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Friday, 05 June 2026
धर्म

अपरा एकादशी व्रत: मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व

author
Komal
संवाददाता
📅 13 May 2026, 6:46 AM ⏱ 1 मिनट 👁 557 views
अपरा एकादशी व्रत: मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व
📷 aarpaarkhabar.com

अपरा एकादशी व्रत धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और हिंदू धर्म में इसका विशेष स्थान है। अपरा एकादशी के दिन लाखों श्रद्धालु व्रत रखते हैं और विधि-विधान से श्री हरि विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं। माना जाता है कि इस व्रत को करने से सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है और स्वर्ग लोक की प्राप्ति होती है। व्रत रखने वाले लोगों की सभी मनोकामनाएं जल्दी पूरी होती हैं।

अपरा एकादशी को पद्म पुराण में भी विशेष महत्व दिया गया है। इस व्रत की कथा के अनुसार, जो भी इस दिन श्रद्धा और भक्ति से भगवान विष्णु को समर्पित होता है, उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। यह व्रत आमतौर पर फरवरी-मार्च के महीने में आता है। इस वर्ष अपरा एकादशी 2026 में किस तारीख को आएगी, इसके बारे में सटीक जानकारी हर किसी को पता होनी चाहिए।

अपरा एकादशी का शुभ मुहूर्त और तारीख

अपरा एकादशी का व्रत हर वर्ष फरवरी-मार्च के महीने में आता है। इस बार 2026 में अपरा एकादशी 22 फरवरी को मनाई जाएगी। एकादशी तिथि की शुरुआत 21 फरवरी को दोपहर 12 बजकर 25 मिनट से होगी और यह 22 फरवरी को दोपहर 2 बजकर 40 मिनट तक रहेगी। इसलिए व्रत 22 फरवरी को ही रखना चाहिए।

व्रत रखने वाले लोगों को सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लेना चाहिए। व्रत की शुरुआत सूर्योदय के समय से ही कर देनी चाहिए। जो लोग निर्जल व्रत रखते हैं, उन्हें पूरे दिन पानी नहीं पीना चाहिए। हालांकि, फलों और दूध का सेवन किया जा सकता है। व्रत को तोड़ने का सर्वश्रेष्ठ समय अगले दिन सूर्योदय के बाद है।

पूजन विधि और नियम

अपरा एकादशी के दिन पूजन विधि को सही तरीके से करना चाहिए। सबसे पहले अपने घर को साफ करके पूजा स्थल को तैयार किया जाता है। पूजा के लिए एक मंदिर या पूजा घर में भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर को रखा जाता है। मां लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है क्योंकि वह भगवान विष्णु की शक्ति हैं।

पूजा शुरू करने से पहले व्रत रखने वाले व्यक्ति को स्नान कर लेना चाहिए। फिर भगवान को गंध, पुष्प, अगरबत्ती, दीप और फलों का भोग लगाया जाता है। व्रत के दिन तुलसी के पत्तों को विशेष महत्व दिया जाता है। तुलसी की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। भगवान विष्णु को नैवेद्य के रूप में खीर, हलवा, पूरी जैसे सात्विक भोजन का प्रसाद लगाया जाता है।

व्रत के दिन व्रत कथा को सुना और सुनाया जाता है। अपरा एकादशी की कथा का बड़ा महत्व है। इस कथा के अनुसार, एक बार भगवान विष्णु ने नारद मुनि से कहा था कि जो भी अपरा एकादशी का व्रत करेगा, वह सभी पापों से मुक्त हो जाएगा। भगवान ने यह भी कहा था कि इस व्रत से सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं और मन की शांति मिलती है।

अपरा एकादशी के धार्मिक लाभ और महत्व

अपरा एकादशी का व्रत रखने से कई धार्मिक लाभ मिलते हैं। माना जाता है कि इस व्रत से व्यक्ति के सभी पाप धुल जाते हैं। जो लोग पिछले जन्मों के कारण परेशानियों का सामना कर रहे हैं, उन्हें इस व्रत से मुक्ति मिलती है। इस व्रत को करने वाले व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

अपरा एकादशी का व्रत करने से संतान प्राप्ति में सहायता मिलती है। जो दंपति संतान के लिए प्रतीक्षा में हैं, वे इस व्रत को करके अपनी मनोकामना पूरी कर सकते हैं। इसके अलावा, व्यावसायिक सफलता और आर्थिक लाभ भी इस व्रत से प्राप्त होते हैं।

व्रत रखने से व्यक्ति की आध्यात्मिक शक्ति बढ़ती है और मन को शांति मिलती है। व्रत करते समय नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए और केवल भगवान के प्रति अपनी भक्ति में लीन रहना चाहिए। व्रत के दिन क्रोध, लोभ और ईर्ष्या जैसी भावनाओं से दूर रहना चाहिए।

व्रत रखने वाले व्यक्ति को अपने परिवार के साथ प्रेम और सद्भावना से रहना चाहिए। किसी को कष्ट देना या गलत काम करना व्रत के फलों को नष्ट कर देता है। इसलिए व्रत के दिन और उसके आसपास के दिनों में अपने आचरण को शुद्ध रखना चाहिए।

अपरा एकादशी का व्रत करते समय सादा भोजन करना चाहिए। मसाले और तेल-घी युक्त भोजन से बचना चाहिए। फल, दूध, दही और खीर खा सकते हैं। कुछ लोग पूरी तरह निर्जल व्रत भी रखते हैं, जो अधिक पवित्र माना जाता है। व्रत को तोड़ते समय सात्विक भोजन का सेवन करना चाहिए।

अपरा एकादशी का यह व्रत पूरे भारत में बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है। मंदिरों में इस दिन विशेष भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित प्रत्येक मंदिर में इस दिन भीड़ देखी जाती है। व्रत रखने वाले भक्त पूरे दिन भगवान के नाम का स्मरण करते हैं और उनकी भक्ति में लीन रहते हैं।

इस व्रत को करने का मुख्य उद्देश्य अपने जीवन में आध्यात्मिकता को लाना और भगवान से जुड़ाव महसूस करना है। हर व्यक्ति को कम से कम एक बार अपरा एकादशी का व्रत जरूर करना चाहिए। यह व्रत न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है।