दिवाली 8 या 9 नवंबर: सही तारीख और लक्ष्मी पूजा मुहूर्त
इस साल दिवाली 8 नवंबर को रविवार को मनाई जाएगी। कार्तिक अमावस्या 8 नवंबर को शुरू होकर 9 नवंबर को समाप्त होगी। लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त जानें।
इस साल दिवाली का त्योहार 8 नवंबर को मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास की अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11:28 बजे शुरू होगी और 9 नवंबर को दोपहर 12:32 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि और प्रदोष काल को ध्यान में रखते हुए दिवाली का पवित्र त्योहार 8 नवंबर दिन रविवार को मनाया जाएगा।
दिवाली की सही तारीख और महत्व
दिवाली भारतीय संस्कृति का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है। यह त्योहार प्रकाश और अंधकार के बीच के संघर्ष का प्रतीक है। भगवान राम की चौदह वर्ष की वनवास के बाद घर लौटने की खुशी में यह पर्व मनाया जाता है। हर साल इस दिन को लेकर लोगों के मन में रोमांच और उत्साह रहता है।
इस बार दिवाली 8 नवंबर को रविवार के दिन पड़ रहा है। पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास की अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11:28 बजे शुरू होती है। यह तिथि 9 नवंबर को दोपहर 12:32 बजे समाप्त होती है। लेकिन पूरे भारत में दिवाली को 8 नवंबर को ही मनाया जाएगा क्योंकि उदया तिथि और प्रदोष काल के नियमों के अनुसार दिवाली का पर्व 8 नवंबर को ही पड़ता है।
दिवाली का त्योहार केवल भारत में नहीं, बल्कि दुनिया भर में रहने वाले हिंदुओं, सिखों, जैनों और बौद्धों द्वारा मनाया जाता है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। घरों को साफ-सुथरा किया जाता है, रंग रोगन किया जाता है और रोशनी से सज़ाया जाता है।
लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त
दिवाली की रात को लक्ष्मी पूजा की जाती है। लक्ष्मी देवी धन, समृद्धि और सौभाग्य की देवी मानी जाती हैं। इस दिन को लक्ष्मी माता के पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ दिन माना जाता है। घरों में दीपक जलाए जाते हैं, माता लक्ष्मी को फूल और अगरबत्ती से पूजा जाता है।
लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। 8 नवंबर को प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजा की जाएगी। प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद का समय होता है। इसी समय में माता लक्ष्मी को पूजा जाता है। कहा जाता है कि इसी समय पर किया गया पूजन सबसे अधिक फलदायी होता है।
पूजा के दौरान घर के सभी सदस्य एक साथ बैठते हैं। माता लक्ष्मी को नए कपड़े, गहने और फूल अर्पित किए जाते हैं। घर में खीर, पूरी और मिठाई बनाई जाती है। पड़ोसियों और रिश्तेदारों को यह मिठाई और प्रसाद बांटा जाता है। परिवार के सभी सदस्य एक-दूसरे को गले लगाते हैं और खुशियां मनाते हैं।
दिवाली की तैयारी और परंपराएं
दिवाली की तैयारी महीनों पहले से शुरू हो जाती है। घरों को साफ-सुथरा किया जाता है। दीवारों को नए रंग से पोता जाता है। खिड़कियों पर तोरण और लड़ियां लगाई जाती हैं। बाजारों में दिवाली की खरीदारी का माहौल रहता है।
दिवाली पर नए कपड़े खरीदे जाते हैं। बर्तनों की खरीदारी की जाती है। मिठाई की दुकानों पर भीड़ रहती है। दिवाली के दिन सभी घरों में दीपक जलाए जाते हैं। घरों को रंग-बिरंगी झालरों से सज़ाया जाता है। पटाखों की आतिशबाजी की जाती है।
दिवाली की परंपराओं में रंगों का भी विशेष महत्व है। होली और दिवाली दोनों ही रंगों का त्योहार है। दिवाली पर लाल, हरा, पीला और नीले रंग के दीपक और झालरें लगाई जाती हैं। घरों में खुशबू फैलाने के लिए अगरबत्ती और मोमबत्तियां जलाई जाती हैं।
यह त्योहार पूरे समाज को एक साथ लाता है। अमीर और गरीब, बड़े और छोटे सभी दिवाली को समान उत्साह के साथ मनाते हैं। पड़ोसियों के बीच प्रेम और भाईचारे की भावना बढ़ती है। सभी अपने कलह-क्लेश भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाते हैं।
निष्कर्ष
इस साल दिवाली 8 नवंबर को मनाई जाएगी। यह दिन रविवार का होगा। पंचांग के अनुसार यह तारीख सर्वश्रेष्ठ है। परिवार के सभी सदस्यों को इस दिन को मनाने के लिए अग्रिम तैयारी कर लेनी चाहिए। लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त निर्धारित करते समय पंडित की सलाह लेनी चाहिए। दिवाली की परंपराओं को निभाते हुए हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि इस त्योहार का असली मतलब क्या है। दिवाली केवल खरीदारी और पटाखों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह प्रकाश, प्रेम और समृद्धि का प्रतीक है। इस दिवाली अपने घरों को पवित्र प्रकाश से भरें और सभी के साथ खुशियां बांटें।




