता के अनुसार, ये आरोप साधारण नहीं हैं। यह मामला न सिर्फ झूठी खबर फैलाने का है बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने और किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान देने का भी है। कानून के तहत ऐसे कृत्य गंभीर अपराध माने जाते हैं।

सामाजिक प्रभाव और कानूनी परिणाम

अंकिता भंडारी के मामले ने समाज को गहराई से प्रभावित किया है। युवा महिलाओं की सुरक्षा को लेकर लोगों में चिंता बढ़ गई है। ऐसे में जब किसी राजनेता द्वारा गलत सूचना फैलाई जाती है तो इसका असर कहीं अधिक नुकसानदेह होता है। सुरेश राठौर की गिरफ्तारी इस बात का संकेत है कि पुलिस और न्यायिक प्रणाली ऐसे कृत्यों के विरुद्ध कड़ा रुख अपना रही है।

भारतीय कानून के तहत जानबूझकर झूठी खबर फैलाना, किसी की प्रतिष्ठा को हानि पहुंचाना और सार्वजनिक व्यवस्था को नुकसान देना सभी अपराध हैं। राठौर के खिलाफ आईपीसी की कई धाराएं लागू की गई हैं। कोर्ट में जांच के अगले चरणों के दौरान और अधिक सबूत सामने आने की संभावना है।

यह मामला एक महत्वपूर्ण संदेश भी देता है कि भारत में डिजिटल युग में जिम्मेदारी के साथ सोशल मीडिया का उपयोग करना कितना जरूरी है। किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान देने वाली या गलत सूचना फैलाने वाले क्लिप साझा करना महज एक सामाजिक पाप नहीं बल्कि एक कानूनी अपराध भी है।

सुरेश राठौर की गिरफ्तारी से राजनीतिक हलकों में भी गहरी चर्चा शुरू हुई है। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। कुछ का मानना है कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए, चाहे कोई किसी भी पार्टी से जुड़ा हो। दूसरों का मत है कि सच्चाई तक पहुंचने के लिए ऐसे कदम जरूरी हैं।

अंकिता भंडारी की मां को भी इस गिरफ्तारी से कुछ उम्मीद की किरण दिखी है। उन्होंने कहा है कि उन्हें विश्वास है कि न्यायालय में सभी तथ्य सामने आएंगे और उन्हें न्याय मिलेगा। वह पूरी जांच प्रक्रिया को पारदर्शी रखने की मांग भी कर रहीं हैं।

यह मामला उत्तराखंड की न्याय प्रणाली के लिए एक कसौटी साबित होगा। देश की पूरी नजर देहरादून की पुलिस और कोर्ट पर लगी है। अंकिता भंडारी परिवार को न्याय मिले यह सभी की कामना है। साथ ही यह भी जरूरी है कि जो भी सच में दोषी हो उसे कानून के तहत सजा दी जाए।