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Tuesday, 14 July 2026
राजनीति

BJP का डिजिटल कैंपेन: 40 करोड़ का खर्च

author
Komal
संवाददाता
📅 28 April 2026, 6:30 AM ⏱ 1 मिनट 👁 857 views
BJP का डिजिटल कैंपेन: 40 करोड़ का खर्च
📷 aarpaarkhabar.com

चुनावी मौसम में राजनीतिक दलों का खर्च करना आम बात हो गई है। लेकिन जब बात आती है डिजिटल प्रचार की, तो भारतीय जनता पार्टी यानी बीजेपी अपने प्रतिद्वंद्वियों से कहीं आगे दिखाई दे रही है। हाल के चुनावों में बीजेपी ने डिजिटल विज्ञापनों पर 40 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किया है। यह रकम किसी भी अन्य राजनीतिक दल ने खर्च नहीं की है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरलम और असम जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में चुनाव प्रचार के समय बीजेपी का यह विशाल डिजिटल अभियान एक महत्वपूर्ण विकास रहा है।

डिजिटल प्रचार का दौर आ गया है। आजकल की राजनीति में सोशल मीडिया, यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म का बहुत महत्व हो गया है। युवा वर्ग अपनी सभी जानकारी इंटरनेट के माध्यम से प्राप्त करते हैं। इसी कारण राजनीतिक दलों को भी इन प्लेटफॉर्मों पर अपनी मौजूदगी दर्ज करनी पड़ रही है। बीजेपी ने इसी डिजिटल क्षेत्र में बेहद प्रभावी ढंग से अपना प्रचार किया है।

डिजिटल प्रचार में बीजेपी का प्रभुत्व

विभिन्न चुनाव आयोग की रिपोर्टों से पता चलता है कि बीजेपी ने पिछले कुछ सालों में डिजिटल विज्ञापनों पर सबसे अधिक निवेश किया है। 40 करोड़ रुपये से अधिक की राशि केवल डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर खर्च की गई। यह राशि बेहद चिंताजनक है क्योंकि अन्य राजनीतिक दलों का खर्च इससे कहीं कम रहा है। कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल और अन्य क्षेत्रीय पार्टियों की तुलना में बीजेपी का डिजिटल बजट तीन से चार गुना अधिक है।

यह बात स्पष्ट है कि बीजेपी को डिजिटल माध्यम के माध्यम से अपने संदेश को पहुंचाने में बेहद विश्वास है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर बीजेपी के आधिकारिक खातों की संख्या और उन पर फॉलोअर्स की संख्या भी किसी अन्य पार्टी से अधिक है। यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर सभी जगह बीजेपी की मजबूत उपस्थिति देखी जा सकती है। डिजिटल विज्ञापनों के माध्यम से पार्टी सीधे जनता तक अपना संदेश पहुंचाती है।

डिजिटल प्रचार का एक फायदा यह भी है कि इसमें पार्टी को विभिन्न समूहों के लिए अलग-अलग संदेश तैयार करने का मौका मिलता है। युवाओं के लिए एक तरह का विज्ञापन, महिलाओं के लिए दूसरा, किसानों के लिए तीसरा और इसी तरह अलग-अलग वर्गों के लिए लक्षित विज्ञापन बनाए जा सकते हैं। यह तरीका परंपरागत प्रचार से कहीं अधिक प्रभावी साबित होता है।

राज्य विशेष में डिजिटल अभियान

पश्चिम बंगाल के चुनाव में बीजेपी का डिजिटल अभियान बेहद व्यापक और संगठित था। सोशल मीडिया पर पार्टी के विज्ञापन बंगाली भाषा में भी दिए गए। स्थानीय मुद्दों और स्थानीय नेताओं पर केंद्रित विज्ञापन बनाए गए। तमिलनाडु में भी बीजेपी के डिजिटल प्रचार की रणनीति काफी मजबूत थी। तमिल भाषा में विज्ञापन और स्थानीय सांस्कृतिक संदर्भों का उपयोग किया गया।

केरल में हालांकि बीजेपी की परंपरागत ताकत सीमित रही है, लेकिन डिजिटल प्रचार के माध्यम से पार्टी ने यहां भी एक उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश की। असम में तो बीजेपी की पहले से ही मजबूत पकड़ थी, लेकिन डिजिटल माध्यम से पार्टी ने अपनी पकड़ को और भी मजबूत बनाने की कोशिश की। असमिया भाषा में विज्ञापन और स्थानीय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करते हुए प्रचार किया गया।

चुनावी खर्च और जवाबदेही का सवाल

चुनावी खर्च का मुद्दा लोकतांत्रिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण पहलू है। जब किसी एक पार्टी का खर्च दूसरों से कई गुना अधिक हो जाता है, तो यह सवाल उठता है कि क्या यह निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के लिए अच्छा है? डिजिटल विज्ञापनों पर 40 करोड़ रुपये खर्च करना एक बहुत बड़ी राशि है। इस राशि का एक बड़ा हिस्सा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर विज्ञापनों पर खर्च किया गया है।

चुनाव आयोग को इस बात पर नजरिया रखना चाहिए कि डिजिटल विज्ञापन खर्च को कैसे नियंत्रित किया जाए। यह बात स्पष्ट है कि आने वाले समय में डिजिटल प्रचार की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी। ऐसे में यह जरूरी है कि सभी पार्टियों के लिए समान नियम बने।

बीजेपी के 40 करोड़ रुपये के डिजिटल खर्च से एक बात तो स्पष्ट है कि वह डिजिटल माध्यम को चुनावी प्रचार का सबसे महत्वपूर्ण हथियार मान रही है। आने वाले समय में राजनीति में डिजिटल प्रचार की भूमिका और भी बढ़ेगी। यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए चुनौती और अवसर दोनों है।