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Saturday, 06 June 2026
धर्म

गंगा दशहरा 2026: सही तारीख और शुभ मुहूर्त

author
Komal
संवाददाता
📅 24 May 2026, 7:31 AM ⏱ 1 मिनट 👁 411 views
गंगा दशहरा 2026: सही तारीख और शुभ मुहूर्त
📷 aarpaarkhabar.com

गंगा दशहरा हिंदुओं का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र त्योहार है। इस दिन को माता गंगा के धरती पर अवतार का जश्न मनाया जाता है। हर साल लाखों श्रद्धालु इस दिन गंगा नदी में पवित्र स्नान करते हैं और अपने पापों से मुक्ति पाने की कामना करते हैं। लेकिन साल दर साल गंगा दशहरे की तारीख बदलती रहती है क्योंकि यह त्योहार चंद्र कैलेंडर पर निर्भर है। ऐसे में 2026 में गंगा दशहरा 25 या 26 मई को मनाया जाएगा, इस सवाल का जवाब जानना बहुत जरूरी है।

गंगा दशहरा ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह तिथि आमतौर पर मई के आखिरी हफ्ते या जून के शुरुआती दिनों में पड़ती है। 2026 में गंगा दशहरा 26 मई को मनाया जाएगा। यह तारीख पंचांग विशेषज्ञों द्वारा निर्धारित की गई है और इसी दिन सबसे उत्तम शुभ मुहूर्त रहेगा।

गंगा दशहरा 2026 की सही तारीख

गंगा दशहरा 2026 में 26 मई को मनाया जाएगा। यह दिन बुधवार होगा। ज्येष्ठ शुक्ल दशमी की तिथि सुबह के समय से शुरू होगी और रात तक चलेगी। इसलिए यदि आप पूरे दिन के शुभ मुहूर्त में स्नान और पूजा करना चाहते हैं तो 26 मई का संपूर्ण दिन आपके लिए शुभ रहेगा।

गंगा दशहरे की तिथि निर्धारण में महीनों का गणना विशेष रूप से की जाती है। ज्येष्ठ माह को गर्मी का महीना माना जाता है। इसी महीने में गंगा को धरती पर अवतार लेने का संदर्भ मिलता है। जब शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि आती है तो उसी दिन गंगा दशहरा मनाया जाता है। 2026 में यह तिथि 26 मई को पूरी तरह संपन्न होगी।

पवित्र स्नान और पूजा का शुभ मुहूर्त

गंगा दशहरे पर पवित्र स्नान का समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। माना जाता है कि इसी दिन गंगा नदी में स्नान करने से सभी पापों का नाश हो जाता है। 26 मई 2026 को गंगा दशहरा मनाने वाले श्रद्धालुओं के लिए सूर्योदय के बाद का समय सबसे उत्तम रहेगा। आप सुबह जल्दी उठकर गंगा में पवित्र स्नान कर सकते हैं।

पूजा के लिए शुभ मुहूर्त आमतौर पर सूर्योदय के दो घंटे बाद से शुरू होता है। स्नान के बाद घर में बैठकर भी आप गंगा माता की पूजा कर सकते हैं। इस दिन गंगा को जल, दूध, शहद और घी का अर्घ्य दिया जाता है। घर की महिलाएं परिवार की सुख और समृद्धि के लिए विशेष पूजा करती हैं।

यदि आप गंगा नदी के किनारे रहते हैं तो इस दिन सीधे नदी में स्नान करें। यदि गंगा से दूर हैं तो घर पर ही गंगा जल से स्नान करें और पूजा के समय गंगा माता का ध्यान करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भक्ति भाव और श्रद्धा के साथ किया गया काम ही वास्तव में फलदायी होता है।

गंगा दशहरे की पूजा विधि और धार्मिक महत्व

गंगा दशहरे की पूजा विधि बहुत सरल है। इस दिन सुबह जल्दी स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें। यदि संभव हो तो सफेद या पीले रंग के कपड़े पहनें। फिर घर के पूजा स्थल पर गंगा जल रखें और उसके सामने दीप जलाएं। गंगा माता की तस्वीर या मूर्ति को पुष्पों से सजाएं।

पूजा में आप फूल, अगरबत्ती, धूप और नैवेद्य का उपयोग कर सकते हैं। गंगा को जल, दूध, शहद, घी और फल का अर्घ्य दें। पूजा के बाद आरती करें और गंगा माता से परिवार की खुशहाली और सुरक्षा की कामना करें। इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है।

गंगा दशहरे का धार्मिक महत्व बहुत अधिक है। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, इसी दिन गंगा राजा भगीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर धरती पर आई थीं। गंगा को सभी नदियों की माता माना जाता है। इस दिन गंगा में स्नान करने से जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिलती है।

इस वर्ष गंगा दशहरा 26 मई को मनाया जाएगा। इस दिन को अपने कैलेंडर में अवश्य नोट कर लें। परिवार के सभी सदस्यों के साथ इस पावन पर्व को मनाएं। गंगा माता की पूजा करें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। यदि आप गंगा नदी के पास रहते हैं तो इस दिन जरूर पवित्र स्नान करें। यह संस्कार और परंपरा को आगे बढ़ाने का बेहतरीन तरीका है।

गंगा दशहरे के दिन खासतौर पर गायों को खीर पूरी खिलाई जाती है क्योंकि गायों को गंगा का प्रतीक माना जाता है। ब्राह्मणों को दान देना भी इस दिन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। घर के बुजुर्गों का आशीर्वाद लें और उनके पैर छुएं। यह परंपरा सदियों पुरानी है और इसे हमेशा जारी रखना चाहिए।