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Friday, 05 June 2026
समाचार

भूधर और रमेश रंजक की पर्वत पर चढ़ कर कविता

author
Komal
संवाददाता
📅 29 April 2026, 5:47 AM ⏱ 1 मिनट 👁 390 views
भूधर और रमेश रंजक की पर्वत पर चढ़ कर कविता
📷 aarpaarkhabar.com

आज का शब्द: भूधर और रमेश रंजक की कविता

हिंदी साहित्य जगत में कविता का एक अमूल्य स्थान है। कविता केवल शब्दों का समन्वय नहीं होती, बल्कि यह मानव हृदय की गहरी भावनाओं को व्यक्त करने का एक माध्यम है। आज हम बात करने जा रहे हैं एक ऐसी कविता के बारे में जो हमारे जीवन में प्रेरणा और सशक्तिकरण का संदेश लेकर आती है। यह कविता है "पर्वत पर चढ़ कर" जिसे भूधर और रमेश रंजक ने लिखी है। यह कविता न केवल शब्दों का एक सुंदर संयोजन है, बल्कि यह जीवन के उच्च शिखर को छूने की अभिलाषा को दर्शाती है।

कविता हमारे समाज का एक महत्वपूर्ण अंग रही है। पुराने समय से ही कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज को सजग किया है, लोगों को प्रेरित किया है और उनके मनों में नई ऊर्जा का संचार किया है। भूधर और रमेश रंजक जैसे कवि आज भी इसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उनकी कविता "पर्वत पर चढ़ कर" एक ऐसा उदाहरण है जो युवाओं को अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करती है।

"पर्वत पर चढ़ कर" कविता का शीर्षक ही बहुत कुछ कह देता है। पर्वत चढ़ना मतलब कठिनाइयों का सामना करना, मेहनत करना और अपने सपनों के पीछे भागते रहना। यह कविता हमें सिखाती है कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए हमें पर्वत की तरह ऊंची चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन जब हम ऐसी चुनौतियों का डटकर सामना करते हैं, तब ही हम जीवन के सच्चे आनंद को अनुभव कर पाते हैं।

भूधर और रमेश रंजक ने इस कविता को इस तरीके से लिखा है कि इसके प्रत्येक शब्द पाठकों के हृदय को स्पर्श करते हैं। उनकी भाषा सरल है, लेकिन अर्थ गहरा है। वह अपनी कविता में पर्वत को जीवन के प्रतीक के रूप में दिखाते हैं और बताते हैं कि कैसे हर इंसान को अपने जीवन के पर्वत पर चढ़ना चाहिए। उनकी लेखन शैली इतनी प्रभावशाली है कि पाठक खुद को कविता के साथ जुड़ा हुआ महसूस करता है।

आज के युग में जहां हर कोई आसान रास्तों को ढूंढता है, वहां यह कविता हमें बताती है कि कठिन रास्तों पर चलने में ही सच्ची सार्थकता निहित है। भूधर और रमेश रंजक की यह रचना आधुनिक समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। यह न केवल युवाओं को बल्कि प्रत्येक उम्र के लोगों को प्रेरणा देती है कि वे अपने लक्ष्यों के पीछे भाग सकते हैं।

कविता को अमर उजाला एप के माध्यम से भेजें

अगर आप भी एक कवि हैं और अपनी रचनाओं को दुनिया के सामने लाना चाहते हैं, तो अमर उजाला एप आपके लिए एक बेहतरीन मंच प्रदान करता है। आजकल डिजिटल माध्यम का उपयोग करके अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित करना बहुत आसान हो गया है। अमर उजाला एप के जरिए आप अपनी कविता को सीधे संपादकों और साहित्य प्रेमियों तक पहुंचा सकते हैं।

यह एप विशेष रूप से हिंदी साहित्य को बढ़ावा देने के लिए डिजाइन किया गया है। यहां पर आप कविता, कहानी, लेख और अन्य साहित्यिक रचनाएं अपलोड कर सकते हैं। एप की विशेषता यह है कि यह आपकी रचनाओं को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाता है। आपकी कविता को हजारों लोग पढ़ सकते हैं, उस पर अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं और आपको प्रोत्साहित कर सकते हैं।

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

अमर उजाला एप का उपयोग करना बहुत आसान है। आप इसे अपने स्मार्टफोन पर डाउनलोड कर सकते हैं और कुछ ही मिनटों में शुरुआत कर सकते हैं। एप में एक यूजर-फ्रेंडली इंटरफेस है जो नए और अनुभवी दोनों लेखकों के लिए उपयुक्त है।

जब आप एप पर अपनी कविता सब्मिट करते हैं, तो यह एक सुव्यवस्थित प्रक्रिया से गुजरती है। संपादकीय टीम आपकी रचना की समीक्षा करती है और फिर इसे प्रकाशित करती है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि केवल उच्च गुणवत्ता की रचनाएं ही पाठकों तक पहुंचती हैं।

एप के माध्यम से प्रकाशित होने के बहुत सारे फायदे हैं। पहला तो यह कि आपकी रचना को तुरंत लाखों लोग पढ़ सकते हैं। दूसरा, आप पाठकों से सीधा फीडबैक प्राप्त कर सकते हैं जो आपको बेहतर लेखक बनने में मदद करता है। तीसरा, यदि आपकी कविता वायरल हो जाए तो आप प्रसिद्धि प्राप्त कर सकते हैं और आपके लिए नई संभावनाएं खुल सकती हैं।

अमर उजाला एप साहित्य प्रेमियों और लेखकों के लिए एक परिवार बन गया है। यहां आप न केवल अपनी रचना साझा कर सकते हैं, बल्कि दूसरे रचनाकारों की कविताओं को पढ़कर सीख भी सकते हैं। एप पर साहित्य की विभिन्न विधाएं उपलब्ध हैं जिससे आप अपनी पसंद की रचनाएं खोज सकते हैं।

तो अगर आप भी भूधर और रमेश रंजक जैसे कवियों की तरह अपनी प्रतिभा को दिखाना चाहते हैं, तो आज ही अमर उजाला एप डाउनलोड करें। अपनी कविता को लिखें, इसे सब्मिट करें और साहित्य की दुनिया में अपना नाम दर्ज करवाएं। याद रखें कि हर महान कवि ने कहीं न कहीं से शुरुआत की थी, और आज आपका भी समय आ गया है।