परिसीमन से पहले दलों से परामर्श करें: शशि थरूर की अपील
नई दिल्ली - राज्य सभा के सदस्य और प्रमुख राजनेता शशि थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक महत्वपूर्ण अपील की है। उन्होंने कहा है कि देश के परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करने से पहले सभी राजनीतिक दलों और विभिन्न राज्यों से विस्तृत परामर्श किया जाना चाहिए। थरूर का मानना है कि इस महत्वपूर्ण कार्य को जल्दबाजी में पूरा नहीं किया जाना चाहिए।
थरूर ने इस मुद्दे पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि परिसीमन एक ऐसा संवेदनशील विषय है जो पूरे देश के राजनीतिक ढांचे को प्रभावित करता है। इसलिए इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और सर्वसम्मति होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी एक पक्ष के निर्णय से परिसीमन की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।
परिसीमन क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है
परिसीमन एक संवैधानिक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से देश के विभिन्न क्षेत्रों में लोकसभा और विधान सभाओं की निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को पुनः निर्धारित किया जाता है। यह कार्य जनसंख्या परिवर्तन और अन्य महत्वपूर्ण कारकों को ध्यान में रखते हुए किया जाता है। परिसीमन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में लगभग समान संख्या में मतदाता हों।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 82 और 170 के तहत परिसीमन की प्रक्रिया संचालित की जाती है। यह एक दशक में एक बार किया जाता है। आखिरी परिसीमन वर्ष 2008 में किया गया था। इससे पहले 2001 की जनगणना के आधार पर परिसीमन हुआ था। यह प्रक्रिया बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करती है।
शशि थरूर की मुख्य चिंताएं और सुझाव
शशि थरूर ने परिसीमन प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण बिंदु उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एक ऐसा गणितीय सूत्र खोजना जो सभी राज्यों को संतुष्ट करे, बेहद चुनौतीपूर्ण है। कुछ राज्य तेजी से विकास कर रहे हैं जबकि अन्य धीमी गति से विकास कर रहे हैं। इसी तरह से कुछ राज्य बहुत बड़े हैं तो कुछ छोटे हैं।
थरूर ने जोर दिया कि विकास दर और राज्य के आकार दोनों को परिसीमन के सूत्र में शामिल किया जाना चाहिए। यह एक जटिल समीकरण है जिसे हल करने के लिए सभी पक्षों का सहयोग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि द्विदलीय और अंतर-राज्यीय सहयोग के बिना इस समस्या का समाधान संभव नहीं है।
थरूर का मानना है कि परिसीमन को लेकर विभिन्न राज्यों में अलग-अलग विचार हो सकते हैं। दक्षिणी राज्यों को अपनी जनसंख्या वृद्धि में कमी को लेकर चिंता है। उत्तरी राज्यों को अपनी बढ़ती जनसंख्या से लाभ की उम्मीद है। इन सभी मुद्दों पर खुली बहस होनी चाहिए और सर्वसम्मति से समाधान खोजा जाना चाहिए।
परामर्श की आवश्यकता क्यों है
शशि थरूर की अपील पूरी तरह उचित और तार्किक है। परिसीमन एक ऐसा विषय है जो पूरे देश को प्रभावित करता है। विभिन्न राज्यों के हित अलग-अलग होते हैं। कुछ राज्यों को परिसीमन से लाभ हो सकता है तो कुछ को नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए सभी पक्षों का विश्वास अर्जित करना बहुत जरूरी है।
राजनीतिक दलों का परामर्श भी आवश्यक है क्योंकि परिसीमन का राजनीतिक प्रभाव होता है। विभिन्न दलों के अलग-अलग विचार हो सकते हैं। सत्तारूढ़ दल और विरोधी दलों के बीच इस विषय पर समझौते की आवश्यकता है। परिसीमन को कभी भी किसी दल का राजनीतिक हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए।
थरूर ने अपनी अपील में व्यावहारिकता और समझदारी का परिचय दिया है। उन्होंने न तो किसी दल की आलोचना की है और न ही किसी को अवैध कार्य का आरोप लगाया है। उन्होंने केवल यह कहा है कि परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर व्यापक परामर्श होना चाहिए। यह एक लोकतांत्रिक दृष्टिकोण है जो भारतीय संविधान की भावना के अनुरूप है।
कुल मिलाकर, शशि थरूर की अपील देश के लिए एक सकारात्मक संकेत है। यह दर्शाता है कि भारतीय राजनीति में अभी भी विवेक और समझदारी मौजूद है। परिसीमन एक तकनीकी और राजनीतिक प्रक्रिया है जिसे सावधानी और परामर्श के साथ संपन्न किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री और अन्य राजनीतिक नेताओं को थरूर की अपील पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। इससे परिसीमन प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और सभी पक्षों का विश्वास बना रहेगा। यह भारतीय लोकतंत्र को मजबूत करेगा और सभी नागरिकों को समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करेगा।




