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Thursday, 28 May 2026
शिक्षा

CBSE की सफाई: डिजिटल मूल्यांकन ठेका पारदर्शी तरीके से दिया गया

author
Komal
संवाददाता
📅 28 May 2026, 6:16 AM ⏱ 1 मिनट 👁 828 views
CBSE की सफाई: डिजिटल मूल्यांकन ठेका पारदर्शी तरीके से दिया गया
📷 aarpaarkhabar.com

बोर्ड की पारदर्शिता की दावेदारी

भारतीय स्कूल प्रमाणपत्र परीक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 2026 बोर्ड परीक्षाओं के डिजिटल मूल्यांकन का ठेका देने के सिलसिले में अपनी पारदर्शिता को लेकर स्पष्ट किया है। बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि पूरी टेंडर प्रक्रिया सामान्य वित्तीय नियम (जीएफआर) के अंतर्गत पूर्ण पारदर्शिता के साथ संपन्न की गई थी। यह मुद्दा तब उजागर हुआ जब विपक्षी नेता राहुल गांधी ने इस निर्णय पर गंभीर सवाल उठाए थे और इसे लेकर अपनी चिंता व्यक्त की थी।

सीबीएसई के प्रवक्ता ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान सभी आवश्यक दिशानिर्देशों का पालन किया गया था। बोर्ड की ओर से दी गई सफाई में यह भी बताया गया कि प्रत्येक चरण में उचित जांच-पड़ताल और मूल्यांकन किया गया। इस संबंध में सीबीएसई ने यह भी जोर दिया कि उनके सभी निर्णय शिक्षा जगत के हित में लिए जाते हैं और किसी भी प्रकार का पक्षपात नहीं होता है।

यह बताया गया है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लागू करने का प्रमुख उद्देश्य परीक्षाओं के मूल्यांकन को अधिक तेज, कुशल और पारदर्शी बनाना है। इससे छात्रों को उनके परिणाम समय पर मिल सकेंगे और पूरी प्रक्रिया में त्रुटि की संभावना में कमी आएगी। सीबीएसई का मानना है कि प्रौद्योगिकी का समुचित उपयोग शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने का एक महत्वपूर्ण तरीका है।

राहुल गांधी के आरोप और चिंताएं

दूसरी ओर, राहुल गांधी ने इस ठेके को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अपनी आलोचना में कहा है कि यह संदिग्ध परिस्थितियों में दिया गया है और इसमें पारदर्शिता की कमी दिखाई दे रही है। राहुल गांधी का कहना है कि सीबीएसई के इस निर्णय को लेकर जनता के मन में सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह सही तरीके से किया गया है।

उन्होंने यह भी कहा है कि शिक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले ऐसे नहीं होने चाहिए जिनमें लोगों के मन में संदेह रहे। राहुल गांधी के अनुसार, लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े परीक्षाओं के मूल्यांकन का काम किसी भी तरह के संदेह के दायरे में नहीं होना चाहिए। वे यह भी कहते हैं कि ऐसे महत्वपूर्ण कार्यों को लेकर पूर्ण पारदर्शिता होनी चाहिए ताकि जनता को विश्वास रहे।

विपक्षी नेता के इन सवालों के बाद से इस विषय पर सार्वजनिक बहस शुरू हो गई है। शिक्षा विशेषज्ञों और आम जनता के बीच इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग विचार सामने आ रहे हैं। कुछ लोग सीबीएसई के निर्णय को सही मान रहे हैं जबकि कुछ राहुल गांधी की चिंताओं को जायज मान रहे हैं।

Coempt EduTeck और टेंडर प्रक्रिया

Coempt EduTeck को सीबीएसई के साथ यह ठेका लेने के लिए चुना गया है। यह कंपनी शिक्षा क्षेत्र में प्रौद्योगिकी समाधान प्रदान करने वाली एक ज्ञात संस्था है। बोर्ड के अनुसार, इस कंपनी को चुनना एक तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन के आधार पर किया गया था। सीबीएसई की ओर से कहा गया है कि विभिन्न कंपनियों के आवेदनों की गहन जांच की गई और सर्वश्रेष्ठ विकल्प चुना गया।

टेंडर प्रक्रिया के दौरान सीबीएसई ने अपनी आंतरिक टीम और बाहरी विशेषज्ञों से भी सलाह ली थी। बोर्ड के अनुसार, सभी आवेदनकर्ता कंपनियों को समान मानदंडों पर मूल्यांकन किया गया। Coempt EduTeck की तकनीकी क्षमता, वित्तीय स्थिति और भारतीय स्कूली बोर्ड परीक्षाओं को संभालने का अनुभव देखते हुए इसे चुना गया।

यह भी बताया गया है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली लागू करने के लिए एक विश्वसनीय और अनुभवी पार्टनर की आवश्यकता थी। Coempt EduTeck के पास इस क्षेत्र में पर्याप्त अनुभव है और वह अपनी विश्वसनीयता के लिए जाना जाता है। सीबीएसई का मानना है कि इस कंपनी के साथ भागीदारी 2026 की परीक्षाओं को अधिक सुचारु रूप से संचालित करने में मदद करेगी।

निष्कर्ष

सीबीएसई और राहुल गांधी के बीच इस विवाद को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि शिक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों को लेकर समाज में पारदर्शिता और विश्वास की अपेक्षा होती है। सीबीएसई की ओर से दी गई सफाई से यह प्रतीत होता है कि सभी प्रक्रियाएं नियमानुसार की गई हैं। हालांकि, इस मुद्दे को पूरी तरह से पारदर्शी बनाने के लिए आगे और भी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए ताकि आम जनता को पूर्ण विश्वास रहे। डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली शिक्षा जगत के लिए एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इसे पूर्ण पारदर्शिता के साथ लागू किया जाना चाहिए।