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Wednesday, 20 May 2026
विश्व

BRICS ने G7 को पीछे छोड़ा, भारत-रूस पार्टनरशिप

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Komal
संवाददाता
📅 15 May 2026, 7:01 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.0K views
BRICS ने G7 को पीछे छोड़ा, भारत-रूस पार्टनरशिप
📷 aarpaarkhabar.com

विश्व अर्थव्यवस्था में एक बड़ा बदलाव आने वाला है। ब्रिक्स समूह की संयुक्त आर्थिक क्षमता अब जी7 देशों से आगे निकल गई है। यह एक ऐतिहासिक मोड़ है जो दुनिया के आर्थिक संतुलन को बदल रहा है। भारत इस महत्वपूर्ण समय में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, जो दक्षिण एशिया के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस सम्मेलन में ऊर्जा सुरक्षा, विशेषकर रूस से तेल आयात और होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा।

ब्रिक्स संगठन में अब दस उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। इन सभी देशों की आर्थिक शक्ति एक साथ आने से वैश्विक स्तर पर उनकी मजबूत स्थिति बन गई है। भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका - ये पांच मूल सदस्य हैं। इसके अलावा हाल ही में ईरान, मिस्र, इथियोपिया, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब भी इस समूह में शामिल हुए हैं। यह विस्तार ब्रिक्स की बढ़ती प्रभावशीलता को दर्शाता है।

ब्रिक्स की आर्थिक क्षमता में वृद्धि

हाल के आंकड़ों के अनुसार, ब्रिक्स देशों की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पश्चिमी देशों के साथ प्रतिस्पर्धा कर रही है। जी7 देशों में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा और जापान शामिल हैं। लेकिन ब्रिक्स के नए सदस्यों के साथ, इस समूह की कुल आर्थिक शक्ति अब जी7 से अधिक हो गई है।

भारत की भूमिका इस संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत न केवल विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, बल्कि एशिया में भी इसकी रणनीतिक स्थिति अद्वितीय है। भारत की जनसंख्या, बाजार का आकार और युवा कार्यबल इसे भविष्य के लिए एक शक्तिशाली खिलाड़ी बनाते हैं। ब्रिक्स में भारत की सदस्यता दक्षिण एशिया के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

भारत-रूस पार्टनरशिप: एक गेमचेंजर

भारत और रूस के बीच संबंध ऐतिहासिक रहे हैं। ये दोनों देश सांस्कृतिक, राजनीतिक और आर्थिक स्तर पर गहरे जुड़े हुए हैं। वर्तमान समय में यह पार्टनरशिप और भी महत्वपूर्ण हो गई है। रूस से तेल आयात भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यावश्यक है। भारत की बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने के लिए रूस एक विश्वसनीय भागीदार साबित हुआ है।

रूस से कच्चे तेल का आयात भारत की अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने में मदद करता है। यह न केवल भारत के लिए बल्कि पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है। भारत-रूस के इस सहयोग से ऊर्जा की कीमतों में स्थिरता आती है और विकासशील देशों को लाभ मिलता है। यह पार्टनरशिप पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद दोनों देशों के आर्थिक हितों को सुरक्षित रखता है।

होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा: एक गंभीर मुद्दा

होर्मुज स्ट्रेट विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है। इसके माध्यम से विश्व के 20 प्रतिशत तेल का व्यापार होता है। भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए इस जलडमरूमध्य की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। किसी भी अस्थिरता से भारत के तेल आयात पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। भारत, रूस और अन्य सदस्य देश इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए काम करेंगे। यह समुद्री रास्ता न केवल भारत के लिए बल्कि पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

भारत द्वारा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी एक रणनीतिक कदम है। यह भारत की वैश्विक नेतृत्व में बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। भारत इस प्ंलेटफॉर्म पर विकासशील देशों की आवाज उठा सकता है और अपने हितों को आगे बढ़ा सकता है। ब्रिक्स के माध्यम से भारत एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के निर्माण में योगदान दे रहा है जो अधिक न्यायसंगत और संतुलित है।

यह शिखर सम्मेलन भारत-रूस पार्टनरशिप को और मजबूत करेगा। दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सुरक्षा समझौते और गहरे होंगे। भारत रूस की ऊर्जा की जरूरतों में भागीदार है और रूस भारत की विकास यात्रा में सहायक है। यह पारस्परिक हितों पर आधारित एक मजबूत रिश्ता है।

ब्रिक्स का उदय विश्व राजनीति में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन है। यह समूह विकासशील देशों की आवाज बनकर उभरा है। भारत इस समूह में अपनी नेतृत्वकारी भूमिका के लिए जाना जाता है। भारत-रूस पार्टनरशिप इस नई विश्व व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन गई है। आने वाले समय में यह संबंध और भी मजबूत होगा और दोनों देशों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।