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Saturday, 03 October 2026
विश्व

खामेनेई अंतिम संस्कार: बिहार राज्यपाल और मंत्री ईरान रवाना

author
Komal
संवाददाता
📅 03 July 2026, 5:46 AM ⏱ 1 मिनट 👁 579 views
खामेनेई अंतिम संस्कार: बिहार राज्यपाल और मंत्री ईरान रवाना
📷 aarpaarkhabar.com

ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत की ओर से एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजा जाएगा। विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक रूप से इस बात की पुष्टि की है कि बिहार के राज्यपाल और विदेश राज्य मंत्री मार्गेरिटा आज ईरान की यात्रा पर रवाना होंगे। यह ईरान के साथ भारत के द्विपक्षीय संबंधों का एक महत्वपूर्ण प्रदर्शन है।

अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई का आकस्मिक निधन इस महीने की शुरुआत में हुआ था और उनके अंतिम संस्कार की तैयारियां तेहरान में जोरों पर हैं। इस समारोह में विश्व भर से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय नेताओं के आने की उम्मीद है। ईरान के इस सर्वोच्च आध्यात्मिक और राजनीतिक नेता की मृत्यु से दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक परिदृश्य में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।

विदेश मंत्रालय की आधिकारिक घोषणा

भारत के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर घोषणा की कि राज्यपाल वाई.वी. रेड्डी और विदेश राज्य मंत्री मार्गेरिटा बनर्जी ईरान के लिए प्रस्थान करेंगी। यह प्रतिनिधिमंडल तेहरान में अयातुल्ला खामेनेई के सम्मान में आयोजित किए जाने वाले अंतिम संस्कार समारोह में भाग लेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि यह भारत की ओर से ईरान के प्रति सम्मान और सद्भावना का प्रतीक है।

राज्यपाल और मंत्री तेहरान में भारत के राजदूत के साथ समन्वय करेंगी और ईरानी सरकार के प्रतिनिधियों से मिलेंगी। यह दौरा भारत और ईरान के बीच परंपरागत और ऐतिहासिक संबंधों को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और राजनीतिक जुड़ाव सदियों पुराना है।

अयातुल्ला खामेनेई का राजनीतिक महत्व

अयातुल्ला खामेनेई ईरान के आध्यात्मिक नेता और सर्वोच्च हस्ताक्षेपकर्ता थे। उन्होंने 1989 से लेकर अपनी मृत्यु तक इस भूमिका में कार्य किया और ईरान की विदेश नीति तथा आंतरिक मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे। उनकी नीतियों का असर न केवल ईरान में बल्कि पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में देखा गया। खामेनेई के निर्णय और सुझाव ईरानी सरकार और सैन्य संस्थानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते थे।

खामेनेई ईरान की इस्लामिक क्रांति के एक महत्वपूर्ण स्तंभ थे और उन्होंने ईरान को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर एक शक्तिशाली देश के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनकी दूरदर्शी नीतियों के कारण ईरान को क्षेत्रीय शक्तियों में से एक के रूप में मान्यता मिली। उनके निधन से क्षेत्रीय राजनीति में एक बड़े परिवर्तन का संकेत मिल सकता है।

भारत-ईरान संबंधों का महत्व

भारत और ईरान के संबंध आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में बेहद मजबूत हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, खेती और तेल उत्पादन से संबंधित महत्वपूर्ण समझौते हैं। चाबहार पोर्ट का विकास दोनों देशों के बीच सहयोग का एक प्रमुख उदाहरण है जिसका हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीति के लिए विशेष महत्व है।

भारत के लिए ईरान का भू-राजनीतिक महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह मध्य एशिया, दक्षिण एशिया और उत्तरी अफ्रीका को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। शांग्हाई सहयोग संगठन जैसी संस्थाओं में दोनों देश साझा हित रखते हैं। इसलिए अयातुल्ला खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत की ओर से उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजना भारत की ईरान के प्रति सम्मान और महत्व को दर्शाता है।

भारत के प्रतिनिधिमंडल की तेहरान यात्रा से भारत-ईरान संबंधों में एक नई ऊर्जा आने की उम्मीद है। यह यात्रा दोनों देशों के बीच साझेदारी को और गहरा करने का एक अवसर प्रदान करेगी। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा है कि यह प्रतिनिधिमंडल ईरान के नए नेतृत्व के साथ भी बातचीत करेगा।

अयातुल्ला खामेनेई का अंतिम संस्कार एक विश्व-व्यापी घटना बन गई है जिसमें लाखों लोग भाग ले रहे हैं। भारत की ओर से इस महत्वपूर्ण समारोह में भाग लेना न केवल एक राजनयिक कदम है बल्कि यह भारत की वैश्विक नेतृत्व की एक महत्वपूर्ण अभिव्यक्ति भी है। राज्यपाल और मंत्री मार्गेरिटा की यह यात्रा भारत-ईरान मैत्री के नए अध्याय का सूचक हो सकती है।