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Sunday, 13 September 2026
समाचार

कूनो से निकली मादा चीता गांव में, लोगों ने खदेड़ा

author
Komal
संवाददाता
📅 22 June 2026, 6:30 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.1K views
कूनो से निकली मादा चीता गांव में, लोगों ने खदेड़ा
📷 aarpaarkhabar.com

मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में एक बार फिर से चिंताजनक घटना सामने आई है। कूनो नेशनल पार्क से एक मादा चीता निकलकर दुबेरा गांव में घुस गई। इस घटना से न केवल स्थानीय ग्रामीण बल्कि पूरे क्षेत्र में भय का माहौल व्याप्त हो गया। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम घटनास्थल पर पहुंच गई। हालांकि वन विभाग के आने से पहले ही ग्रामीणों ने लाठी-डंडों से चीते को खदेड़ दिया था।

यह मादा चीता जिसका नाम CCB2 है, कूनो नेशनल पार्क में पली-बढ़ी थी। पार्क में उसके साथ और भी चीते हैं जो प्रोजेक्ट चीता के अंतर्गत अफ्रीका से लाए गए थे। लेकिन इस बार जब यह चीता पार्क की सीमा को लांघकर गांव में घुस गई, तो स्थिति गंभीर हो गई। सोशल मीडिया पर इस घटना के वीडियो वायरल हो गए हैं जिनमें चीते को लाठियों से खदेड़ते हुए देखा जा सकता है।

पार्क से निकलने के पीछे क्या कारण है?

चीता एक शिकारी जानवर है और जब वह भूखा हो तो वह अपने शिकार की तलाश में काफी दूर तक निकल आता है। कूनो नेशनल पार्क में शिकार के लिए पर्याप्त जानवर होने चाहिए, लेकिन कई विशेषज्ञों का मानना है कि पार्क में शिकार के लिए उपयुक्त जानवरों की संख्या सीमित है। इसी कारण से चीते अपने भोजन की तलाश में पार्क की सीमाओं से बाहर निकल आते हैं।

एक अन्य कारण यह भी है कि चीते अपने प्राकृतिक वास्तव से बहुत दूर हैं। अफ्रीका से लाए गए ये चीते भारतीय जलवायु और परिस्थितियों में अभी पूरी तरह से अभ्यस्त नहीं हुए हैं। इसलिए वे अक्सर अपने पार्क की सीमाओं को लांघकर बाहर निकलते रहते हैं। इससे स्थानीय आबादी में भय और असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है।

ग्रामीणों की प्रतिक्रिया और सुरक्षा की चिंता

जब दुबेरा गांव के लोगों को चीते के गांव में घुसने की सूचना मिली, तो उनके बीच अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। लोग अपने बच्चों और परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित हो गए। गांव में एक स्कूल भी है और चीता उसी के पास तक पहुंच गया था। अगर समय रहते पुलिस और वन विभाग की कार्रवाई नहीं होती, तो बहुत बड़ी दुर्घटना हो सकती थी।

ग्रामीणों ने अपनी सुरक्षा के लिए खुद ही लाठी-डंडे लेकर चीते को खदेड़ दिया। यह एक खतरनाक कदम था क्योंकि इससे चीता घायल हो सकता था या फिर आक्रामक हो सकता था। लेकिन स्थानीय लोगों को लगा कि उन्हें अपने बल पर ही अपनी रक्षा करनी होगी। इस घटना के बाद गांव के कई लोगों ने वन विभाग और प्रशासन से शिकायत दर्ज की है।

वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल

इस घटना के बाद वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कूनो नेशनल पार्क में कई चीते हैं और उनकी निगरानी करने के लिए एक पूरी टीम नियुक्त की गई है। लेकिन इस बार यह चीता कैसे गांव तक पहुंच गया, यह एक बड़ा सवाल है।

वन विभाग की ओर से कहा जा रहा है कि चीता सुरक्षित है और उसे वापस पार्क में लाया जा रहा है। लेकिन यह दूसरी और तीसरी घटना भी नहीं है जब किसी चीते को गांव में देखा गया हो। पिछले कुछ महीनों में इस तरह की कई घटनाएं सामने आई हैं। इससे लगता है कि वन विभाग की निगरानी व्यवस्था में गंभीर खामियां हैं।

प्रोजेक्ट चीता एक महत्वाकांक्षी परियोजना है जिसका उद्देश्य भारत में चीतों का पुनः प्रवेश करवाना है। लेकिन इस परियोजना को सफल बनाने के लिए केवल चीतों को पार्क में लाना काफी नहीं है। इसके साथ ही पार्क की सुरक्षा, शिकार की उपलब्धता, और स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक उपाय किए जाने चाहिए।

श्योपुर जिले के प्रशासन को चाहिए कि वह गांवों में सचेतना अभियान चलाए और लोगों को चीते से कैसे निपटना है, इसकी जानकारी दे। साथ ही वन विभाग को अपनी निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना चाहिए ताकि इस तरह की घटनाएं भविष्य में दोबारा न हों। स्थानीय लोगों की भय और असुरक्षा की भावना को दूर किए बिना इस परियोजना को पूरी तरह से सफल नहीं माना जा सकता।