दूध के दाम बढ़ने के संकेत, कमजोर मानसून का असर
भारतीय डेयरी इंडस्ट्री के समक्ष एक बड़ी चुनौती का सामना करने का समय आ गया है। इस साल कमजोर मानसून के कारण दूध की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी होने की आशंका जताई जा रही है। देश की प्रमुख डेयरी कंपनियां अपने उत्पादन लागत को कम करने के लिए दूध की कीमतों को बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। यह स्थिति आम उपभोक्ताओं के लिए काफी चिंताजनक साबित हो सकती है क्योंकि दूध भारतीय परिवारों के दैनिक आहार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार इस मानसून मौसम में वर्षा की मात्रा सामान्य से कम रहने की संभावना है। यह स्थिति पशुपालन क्षेत्र के लिए बेहद नुकसानदेह साबित हो सकती है क्योंकि पर्याप्त वर्षा न होने से चारे की उपलब्धता में कमी आएगी। जब पशुओं को सही मात्रा में चारा नहीं मिलेगा तो न केवल उनका स्वास्थ्य प्रभावित होगा बल्कि दूध उत्पादन की क्षमता भी कम हो जाएगी।
भारत विश्व में दूध का सबसे बड़ा उत्पादक देश है और हमारी दुग्ध उत्पादन क्षमता करोड़ों लोगों के पोषण का स्रोत है। कृषि एवं डेयरी विभाग के आंकड़ों के अनुसार देश का दुग्ध उत्पादन प्रतिवर्ष बढ़ रहा है। लेकिन पर्यावरणीय कारकों की वजह से यह वृद्धि में बाधा आ सकती है। पिछले कुछ सालों में हमने देखा है कि कैसे मौसम की अनिश्चितता ने कृषि और पशुपालन क्षेत्र को प्रभावित किया है।
चारे की कमी से दूध उत्पादन में गिरावट
चारे की उपलब्धता पशु-पालन का सबसे महत्वपूर्ण कारक है। जब कमजोर मानसून होता है तो खेतों में घास और अन्य चारे की फसलें ठीक से नहीं उग पाती हैं। पशु पालकों को बाजार से महंगे दामों पर चारा खरीदना पड़ता है। इससे दूध उत्पादन की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हो जाती है।
भारतीय डेयरी संगठनों की ताजा रिपोर्ट में यह बताया गया है कि अगर मानसून कमजोर रहा तो चारे की कीमत में 20 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। यह आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं क्योंकि लागत में इतनी बड़ी वृद्धि सीधे उपभोक्ता तक पहुंचेगी। डेयरी फार्मों में छोटे पशु पालकों को तो और भी ज्यादा मुश्किल का सामना करना पड़ेगा क्योंकि उनके पास इतनी क्षमता नहीं होती कि वे महंगे चारे को खरीद सकें।
देश के विभिन्न राज्यों में चारे के भंडार केंद्र स्थापित किए गए हैं लेकिन उनकी क्षमता सीमित है। सरकार को इस दिशा में विशेष ध्यान देना चाहिए और चारे का भंडारण बढ़ाना चाहिए। साथ ही किसानों को वैकल्पिक चारे की फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए ताकि आपातकाल की स्थिति में भी पशुओं को पर्याप्त पोषण मिल सके।
डेयरी कंपनियों द्वारा कीमत बढ़ोतरी की संभावना
भारत की प्रमुख डेयरी कंपनियां जैसे अमूल, मदर डेयरी और अन्य निजी डेयरी उद्योग प्राप्ति कीमतों में वृद्धि के लिए तैयारी कर रही हैं। जब कच्चे माल की कीमत बढ़ती है तो कंपनियों को अपने मुनाफे को बनाए रखने के लिए अंतिम उत्पाद की कीमत बढ़ानी पड़ती है। यह एक आर्थिक सिद्धांत है जिसे कोई भी व्यावसायिक संस्था नकार नहीं सकता।
हालांकि कंपनियां इस बात का भी ध्यान रखती हैं कि कीमतों में अचानक बहुत ज्यादा बढ़ोतरी से उपभोक्ता नाराज न हो जाएं और बिक्री में कमी न आ जाए। इसलिए आमतौर पर कीमतों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी की जाती है ताकि बाजार को समायोजित होने का समय मिल सके।
दूध के अलावा दही, पनीर, मक्खन और अन्य दुग्ध उत्पादों की कीमतें भी प्रभावित हो सकती हैं। इन सभी उत्पादों का आधार दूध ही होता है इसलिए दूध की कीमत में बढ़ोतरी का असर पूरे डेयरी सेक्टर पर दिखाई देगा।
वॉल्यूम ग्रोथ और आर्थिक पहलू
इस सब नकारात्मक परिस्थितियों के बावजूद अच्छी खबर यह है कि इस साल डेयरी सेक्टर में 8 से 10 प्रतिशत वॉल्यूम ग्रोथ होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। यह मतलब है कि कुल मात्रा में दूध का उत्पादन बढ़ेगा भले ही कीमतें बढ़ जाएं। यह वृद्धि शहरी क्षेत्रों में दूध की बढ़ती मांग और डेयरी उद्योग के आधुनिकीकरण के कारण संभव हो पा रही है।
भारत की बढ़ती जनसंख्या और मध्यम वर्ग के विस्तार से दूध और दुग्ध उत्पादों की मांग में लगातार वृद्धि हो रही है। लोगों की आय बढ़ने से वे अधिक गुणवत्ता वाले दूध की मांग कर रहे हैं। यह ट्रेंड डेयरी उद्योग के लिए सकारात्मक है।
सरकार को इस दिशा में नीति बनानी चाहिए जो छोटे पशु पालकों को संरक्षण प्रदान करे और साथ ही उपभोक्ताओं के हितों का भी ध्यान रखे। कीमतों में अनावश्यक बढ़ोतरी को नियंत्रित करना सरकार की जिम्मेदारी है ताकि आम जनता को कठिनाई न हो। मानसून के मामले में भी सरकार को वैज्ञानिक तरीकों से कृषि और पशुपालन को सूखे से बचाने के उपाय करने चाहिए।




