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Saturday, 04 July 2026
स्वास्थ्य

डाइमेथोएट कीटनाशक: भारत में प्रतिबंधित रसायन की बिक्री

author
Komal
संवाददाता
📅 20 June 2026, 6:45 AM ⏱ 1 मिनट 👁 730 views
डाइमेथोएट कीटनाशक: भारत में प्रतिबंधित रसायन की बिक्री
📷 aarpaarkhabar.com

विकसित देशों ने जिस रसायन को खतरनाक मानकर अपने देशों में प्रतिबंधित कर दिया, वही जहरीला पदार्थ भारतीय किसानों के खेतों में बेरोकटोक बिक रहा है। डाइमेथोएट नामक इस कीटनाशक को लेकर भारत में एक बार फिर से गरम बहस शुरू हो गई है। एक नई रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि यूरोपीय संघ, अमेरिका और अन्य विकसित देशों ने इस रसायन पर कठोर प्रतिबंध लगा दिया है, लेकिन भारत में इसका उत्पादन और बिक्री अभी भी जारी है। यह स्थिति भारतीय कृषि, पर्यावरण और जनता के स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन गई है।

डाइमेथोएट क्या है और इसके खतरे

डाइमेथोएट एक ऑर्गनोफॉस्फेट कीटनाशक है जिसका उपयोग कृषि में विभिन्न प्रकार के कीटों को मारने के लिए किया जाता है। यह रसायन कपास, सब्जियों, फलों और अनाज की फसलों पर लगाया जाता है। हालांकि, दशकों के शोध और विश्लेषण के बाद यह पता चला है कि डाइमेथोएट मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है।

इस कीटनाशक के संपर्क में आने से तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचता है। यह कीटनाशक एसिटाइलकोलिनेस्टरेज नामक एंजाइम को बाधित करता है, जिससे शरीर में जहरीले रसायनों का संचय होने लगता है। लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से कैंसर, प्रजनन संबंधी समस्याएं, और न्यूरोलॉजिकल विकार हो सकते हैं। बच्चों के विकास पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

भारतीय किसान और खेतों में काम करने वाले मजदूर सीधे इस जहर के संपर्क में आते हैं। जब ये फसलें थाली में पहुंचती हैं, तो उपभोक्ताओं को भी इसके अवशेष खाने को मिलते हैं। यह एक सामूहिक स्वास्थ्य खतरा है जो धीरे-धीरे पूरे समाज को प्रभावित कर रहा है।

विकसित देशों का रुख और भारत की नीति में अंतर

यूरोपीय संघ ने 2004 में डाइमेथोएट पर प्रतिबंध लगा दिया था। अमेरिका ने भी इसे खतरनाक मानते हुए प्रतिबंधित किया। ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जापान और कनाडा जैसे विकसित देशों ने भी इसी तरह की सावधानियां बरतीं। ये देश अपने नागरिकों के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं और किसी भी संदिग्ध रसायन पर तुरंत कार्रवाई करते हैं।

दूसरी ओर, भारत में यह कीटनाशक अभी भी बिक्री के लिए अनुमोदित है। भारतीय कीटनाशक प्रबंधन बोर्ड ने इसे कुछ शर्तों के साथ मंजूरी दे रखी है। कृषि मंत्रालय का तर्क है कि भारतीय किसानों को सस्ते और प्रभावी कीटनाशकों की जरूरत है। लेकिन यह दलील कमजोर है क्योंकि सुरक्षित विकल्प उपलब्ध हैं।

भारत में कीटनाशकों की नियंत्रक प्रणाली पश्चिमी देशों की तुलना में कहीं अधिक कमजोर है। कृषि रसायनों के आयातकर्ता और निर्माता कंपनियों के पास अत्यधिक प्रभाव है। जब कोई रसायन पश्चिम में प्रतिबंधित होता है, तो वह तुरंत एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे विकासशील देशों में बेचने लगते हैं। भारत इसी सूची में सबसे आगे है।

भारतीय कृषि और जनता पर असर

डाइमेथोएट का दुरुपयोग भारतीय कृषि में एक गंभीर समस्या बन गया है। कई किसान इसे निर्धारित मात्रा से अधिक इस्तेमाल करते हैं क्योंकि उन्हें सही जानकारी और प्रशिक्षण नहीं दिया जाता। फलस्वरूप, सब्जियों, दालों, और अनाज में इस कीटनाशक के अवशेष बहुत अधिक मात्रा में पाए जाते हैं।

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के परीक्षण से यह साफ हो गया है कि बहुत सारी सब्जियों और फलों में डाइमेथोएट की मात्रा अनुमेय सीमा से कहीं अधिक है। छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं, और बुजुर्गों पर इसका असर सबसे ज्यादा पड़ता है। कई स्वास्थ्य शोधकर्ताओं का मानना है कि पिछले दो दशकों में भारत में कैंसर के मामलों में तेजी से वृद्धि इसी तरह के जहरीले रसायनों के उपयोग से संबंधित है।

किसान भी इस स्थिति के सबसे बड़े शिकार हैं। जो लोग रोज इस कीटनाशक को अपने खेतों में छिड़कते हैं, वे विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। पंजाब, महाराष्ट्र, और गुजरात जैसे कृषि प्रधान राज्यों में किसानों में स्वास्थ्य संबंधी विकार बहुत बढ़ गए हैं।

निष्कर्ष

भारत को विकसित देशों का अनुसरण करना चाहिए और डाइमेथोएट सहित अन्य हानिकारक कीटनाशकों पर तुरंत प्रतिबंध लगाना चाहिए। सरकार को किसानों को सुरक्षित और जैविक खेती के विकल्पों की ओर प्रेरित करना चाहिए। जब तक भारत अपनी कृषि नीति को बदलकर जनता के स्वास्थ्य को प्राथमिकता नहीं देता, तब तक यह जहरीला खेल चलता रहेगा। डाइमेथोएट और इसी तरह के अन्य प्रतिबंधित रसायनों को भारत से हटाना अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि एक आवश्यकता है।