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Thursday, 04 June 2026
राजनीति

असम, केरल, पुडुचेरी चुनाव: वोटिंग शुरू

author
Komal
संवाददाता
📅 09 April 2026, 7:16 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.0K views

असम, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव की वोटिंग आज सुबह सात बजे शुरू हो गई है। देश के इन तीन महत्वपूर्ण राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में आज राजनीतिक महत्व का दिन है। निर्वाचन आयोग ने सुरक्षा के कड़े इंतजामों के साथ लाखों मतदाताओं के लिए सभी व्यवस्थाएं पूरी कर दी हैं। इस चुनाव में कुल 296 सीटों के लिए 1995 उम्मीदवार मैदान में उतरे हैं। यह चुनाव राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए), इंडिया गठबंधन और वामपंथी दलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाला है।

पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव को लेकर मतदाताओं में काफी उत्साह देखा जा रहा है। केंद्र शासित प्रदेश की 30 सीटों के लिए मतदान जारी है। यहां की राजनीति हमेशा से ही रोचक रही है और इस बार भी विभिन्न राजनीतिक दल जोरदार प्रचार करके सत्ता में आने के लिए तैयार हैं। पुडुचेरी में मुख्य रूप से द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके), अन्नाद्रमुक (एडीएमके) और भारतीय जनता पार्टी के बीच सीधी प्रतिस्पर्धा देखी जा रही है।

केरल विधानसभा चुनाव का महत्व अलग ही है। दक्षिण भारत के इस राज्य में 140 सीटों के लिए मतदान चल रहा है। केरल की राजनीति में वामपंथी दलों की परंपरागत मजबूत उपस्थिति रही है। इस बार भी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) और उसके गठबंधन के सामने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस तथा उसके सहयोगी दलों की गंभीर चुनौती है। दोनों गठबंधन ने अपने-अपने प्रचार में जनता के मुद्दों को केंद्र में रखा है। केरल की मतदाता राजनीति पूरे देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

असम में एनडीए की सत्ता की बाजी

असम विधानसभा चुनाव में 126 सीटों के लिए मतदान हो रहा है। असम की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पिछले कुछ सालों में बेहद सशक्त हुई है। भाजपा के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन असम में सत्ता पर काबिज है। वर्तमान मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में भाजपा और उसके गठबंधन पार्टनर्स की मजबूत उपस्थिति है। इस बार एनडीए को असम में अपनी सत्ता बरकरार रखनी है। दूसरी ओर, इंडिया गठबंधन के दलों ने भी जोरदार प्रचार किया है। भाजपा विरोधी शक्तियां असम में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए रणनीति बना रही हैं।

मतदाताओं की भागीदारी और सुरक्षा व्यवस्था

इस चुनाव में मतदाताओं की व्यापक भागीदारी की उम्मीद है। निर्वाचन आयोग ने विभिन्न जिलों में मतदान केंद्रों की स्थापना की है। पोलिंग बूथों पर पर्याप्त पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। महिला मतदाताओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिए विशेष उपाय किए गए हैं। कोविड-19 महामारी के बाद से ही चुनावी प्रक्रिया में स्वच्छता और सुरक्षा के प्रति अधिक सतर्कता दिखाई जा रही है।

मतदान के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) और वीवीपैट (वोटर वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल) का उपयोग किया जा रहा है। ये सभी उपाय चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए किए गए हैं। निर्वाचन आयोग ने मतदान की प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए आधुनिक तकनीकों का प्रयोग किया है।

राजनीतिक दलों की रणनीति और प्रचार

इन तीनों राज्यों में चुनाव की घोषणा के बाद से ही तीव्र प्रचार का दौर चल रहा है। राजनीतिक दलों के नेताओं ने जनता के बीच अपने-अपने विचार रखे हैं। भाजपा ने विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा को केंद्र में रखकर प्रचार किया है। विपक्षी दलों ने सामाजिक न्याय, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और बेरोजगारी के मुद्दों को उजागर किया है। जनता की आकांक्षाएं और चिंताएं इस चुनाव का मूल आधार हैं। युवा वर्ग इस चुनाव में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार दिख रहा है।

चुनाव परिणाम से देश की राजनीतिक दिशा प्रभावित होगी। असम, केरल और पुडुचेरी के परिणाम राष्ट्रीय राजनीति में नई गति ला सकते हैं। यह चुनाव भारतीय लोकतंत्र की मजबूती के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा है। मतदाताओं की व्यापक भागीदारी से ही भारत का लोकतांत्रिक ढांचा सुदृढ़ होगा। इन तीनों राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश की जनता की आवाज ही इस चुनाव का वास्तविक आधार है।