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Thursday, 04 June 2026
समाचार

चीन का चौथा एयरक्राफ्ट कैरियर: दुनिया के लिए नई चुनौती

author
Komal
संवाददाता
📅 26 April 2026, 7:01 AM ⏱ 1 मिनट 👁 613 views
चीन का चौथा एयरक्राफ्ट कैरियर: दुनिया के लिए नई चुनौती
📷 aarpaarkhabar.com

चीन की जनवादी मुक्ति सेना नौसेना ने अपनी 77वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक ऐतिहासिक घोषणा के रूप में एक वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में चीन के चौथे एयरक्राफ्ट कैरियर के बारे में संकेत दिए गए हैं, जिसे 'हे जियान' नाम दिया जाएगा। यह घोषणा पूरी दुनिया में चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि यह जहाज अमेरिकी नौसेना के वर्चस्व को सीधे चुनौती दे सकता है।

चीन की इस नई पहल से स्पष्ट हो जाता है कि वह अपनी नौसेना की शक्ति को लगातार बढ़ा रहा है। पिछले कुछ दशकों में चीन ने तकनीकी और सैन्य क्षेत्र में जबरदस्त प्रगति की है। अब जब वह चौथे एयरक्राफ्ट कैरियर की ओर बढ़ रहा है, तो यह माना जा रहा है कि यह एक बड़ा कदम है जो एशिया प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल देगा।

चीन के एयरक्राफ्ट कैरियर का विकास

चीन के पास पहले लिआओनिंग और शेन्यांग नाम के दो एयरक्राफ्ट कैरियर हैं। लिआओनिंग को सन् 2012 में और शेन्यांग को सन् 2019 में सेवा में शामिल किया गया था। अब चीन के पास फुजियान नाम का एक तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर भी है, जिसका निर्माण चल रहा है। इसके बाद अब हे जियान के रूप में चौथा कैरियर आने जा रहा है।

चीन के पहले दोनों कैरियरों को रूस से खरीदा गया था, लेकिन फुजियान और हे जियान पूरी तरह चीन में निर्मित होंगे। यह चीनी इंजीनियरिंग की क्षमता को दर्शाता है। ये कैरियर चीन को न केवल एशिया में बल्कि विश्व के विभिन्न भागों में अपनी नौसेना की उपस्थिति दर्ज कराने में मदद करेंगे।

हे जियान को लेकर माना जा रहा है कि इसमें परमाणु ऊर्जा का प्रयोग किया जाएगा। परमाणु ऊर्जा से चलने वाले कैरियरों की सीमा बिना ईंधन भरे हजारों किलोमीटर तक होती है। अमेरिका के पास भी परमाणु ऊर्जा से चलने वाले कैरियर हैं। यदि चीन भी इसी तरह का कैरियर बनाता है, तो वह अंतरराष्ट्रीय समुद्रों में अपनी उपस्थिति को और भी मजबूत कर सकेगा।

परमाणु ऊर्जा का महत्व और चिंताएं

परमाणु ऊर्जा से संचालित एयरक्राफ्ट कैरियर आधुनिक नौसेना का सबसे शक्तिशाली हथियार माना जाता है। इसकी अनंत शक्ति और विशाल परिचालन सीमा इसे अद्वितीय बनाती है। अमेरिका के निमित्ज-वर्ग के कैरियर पूरी दुनिया में अमेरिकी शक्ति का प्रतीक हैं।

चीन के हे जियान के परमाणु ऊर्जा से संचालित होने की संभावना दक्षिण चीन सागर, हिंद महासागर और प्रशांत महासागर में चीन की सैन्य उपस्थिति को मजबूत करेगी। इससे अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए चिंता का विषय बन गया है। भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश भी इस विकास पर नजर रखे हुए हैं।

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। चीन के बढ़ते सैन्य विस्तार से यह संतुलन खतरे में आ गया है। इसलिए इसी क्षेत्र के देशों ने अपनी सैन्य शक्ति को भी बढ़ाना शुरू किया है।

भारत के लिए निहितार्थ और भविष्य की रणनीति

भारत के लिए चीन का यह कदम विशेष महत्व रखता है। भारत भी हिंद महासागर में एक बड़ी नौसेना शक्ति है। भारत के पास अभी तीन एयरक्राफ्ट कैरियर हैं - विक्रमादित्य, विक्रांत और नई परियोजनाओं के तहत विकास के अधीन एक नया कैरियर।

चीन के बढ़ते आक्रामक रवैये को देखते हुए भारत को भी अपनी नौसेना को मजबूत करना होगा। भारतीय नौसेना पहले से ही क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। लेकिन चीन के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए भारत को अपनी नौसेना की क्षमता को निरंतर बढ़ाना होगा।

चीन की नौसेना का विस्तार न केवल भारत के लिए बल्कि पूरे एशिया प्रशांत क्षेत्र के लिए एक चुनौती प्रस्तुत करता है। इसलिए इसी क्षेत्र के देशों को एक-दूसरे के साथ सहयोग बढ़ाना चाहिए और एक संतुलित नीति अपनानी चाहिए।

भारत के लिए यह समय अपनी नौसेना को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम बनाने का है। स्वदेशी जहाज निर्माण और उन्नत हथियार प्रणालियों का विकास भारत की नौसेना को अधिक शक्तिशाली बना सकता है। साथ ही, क्वाड जैसे संगठनों के माध्यम से भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया एक-दूसरे को सहयोग प्रदान कर सकते हैं।

चीन का चौथा एयरक्राफ्ट कैरियर एक नई वास्तविकता का संकेत है। यह कैरियर न केवल चीन की सैन्य शक्ति को दर्शाता है बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यवस्था में एक नए युग की शुरुआत करता है। इसलिए सभी देशों को इस पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए और अपनी रणनीति तैयार करनी चाहिए।