डोभाल ने US विदेश मंत्री को पाकिस्तान की सच्चाई बताई
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ हैदराबाद हाउस में हुई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक में पाकिस्तान की आतंकवाद संबंधी असलियत से रुबियो को विस्तार से अवगत कराया। इस बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी मौजूद थे। डोभाल ने अपने अमेरिकी समकक्ष को साफ संदेश दिया कि दक्षिण एशिया में आतंकवाद से निपटने के लिए सभी को सक्रिय रुख अपनाना होगा और कोई भी ढुलमुल रवैया नहीं चल सकता।
इस बैठक का आयोजन तब हुआ जब पूरे विश्व में आतंकवाद एक प्रमुख सुरक्षा चुनौती बनकर उभर रहा है। डोभाल ने अमेरिकी विदेश मंत्री को भारत के अनुभव से सीखने के लिए कहा। भारत को पिछले कई दशकों से पाकिस्तान में पनपने वाले आतंकी नेटवर्क का सामना करना पड़ रहा है। ये आतंकी संगठन न सिर्फ भारत के खिलाफ हिंसक कार्रवाइयां करते हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र की शांति और स्थिरता को खतरे में डालते हैं।
डोभाल का सख्त संदेश
डोभाल ने इस बैठक में आतंकवाद को एक विस्तृत इकोसिस्टम बताया जो अलग-अलग देशों में फैल चुका है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद महज एक सुरक्षा समस्या नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक खतरा है जो पूरी दुनिया को प्रभावित कर रहा है। पाकिस्तान के अंदर संचालित होने वाले आतंकी संगठनों की गतिविधियां इस क्षेत्र की शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। डोभाल ने रुबियो से कहा कि अब समय आ गया है कि हर देश को एक्शन मोड में आना होगा।
भारत के लिए पाकिस्तान में संचालित आतंकी नेटवर्क एक लंबे समय से कांटे की तरह चुभा रहा है। इन संगठनों ने भारतीय सीमा पर अनगिनत हमले किए हैं और हजारों निर्दोष लोगों की जान ले चुके हैं। सालों पहर मुंबई में 26/11 का आतंकवादी हमला हो या फििर अन्य छोटी-बड़ी घटनाएं, सभी में पाकिस्तान से मदद मिलने के संकेत मिले हैं। डोभाल ने अमेरिकी विदेश मंत्री को इन सभी घटनाओं के बारे में विस्तार से समझाया।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर गहन विचार-विमर्श
द्विपक्षीय बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी विस्तृत चर्चा हुई। भारत और अमेरिका दोनों ही दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता को लेकर चिंतित हैं। चीन के बढ़ते दबाव और उसकी आक्रामक नीतियों के मद्देनजर दोनों देशों को एक-दूसरे के साथ मजबूत रिश्ते बनाने की जरूरत है। भारत का भारत-प्रशांत महासागरीय क्षेत्र में रणनीतिक महत्व है। अमेरिका भी इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
बैठक में विदेश मंत्री जयशंकर ने भारत के विदेश नीति के सिद्धांतों को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से शांति और सद्भावना में विश्वास करता है, लेकिन अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं कर सकता। पाकिस्तान से आने वाली किसी भी तरह की आतंकवादी धमकी का जवाब भारत देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
रक्षा सहयोग और भविष्य की दिशा
बैठक में रक्षा सहयोग पर भी विस्तार से चर्चा हुई। भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की बात की गई। दोनों देश नई रक्षा तकनीक और हथियार प्रणालियों को साझा करने पर सहमत हुए। साथ ही, सैन्य प्रशिक्षण और खुफिया जानकारी साझा करने पर भी बल दिया गया।
अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने भारत की आतंकवाद विरोधी नीतियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आतंकवाद से लड़ने के लिए तैयार है। साथ ही, उन्होंने पाकिस्तान से भी आतंकवाद के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की उम्मीद जताई। दक्षिण एशिया में शांति और सुरक्षा सभी देशों की साझी जिम्मेदारी है।
यह बैठक भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को दर्शाती है। डोभाल का यह सख्त संदेश स्पष्ट संकेत है कि भारत अब आतंकवाद के प्रति कोई समझौता नहीं करेगा। पाकिस्तान में चलने वाले आतंकी नेटवर्क को खत्म करने के लिए भारत सभी अंतरराष्ट्रीय समर्थन हासिल करने के लिए सक्रिय है। आने वाले समय में भारत-अमेरिका संबंध इस क्षेत्र की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।




