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Friday, 05 June 2026
समाचार

धीरेंद्र शास्त्री का नागपुर में विवादित बयान

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Komal
संवाददाता
📅 27 April 2026, 6:02 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.0K views
धीरेंद्र शास्त्री का नागपुर में विवादित बयान
📷 aarpaarkhabar.com

नागपुर में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक बार फिर से विवादास्पद बयान दिए हैं। उन्होंने 'लव जिहाद' को देश के लिए एक गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि यह मुद्दा समाज के लिए अत्यंत चिंताजनक है। शास्त्री के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं। कुछ लोग उनके विचारों का समर्थन कर रहे हैं तो कुछ इसका विरोध भी कर रहे हैं।

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने बयान में कहा कि मध्य प्रदेश में पिछले साल भर में 280 से अधिक 'लव जिहाद' के मामले दर्ज किए गए हैं। वह इस बात से चिंतित हैं कि यह समस्या अब महाराष्ट्र में भी तेजी से फैल रही है। शास्त्री के अनुसार, यह केवल एक व्यक्तिगत समस्या नहीं है बल्कि यह पूरे राष्ट्र की सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था को प्रभावित करने वाला मुद्दा है।

यह पहली बार नहीं है जब बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर ने ऐसे बयान दिए हैं। कुछ दिन पहले ही उन्होंने नागपुर में एक और विवादास्पद बयान दिया था। उस बयान में उन्होंने लोगों से अपील की थी कि वे अपने परिवार में चार बच्चे पैदा करें। उन्होंने कहा कि इन चारों बच्चों में से कम से कम एक बच्चे को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सेवा के लिए समर्पित किया जाना चाहिए। इस बयान को लेकर भी काफी विरोध हुआ था।

धीरेंद्र शास्त्री की पृष्ठभूमि और प्रभाव

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को हिंदू समाज में एक प्रभावशाली धार्मिक नेता माना जाता है। उनके पास लाखों अनुयायी हैं और सोशल मीडिया पर भी उनका काफी बड़ा फॉलोइंग है। वह मंदिरों के दरबार में कार्यक्रम आयोजित करते हैं जहां हजारों लोग इकट्ठा होते हैं। उनके धार्मिक प्रवचन और सामाजिक विचार काफी लोकप्रिय हैं।

हालांकि, बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर के कुछ विचार विवादास्पद भी माने जाते हैं। उनके बयान अक्सर विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर गहरे विभाजन पैदा करते हैं। कुछ लोग उन्हें समाज को एकता के सूत्र में बांधने वाले नेता के रूप में देखते हैं, जबकि अन्य उन्हें विभाजनकारी मानते हैं।

लव जिहाद मुद्दे पर सरकारों का रुख

'लव जिहाद' के मुद्दे पर भारतीय राज्य सरकारों ने अलग-अलग कानून बनाए हैं। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कई अन्य राज्यों ने इसके खिलाफ कानून लागू किए हैं। इन कानूनों के तहत अगर किसी को धर्म परिवर्तन के लिए जबरदस्ती का आरोप लगता है तो कड़ी सजा का प्रावधान है।

हालांकि, इन कानूनों की आलोचना भी की गई है। मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि इन कानूनों का दुरुपयोग व्यक्तिगत संबंधों को तोड़ने के लिए किया जा रहा है। वह कहते हैं कि विवाह और धार्मिक विश्वास व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मामले हैं और सरकार को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

नागपुर में आलोचनाएं और प्रतिक्रियाएं

धीरेंद्र शास्त्री के नागपुर में दिए गए बयान के लिए विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों से आलोचनाएं आई हैं। कुछ महिला संगठनों का कहना है कि इस तरह के बयान महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। वह कहती हैं कि महिलाओं को अपनी पसंद का जीवन जीने का अधिकार होना चाहिए।

दूसरी ओर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समर्थकों का मानना है कि शास्त्री सही बात कह रहे हैं। वह कहते हैं कि धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा करना अत्यंत जरूरी है। उनके अनुसार, समाज को अपनी परंपराओं और मूल्यों को संरक्षित रखने के लिए प्रयास करने चाहिए।

नागपुर के विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। कुछ दलों ने शास्त्री के विचारों का समर्थन किया है, जबकि अन्य ने इसकी आलोचना की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में और भी विवादास्पद बन सकता है।

कुल मिलाकर, धीरेंद्र शास्त्री के नागपुर में दिए गए बयान ने एक बार फिर से 'लव जिहाद' जैसे संवेदनशील मुद्दे पर समाज में बहस को जन्म दिया है। यह देश में एक महत्वपूर्ण सामाजिक विषय है जिस पर विभिन्न दृष्टिकोण से विचार करने की आवश्यकता है।