दिल्ली में मानसून में देरी, जुलाई के पहले सप्ताह तक आने की संभावना
नई दिल्ली - इस बार की गर्मी में दिल्लीवासियों को मानसून की राहत के लिए और इंतजार करना पड़ सकता है। भारतीय मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार सामान्य तौर पर जो मानसून 27 जून के आसपास दिल्ली पहुंचता है, इस बार वह जुलाई के पहले सप्ताह तक देर से दस्तक दे सकता है। राजधानी में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस को पार कर चुका है और लोग गर्मी से बेहाल हैं, लेकिन मानसून में यह देरी स्थिति को और भी कठिन बना देगी।
मौसम विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इस साल मानसून की चाल सामान्य गति से धीमी है। दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत के दक्षिणी भागों में तो पहुंच गया है, लेकिन उत्तरी भारत की ओर इसकी प्रगति काफी धीमी रही है। वर्तमान मौसम पैटर्न और वायुमंडलीय दबाव को देखते हुए अधिकारियों का अनुमान है कि मानसून को दिल्ली तक पहुंचने में कम से कम दस से पंद्रह दिन और लग सकते हैं।
मानसून में देरी के मुख्य कारण
मानसून में इस देरी के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं। सबसे प्रमुख कारण है उत्तरी भारत के ऊपर उच्च वायुदाब का क्षेत्र। यह उच्च दबाव मानसून की बयार को रोक रहा है और उसे आगे बढ़ने से रोक रहा है। इसके अलावा, हिंद महासागर में जलवायु परिस्थितियां भी इस बार मानसून की गति को प्रभावित कर रही हैं।
मौसम विभाग के महानिदेशक के अनुसार, यह देरी अल नीनो प्रभाव के कारण भी हो सकती है। अल नीनो एक जलवायु पैटर्न है जो प्रशांत महासागर में तापमान को प्रभावित करता है और वैश्विक मौसम पर असर डालता है। इसके अलावा, भूमध्य रेखा के पास की जलवायु परिस्थितियों में भी बदलाव देखे जा रहे हैं जो मानसून की गति को प्रभावित कर रहे हैं।
एक अन्य महत्वपूर्ण कारण यह भी है कि इस साल पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) की संख्या में कमी आई है। ये विक्षोभ सामान्य तौर पर मानसून को ठेलने में मदद करते हैं। इनकी संख्या कम होने से मानसून को उत्तर की ओर बढ़ने में समस्या आ रही है। साथ ही, यूरोप और एशिया के बीच के तापमान में अंतर भी इस बार सामान्य से कम है, जिससे मानसून की गति प्रभावित हुई है।
दिल्ली की गर्मी और जनजीवन पर प्रभाव
मानसून में यह देरी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में गर्मी की विकराल समस्या को बढ़ाने वाली है। पिछले एक हफ्ते से राजधानी में तापमान 44 से 46 डिग्री सेल्सियस के बीच घूम रहा है। रात का तापमान भी 28-30 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह रहा है, जिससे लोगों को रात भर राहत नहीं मिल रही है।
सरकारी अस्पतालों में हीट स्ट्रोक के मामलों में भी बढ़ोतरी हुई है। लू चलने के कारण हर दिन कई लोग बीमार हो रहे हैं। पानी की मांग में भी असाधारण इजाफा हुआ है, और कई इलाकों में पानी की कमी की समस्या भी देखी जा रही है। बिजली की खपत भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है क्योंकि लोग अपने घरों में एयर कंडीशनर का अधिकतम उपयोग कर रहे हैं।
दिल्ली की सार्वजनिक व्यवस्था पर भी इस गर्मी का असर पड़ रहा है। सड़कों पर डामर पिघलने लगी है और कई जगहों पर गड्ढे बन गए हैं। निर्माण कार्यों में भी बाधा आई है क्योंकि इतनी अधिक गर्मी में काम करना मजदूरों के लिए असंभव हो गया है। स्कूलों में भी गर्मी की छुट्टियां बढ़ाई गई हैं।
मानसून आने के बाद की स्थिति
मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार, जब मानसून दिल्ली में दाखिल होगा, तब बारिश की स्थिति सामान्य रहेगी। इस बार मानसून साल भर का औसत बारिश देने वाला है, न कि सामान्य से कम या ज्यादा। इसका मतलब है कि दिल्ली और उत्तरी भारत में वर्षा ऋतु में उम्मीद के अनुरूप बारिश होगी।
हालांकि, देरी से मानसून आने के कारण कृषि पर भी असर पड़ेगा। किसान खरीफ की फसल की बुवाई के लिए बेसब्री से मानसून का इंतजार कर रहे हैं। मानसून में देरी का मतलब है कि बुवाई का काम भी देरी से शुरू होगा, जिससे फसल की पैदावार पर असर पड़ सकता है।
जलाशयों के जल स्तर को लेकर भी चिंता है। इस समय उत्तरी भारत के अधिकांश जलाशय सामान्य से कम जल भरे हैं। मानसून में देरी के कारण जल संकट और गहरा हो सकता है। कई शहरों में पानी की कमी की स्थिति पहले से ही गंभीर है, और यह देरी स्थिति को और भी बदतर बना सकती है।
आने वाले दिनों में दिल्ली के नागरिकों को गर्मी की इस मार से बचाव के लिए अपनी सावधानी बढ़ानी होगी। पानी का सेवन करते रहना, धूप से बचना, हल्के और ढीले कपड़े पहनना, और बाहर निकलते समय सिर को ढकना जैसे सावधानियां लेनी चाहिए। मानसून आने तक यह इंतजार भले ही कठिन हो, लेकिन जलवायु परिवर्तन के इस दौर में हमें प्रकृति के साथ तालमेल बिठाना सीखना होगा।




