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Saturday, 03 October 2026
राजनीति

ईवी ड्राफ्ट पॉलिसी: पेट्रोल-डीजल वाहन खत्म करने की योजना

author
Komal
संवाददाता
📅 12 April 2026, 5:45 AM ⏱ 1 मिनट 👁 960 views
ईवी ड्राफ्ट पॉलिसी: पेट्रोल-डीजल वाहन खत्म करने की योजना
📷 aarpaarkhabar.com

सरकार की महत्वाकांक्षी ईवी नीति का उद्देश्य

भारतीय सरकार देश की बढ़ती प्रदूषण समस्या का समाधान करने के लिए एक महत्वाकांक्षी कदम उठाने वाली है। नई इलेक्ट्रिक वाहन ड्राफ्ट नीति के जरिए सरकार आने वाले वर्षों में पेट्रोल और डीजल वाहनों को धीरे-धीरे सिस्टम से बाहर करने की योजना बना रही है। यह पहल केवल एक नीति नहीं है, बल्कि देश के भविष्य को हरा-भरा और स्वच्छ बनाने की एक व्यापक रणनीति है।

इस नीति के तहत सरकार का मुख्य उद्देश्य प्रदूषण के सबसे बड़े स्रोतों पर सीधा प्रहार करना है। परिवहन क्षेत्र भारत में कार्बन उत्सर्जन के प्रमुख कारणों में से एक है और सरकार इसी पहलू पर ध्यान केंद्रित कर रही है। ईवी नीति के माध्यम से सरकार न केवल प्रदूषण को कम करना चाहती है, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देकर एक नया इकोसिस्टम तैयार करना चाहती है।

यह ड्राफ्ट पॉलिसी विभिन्न हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श के बाद तैयार की गई है। इसमें निर्माताओं, उपभोक्ताओं, पर्यावरणविदों और सरकारी एजेंसियों के सुझाव शामिल हैं। सरकार की यह नीति भारत को ग्लोबल साउथ में एक पर्यावरण सचेत राष्ट्र के रूप में स्थापित करने का प्रयास है।

ईवी नीति में निहित मुख्य प्रावधान और लक्ष्य

इस ड्राफ्ट नीति में सरकार ने कई महत्वपूर्ण प्रावधान रखे हैं जो आने वाले दशक में भारतीय परिवहन क्षेत्र को बदल देंगे। सरकार का पहला लक्ष्य वर्ष २०३५ तक सभी नए कार बिक्री में से ५० प्रतिशत को इलेक्ट्रिक वाहन बनाना है। यह एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य है जिसके लिए विस्तृत योजना तैयार की गई है।

इसके लिए सरकार ने निम्नलिखित कदम उठाने का फैसला किया है:

पहला, इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर आकर्षणीय सब्सिडी और कर में छूट देना है। सरकार ने पहचाना है कि ईवी की अधिक कीमत आम जनता के लिए बाधा है, इसलिए वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किए जा रहे हैं। इससे मध्यम वर्गीय परिवार भी इलेक्ट्रिक वाहन खरीद सकेंगे।

दूसरा, देशभर में चार्जिंग स्टेशनों का व्यापक नेटवर्क स्थापित करना है। सरकार को समझ है कि बिना पर्याप्त चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के, लोग ईवी खरीदने में संकोच करेंगे। इसलिए सड़कों के किनारे, शॉपिंग मॉल्स और अपार्टमेंट्स में चार्जिंग सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

तीसरा, घरेलू इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग को मजबूत करना है। सरकार स्थानीय निर्माताओं को प्रोत्साहन दे रही है ताकि भारत में ईवी का निर्माण बढ़े और रोजगार सृजन हो।

परिवहन क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव की संभावनाएं

इस ईवी ड्राफ्ट नीति के कार्यान्वयन से भारतीय परिवहन क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव आने वाला है। पहली बात तो यह है कि हमारे शहरों की वायु गुणवत्ता में महत्वपूर्ण सुधार होगा। पेट्रोल और डीजल वाहनों से निकलने वाला धुआं भारतीय शहरों में प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है।

जब इलेक्ट्रिक वाहन अधिक संख्या में सड़कों पर आएंगे, तो सीधे उत्सर्जन में भारी गिरावट आएगी। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे महानगरों में जहां प्रदूषण की समस्या गंभीर है, वहां सबसे अधिक लाभ देखने को मिलेगा। यह नीति न केवल वयस्कों के लिए बल्कि बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी साबित होगी।

दूसरा, इस नीति से देश की ऊर्जा आवश्यकताओं में बदलाव आएगा। वर्तमान में भारत विदेश से बड़ी मात्रा में तेल आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा की बर्बादी होती है। इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग से खनिज तेल पर निर्भरता कम होगी और भारत की ऊर्जा स्वावलंबन में वृद्धि होगी।

तीसरा, यह नीति रोजगार के नए अवसर सृजित करेगी। इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण, बिक्री, रखरखाव और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में लाखों नए नौकरियां पैदा होंगी। विशेष रूप से युवाओं के लिए यह एक बड़ा अवसर होगा।

चौथा, भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए भी यह नीति लाभकारी होगी। ईवी सेक्टर में भारत अगर अग्रगामी बन जाए तो यह एक बड़ा निर्यात बाजार बन सकता है। चीन पहले से ही इस क्षेत्र में वैश्विक नेता है, लेकिन भारत भी इस प्रतिस्पर्धा में आगे आ सकता है।

अंत में, इस ईवी ड्राफ्ट नीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह भारत की अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को भी पूरा करता है। भारत ने पेरिस समझौते के तहत अपने कार्बन उत्सर्जन को कम करने का वादा किया है, और यह नीति उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार की इस दूरदर्शिता से भारत न केवल पर्यावरण की रक्षा करेगा, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार होगा।