अप्रैल-जुलाई शादी मुहूर्त: 4 ग्रहों का शुभ प्रभाव
खरमास की समाप्ति के बाद देश भर में शादी-विवाह का मौसम शुरू होने वाला है। धार्मिक दृष्टिकोण से यह समय अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसी अवधि में विवाह संस्कार संपन्न करने की परंपरा रही है। ज्योतिषाचार्य पंडित संजय शर्मा के अनुसार, 15 अप्रैल से लेकर जुलाई के अंत तक का समय विवाह के लिए अत्यंत शुभ माना जा रहा है। इसका प्रमुख कारण है कि इस अवधि में चार प्रभावशाली ग्रहों का अनुकूल प्रभाव रहने वाला है जो विवाह बंधन को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
विवाह का अनुष्ठान हिंदू संस्कृति में सबसे महत्वपूर्ण संस्कार माना जाता है। प्राचीन काल से ही यह मान्यता रही है कि यदि विवाह किसी शुभ मुहूर्त में संपन्न किया जाए तो वह विवाह दीर्घकालीन सुख-समृद्धि का कारण बनता है। खरमास यानी चैत्र मास की पूर्णिमा से लेकर वैशाख मास की पूर्णिमा तक का समय परंपरागत रूप से विवाह आयोजन के लिए अशुभ माना जाता है। लेकिन इस साल खरमास की समाप्ति के साथ ही ग्रहों की स्थिति ऐसी बन रही है जो आने वाली पीढ़ी के लिए विशेष वरदान साबित होने वाली है।
अप्रैल-मई में होंगे सर्वाधिक शुभ मुहूर्त
पंडित संजय शर्मा ने बताया कि अप्रैल और मई के महीनों में विवाह के लिए सबसे ज्यादा शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। इस अवधि में बृहस्पति ग्रह अपनी उच्च स्थिति में होगा जो विवाह के लिए बेहद शुभ माना जाता है। बृहस्पति को देवताओं का गुरु माना जाता है और इसका प्रभाव परिवार की समृद्धि और सुख-शांति को बढ़ाता है। इसके साथ ही चंद्रमा की स्थिति भी अनुकूल रहेगी जिससे दाम्पत्य जीवन में प्रेम और समझ में वृद्धि होती है।
अप्रैल के महीने में विशेषकर 15 अप्रैल के बाद से लेकर 30 अप्रैल तक कई महत्वपूर्ण शुभ तारीखें आने वाली हैं। इन तारीखों पर विवाह संस्कार संपन्न करने से पति-पत्नी के बीच गहरा प्रेम और विश्वास कायम रहता है। मई के महीने में भी लगातार शुभ मुहूर्त बने रहेंगे जब तक कि बृहस्पति की गति सामान्य न हो जाए। इसलिए जिन परिवारों के यहां विवाह के योजनाएं लंबित हैं, वे अप्रैल-मई को सर्वश्रेष्ठ समय मान सकते हैं।
जून-जुलाई में भी रहेंगे अनुकूल ग्रह
जून और जुलाई के महीने भी विवाह के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं। इन महीनों में वीनस यानी शुक्र ग्रह का प्रभाव बेहद सकारात्मक रहेगा। शुक्र ग्रह को विवाह, प्रेम और सौंदर्य का ग्रह माना जाता है। शुक्र के शुभ प्रभाव में संपन्न विवाह विशेषकर दाम्पत्य जीवन में भौतिक सुख और आर्थिक समृद्धि लाता है। साथ ही मंगल ग्रह भी अपनी सकारात्मक स्थिति में होगा जो शारीरिक स्वास्थ्य और जीवन शक्ति को बढ़ाता है।
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जून के महीने में विशेषकर पहले सप्ताह में कई शुभ मुहूर्त बने रहेंगे। इसी तरह जुलाई में भी विवाह के लिए उपयुक्त तारीखें मिलेंगी। इसका कारण यह है कि इन महीनों में पंचग्रही योग और अन्य शुभ नक्षत्र के संयोग बनेंगे जो विवाह बंधन को मजबूत करेंगे। परिवार की सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाएंगे और नवविवाहित जोड़े को दीर्घायु और सुख का आशीर्वाद देंगे।
चारों ग्रहों का समन्वित प्रभाव
पंडित संजय शर्मा के मतानुसार, इस बार अप्रैल से जुलाई तक जो विशेषता है वह यह है कि बृहस्पति, शुक्र, मंगल और चंद्रमा - ये चारों ग्रह अपनी सकारात्मक स्थिति में एक साथ काम करेंगे। यह योग बहुत दुर्लभ है और आमतौर पर कई वर्षों के अंतराल पर बनता है। इन चारों ग्रहों का समन्वित प्रभाव विवाह के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
बृहस्पति संतान सुख और परिवार की वृद्धि का प्रतीक है, शुक्र प्रेम और सौंदर्य का वाहक है, मंगल शारीरिक शक्ति और साहस को दर्शाता है, जबकि चंद्रमा मन की शांति और भावनात्मक जुड़ाव को सुनिश्चित करता है। इन चारों की एक साथ सकारात्मक स्थिति का अर्थ है कि आने वाले चार महीनों में जो दंपति विवाह बंधन में बंधेंगे, उनका जीवन हर पहलू से सुखी और समृद्ध रहेगा।
इसलिए जिन परिवारों के यहां विवाह की तैयारी चल रही है, वे बेझिझक 15 अप्रैल के बाद के शुभ मुहूर्तों को चुन सकते हैं। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, यह समय न केवल वैदिक दृष्टि से बल्कि वैज्ञानिक कसौटी पर भी शादी आयोजन के लिए उपयुक्त है। खरमास की समाप्ति के साथ ही शहनाइयों की मधुर ध्वनि हर घर में गूंजने लगेगी और नई जोड़ियों के जीवन में खुशियों का बहार आएगी।




